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Organ Donation News | जालोर की महिला ने अंगदान से बचाई 3 जाने

Last Updated:May 06, 2026, 05:39 IST

Jalore Organ Donation News: जालोर के जसवंतपुरा की 35 वर्षीय मोवनदेवी बागरी की सड़क हादसे में मौत के बाद उनके परिवार ने अंगदान का साहसिक फैसला लिया. अहमदाबाद सिविल अस्पताल में ब्रेन डेड घोषित होने पर पति वचनारामजी की सहमति से उनका लीवर और दो किडनी दान की गईं, जिससे तीन लोगों को नया जीवन मिला है. दुख की घड़ी में मानवता की यह मिसाल पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन गई है, जो सिखाती है कि मौत के बाद भी किसी की जिंदगी में उजाला किया जा सकता है.

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Jalore Organ Donation: जालोर की मोवनदेवी ने अंगदान से बचाई तीन जानेंZoomजालोर की महिला का महादान

जालोर/अहमदाबाद, 6 मई 2026: कभी-कभी जिंदगी हमें ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर देती है, जहां हर तरफ सिर्फ दर्द और अंधेरा नजर आता है. लेकिन ऐसे ही मुश्किल पलों में लिए गए फैसले इतिहास बन जाते हैं और इंसानियत की एक नई मिसाल कायम करते हैं. राजस्थान के जालोर जिले के जसवंतपुरा गांव की 35 वर्षीय मोवनदेवी बागरी की कहानी भी आज कुछ ऐसी ही प्रेरणा दे रही है. एक दर्दनाक सड़क हादसे ने उनसे उनकी जिंदगी छीन ली, लेकिन उनके परिवार के एक साहसिक निर्णय ने इस दुख को दूसरों के जीवन की रोशनी में बदल दिया.

सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने के बाद मोवनदेवी को तुरंत अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया था. वहां डॉक्टरों की अनुभवी टीम ने उन्हें बचाने की हर संभव कोशिश की, लेकिन चोट इतनी गहरी थी कि आखिरकार उन्हें ‘ब्रेन डेड’ घोषित करना पड़ा. यह वह क्षण था जब किसी भी परिवार के लिए दुनिया उजड़ जाने जैसा महसूस होता है. मोवनदेवी का परिवार गहरे सदमे में था, लेकिन विधाता को कुछ और ही मंजूर था.

पति वचनारामजी का प्रेरक निर्णयजब अस्पताल की टीम ने मोवनदेवी के पति वचनारामजी को अंगदान के महत्व के बारे में विस्तार से समझाया, तो उन्होंने अपने व्यक्तिगत वियोग और गहरे दुख को किनारे रखकर एक ऐसा फैसला लिया, जो समाज के लिए नजीर बन गया. उन्होंने तुरंत अपनी पत्नी के अंगदान के लिए लिखित सहमति दे दी. जिस समय एक इंसान अपने जीवन के सबसे बड़े व्यक्तिगत दुख से गुजर रहा हो, उस समय वह समाज और दूसरों की सांसों के बारे में सोच पाए—यह सिर्फ हिम्मत की बात नहीं है, बल्कि यह पराकाष्ठा वाली सच्ची इंसानियत है.

तीन जिंदगियों को मिला नया सवेरावचनारामजी के इस ऐतिहासिक फैसले के बाद मेडिकल प्रक्रिया शुरू की गई और मोवनदेवी का एक लीवर और दो किडनी सफलतापूर्वक दान किए गए. ये अंग अब तीन अलग-अलग गंभीर मरीजों के जीवन में नई उम्मीद और नई सुबह बनकर पहुंचे हैं. जहाँ एक तरफ जसवंतपुरा के बागरी परिवार ने अपनी प्रिय सदस्य को खोया, वहीं देश के तीन अन्य परिवारों को अपने अपनों के साथ जीने की एक नई वजह और नया जीवन मिल गया है.

समाज के लिए गहरा संदेशमोवनदेवी और उनके पति का यह फैसला हमें याद दिलाता है कि इंसानियत कभी नहीं मरती; वह हर निस्वार्थ और अच्छे फैसले में जिंदा रहती है. अंगदान केवल एक आधुनिक चिकित्सा प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह इस संसार का सबसे बड़ा दान है—एक ऐसा दान, जो मृत्यु के बाद भी जीवन की निरंतरता को सुनिश्चित करता है. यह घटना हम सभी के लिए एक बड़ी प्रेरणा है कि हम भी आगे आएं और अंगदान जैसे नेक कार्य का संकल्प लेकर किसी के जीवन का हिस्सा बनें.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें

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