आदिवासी और अनुसूचित समुदायों ने भारत की पहचान और आत्मा को संरक्षित रखा: मोहन भागवत

होमताजा खबरदेश
आदिवासी और अनुसूचित समुदायों ने भारत की पहचान और आत्मा को संरक्षित रखा: भागवत
Last Updated:May 03, 2026, 08:58 IST
Mohan Bhagwat News: संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि आदिवासी और अनुसूचित जाति समुदायों ने भारत की आत्मा बचाई है. इन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास की मुख्यधारा से जोड़ना जरूरी है. भागवत मुंबई में आयोजित कर्मयोगी पुरस्कार समारोह में बोल रहे थे.
संघ प्रमुख मोहन भागवत. फाइल फोटो
Mohan Bhagwat News: राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि विदेशी आक्रमणों और तमाम कठिनाइयों के बावजूद आदिवासी समुदायों और अनुसूचित जातियों ने भारत की पहचान और उसकी आत्मा को संरक्षित रखा. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इन समुदायों को विकास की मुख्य धारा में समुचित अवसरों और सुविधाओं के साथ जोड़ा जाना चाहिए. भागवत शनिवार को मुंबई में आयोजित कर्मयोगी पुरस्कार समारोह में बोल रहे थे. इस कार्यक्रम में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी भी मौजूद थे.
भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि मानव जीवन का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत लाभ तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज को वापस देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि हम सभी एक बड़े परिवार का हिस्सा हैं. समाज के कल्याण के लिए काम करना कोई एहसान नहीं, बल्कि हमारा कर्तव्य है. जब हम दूसरों की सेवा करते हैं, तो इससे हमारा स्वयं का विकास भी होता है.
उन्होंने आगे कहा कि भारतीय समाज की मूल भावना और मूल्य प्रणाली हजारों वर्षों से कायम है, जिसे अक्सर हिंदू समाज की पहचान के रूप में देखा जाता है. हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि ऐतिहासिक कारणों, उदासीनता और विदेशी आक्रमणों के चलते इस मूल्य प्रणाली को संरक्षित करने वालों को भारी कीमत चुकानी पड़ी. आरएसएस प्रमुख के अनुसार विदेशी आक्रमणकारियों ने यह समझ लिया था कि भारत की असली ताकत उसकी सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों में निहित है. इसलिए उन्होंने उन समुदायों को निशाना बनाया जो इन मूल्यों को जीवित रखे हुए थे. इसके बावजूद आदिवासी और अनुसूचित जाति समुदायों ने देश की आत्मा को बचाए रखा.
विश्व असंतुलन और अस्थिरता के दौर से गुजर रहा
भागवत ने कहा कि इतनी प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद देश की मूल पहचान इन समुदायों में सुरक्षित रही. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आज आवश्यकता है कि इन वर्गों को समान अवसर, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाएं प्रदान कर उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाए. वैश्विक परिदृश्य पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान विश्व असंतुलन और अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है. ऐसे समय में भारत एक स्थिरता प्रदान करने वाली शक्ति के रूप में उभर सकता है. उन्होंने कहा कि भारत को केवल अपने हितों की रक्षा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी समस्याओं के समाधान में योगदान देना चाहिए.
भागवत ने यह भी कहा कि समाज के शिक्षित और विकसित वर्ग समय के साथ इन समुदायों से दूर हो गए हैं, जिससे सामाजिक दूरी बढ़ी है. उन्होंने इस अंतर को पाटने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि समावेशी विकास ही एक मजबूत और संतुलित समाज का आधार बन सकता है. अपने संबोधन के अंत में उन्होंने दोहराया कि समाज की सेवा करना हर व्यक्ति का कर्तव्य है और यही भावना देश को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. न्यूजलेटर
अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज
खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में
सबमिट करें



