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खेत बीमार है या तंदुरुस्त? खरीफ सीजन से पहले कराएं ‘मिट्टी का हेल्थ चेकअप’, जानें सैम्पल लेने का सही तरीका

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उदयपुर: खेती में मुनाफे के लिए मिट्टी की जांच है जरूरी, जानें पूरी प्रक्रिया

Last Updated:May 07, 2026, 11:00 IST

Soil Testing in Udaipur: उदयपुर में खरीफ सीजन से पहले कृषि विभाग ने किसानों को मिट्टी की जांच करवाने की सलाह दी है. राजस्थान कृषि महाविद्यालय और कुम्हारों का भट्ठा स्थित केंद्रों पर यह सुविधा उपलब्ध है. मिट्टी परीक्षण से किसानों को जमीन में पोषक तत्वों की कमी का पता चलेगा, जिससे वे सही मात्रा में खाद का उपयोग कर फसल की पैदावार बढ़ा सकेंगे और लागत कम कर सकेंगे. जांच के बाद किसानों को ‘मृदा स्वास्थ्य कार्ड’ भी जारी किया जाएगा.

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार. अक्सर किसान बिना मिट्टी की जांच कराए खेत में अत्यधिक यूरिया या अन्य उर्वरकों का प्रयोग कर देते हैं. इससे मिट्टी की उपजाऊ शक्ति धीरे-धीरे घटने लगती है. जिसका सीधा असर फसल के उत्पादन पर पड़ता है. मिट्टी की जांच कराने से यह स्पष्ट हो जाता है कि खेत में नाइट्रोजन. फास्फोरस. पोटाश. जिंक और सल्फर जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की वर्तमान स्थिति क्या है. इससे किसानों को यह समझने में मदद मिलती है कि मिट्टी में किस तत्व की कमी है और उसे कितनी मात्रा में पूरा करने की आवश्यकता है.

उदयपुर में किसान कई जगहों पर अपनी मिट्टी की जांच करवा सकते हैं. राजस्थान कृषि महाविद्यालय की लैब में मिट्टी की विस्तृत जांच की सुविधा उपलब्ध है. इसके अलावा कृषि विज्ञान केंद्र में भी किसानों के लिए मिट्टी परीक्षण की व्यवस्था की गई है. वहीं कृषि विभाग कार्यालय, कुम्हारों का भट्टा में भी किसान अपने खेत की मिट्टी का नमूना जमा करवा सकते हैं. यहां विशेषज्ञ किसानों को मिट्टी की रिपोर्ट समझाने के साथ यह भी बताते हैं कि किस फसल के लिए कौन-सी खाद और पोषक तत्व जरूरी हैं.

विशेषज्ञ बताते हैं कि मिट्टी की जांच करवाने के लिए खेत के अलग-अलग हिस्सों से मिट्टी के सैंपल लेने चाहिए. करीब 6 से 8 जगहों से 6 इंच गहराई तक की मिट्टी निकालकर उसे अच्छी तरह मिलाया जाता है. इसके बाद लगभग आधा किलो मिट्टी का नमूना जांच के लिए लैब में जमा कराया जाता है. ध्यान रखने वाली बात यह है कि मिट्टी का सैंपल न तो बहुत गीला हो और न ही उसमें कंकड़ या घास मिली हो. सही तरीके से लिया गया सैंपल ही सही रिपोर्ट देता है.

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विशेषज्ञों के अनुसार. मिट्टी की जांच के लिए खेत के अलग-अलग हिस्सों से नमूने लेना जरूरी है. इसके लिए करीब 6 से 8 जगहों से 6 इंच गहराई तक की मिट्टी निकाली जाती है और उसे आपस में अच्छी तरह मिला लिया जाता है. इस मिश्रण में से लगभग आधा किलो मिट्टी का सैंपल जांच के लिए लैब में भेजा जाता है. सैंपल लेते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि मिट्टी अधिक गीली न हो और उसमें कंकड़-पत्थर या घास न मिली हो. यदि मिट्टी का नमूना सही तरीके से लिया जाए. तभी लैब की रिपोर्ट सटीक आती है और किसान को सही जानकारी मिल पाती है.

कृषि विभाग के अनुसार. बदलते मौसम और रासायनिक खादों के निरंतर उपयोग के कारण मिट्टी की गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ रहा है. ऐसे में यह जरूरी हो गया है कि किसान हर दो से तीन साल में अपने खेत की मिट्टी की जांच जरूर करवाएं. मिट्टी परीक्षण करवाने से खेत की सेहत अच्छी रहती है. जिससे किसान कम लागत में बेहतर उत्पादन और अधिक मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं. खरीफ सीजन की शुरुआत से पहले मिट्टी की जांच करवाना सबसे सही समय है. ताकि आने वाली फसल के लिए पोषक तत्वों की सही प्लानिंग की जा सके.

जांच रिपोर्ट आने के बाद किसानों को ‘मृदा स्वास्थ्य कार्ड’ (Soil Health Card) दिया जाता है. इस कार्ड में स्पष्ट जानकारी होती है कि संबंधित खेत के लिए कौन-सी फसल सबसे उपयुक्त रहेगी और किस खाद का कितनी मात्रा में उपयोग करना चाहिए. इससे किसान बिना वजह होने वाले अतिरिक्त खर्च से बच सकते हैं. कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जो किसान नियमित रूप से मिट्टी की जांच करवाते हैं. उनकी फसलों के उत्पादन और गुणवत्ता में काफी सुधार देखने को मिला है. खरीफ की बुवाई से पहले यह जांच किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है.

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