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Dausa की घटना के बाद बड़ा सवाल; क्या सच में मौत के बाद लौट सकती है जिंदगी? न्यूरोसर्जन ने बताई पूरी सच्चाई

Last Updated:May 07, 2026, 18:34 IST

Dausa Dead Women Found Alive: दौसा से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने सभी को चौंका दिया. यहां एक मृत मानी गई महिला कुछ देर बाद जिंदा दिखी. ग्रामीण इसे चमत्कार मानने लगे. उन्हें लगा कि यह किसी झाड़फूंक की देन है. लेकिन ऐसा कतई नहीं है. दरअसल, डॉक्टर मनीष पराख ने कहा यह गहरी बेहोशी से हो सकता. यह कोई चमत्कार नहीं है. ऐसी स्थिति में समय पर मेडिकल जांच बहुत जरूरी हो जाता है.

दौसा. राजस्थान के दौसा जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने हर किसी को हैरानी में डाल दिया है. जिस महिला को परिजनों ने मृत मान लिया था, वही कुछ देर बाद जिंदा नजर आई. ग्रामीण इसे चमत्कार बता रहे हैं, लेकिन मेडिकल साइंस इस दावे को मानने से इंकार कर रहा है. आखिर ऐसा कैसे हो सकता है? क्या सच में मौत के बाद जिंदगी लौट सकती है या इसके पीछे कोई मेडिकल कारण है? इसी को समझने के लिए बात करते हैं डॉक्टर से…

डॉक्टर मनीष पराख ने जानकारी देते हुए बताया कि कई बार व्यक्ति गहरी बेहोशी, डीप स्लीप, ब्लड प्रेशर कम होने, हार्ट रेट धीमी पड़ने या शरीर में ग्लूकोज की कमी के कारण मृत जैसा दिखाई दे सकता है. कुछ मामलों में दवाइयों के असर, नशे या अन्य गंभीर बीमारियों की वजह से भी व्यक्ति लंबे समय तक प्रतिक्रिया नहीं देता, जिससे परिजन घबरा जाते हैं. उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति को मृत घोषित करना एक तय मेडिकल प्रक्रिया के तहत ही संभव होता है और यह काम केवल प्रशिक्षित डॉक्टर ही कर सकते हैं.

मृत घोषित करने से पहले होती है मेडिकल जांचडॉ. पराख के अनुसार यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक हिल-डुल नहीं रहा हो या सांस सामान्य नहीं लग रही हो तो उसे तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए. अस्पताल में डॉक्टर सबसे पहले सांस, हार्ट रेट, पल्स, पुतलियों की प्रतिक्रिया और शरीर के तापमान की जांच करते हैं. जरूरत पड़ने पर तुरंत रेससिटेशन और सीपीआर जैसी प्रक्रियाएं शुरू की जाती हैं. उन्होंने कहा कि बिना चिकित्सकीय जांच किसी को मृत मान लेना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है और इससे बड़ा हादसा भी हो सकता है.

ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की जरूरतडॉक्टर मनीष पराख ने बताया कि ग्रामीण इलाकों में अक्सर मेडिकल जानकारी की कमी के कारण लोग ऐसी परिस्थितियों को चमत्कार या अलौकिक घटना मान लेते हैं. उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की सांस धीमी होना, शरीर का कम प्रतिक्रिया देना या लंबे समय तक अचेत रहना कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकता है. ऐसे मामलों में झाड़-फूंक या घरेलू अनुमान लगाने की बजाय तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है. डॉक्टरों का कहना है कि सही समय पर अस्पताल पहुंचाने से कई लोगों की जान बचाई जा सकती है और गलतफहमी के कारण होने वाले बड़े हादसों से भी बचा जा सकता है.

About the AuthorAnand Pandey

आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें

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