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Jaipur’s Unique Temple | Shri Ramchandra Temple Lord Krishna

Last Updated:May 08, 2026, 11:48 IST

Jaipur Ramchandra Temple Mystery: जयपुर के सिरहड्योढ़ी बाजार में स्थित 180 साल पुराने श्री रामचंद्र मंदिर की कहानी बेहद अनोखी है. इस मंदिर का नाम भगवान राम पर है, लेकिन यहां भगवान कृष्ण की पूजा होती है. इसका निर्माण महारानी चंद्रावती ने 1840 से 1855 के बीच करवाया था. महारानी के निधन के कारण यहां मुख्य विग्रह की जगह उनकी निज सेवा की कृष्ण प्रतिमाएं स्थापित की गईं. एक एकड़ में फैला यह मंदिर अपनी भव्य वास्तुकला, 9 चौक और अद्भुत शांति के लिए पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र बना रहता है.

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जयपुर. राजस्थान की राजधानी जयपुर अपने ऐतिहासिक वैभव और प्राचीन मंदिरों के लिए पूरी दुनिया में विख्यात है. गुलाबी नगरी की चारदीवारी के भीतर कई ऐसे मंदिर हैं, जिनके निर्माण की कहानियां बेहद रोचक और हैरान करने वाली हैं. ऐसा ही एक अनोखा मंदिर छोटी चौपड़ के पास सिरहड्योढ़ी बाजार में स्थित है. इस मंदिर का नाम ‘श्री रामचंद्रजी मंदिर’ है, लेकिन यहां आने वाले भक्तों को भगवान राम की जगह भगवान श्री कृष्ण के दर्शन होते हैं. 180 साल पुराना यह मंदिर अपनी अद्भुत वास्तुकला और स्थापत्य शैली के लिए जाना जाता है, जिसे तैयार करने में करीब 15 साल का लंबा समय लगा था.

इस भव्य मंदिर का निर्माण जयपुर महाराजा सवाई रामसिंह की महारानी चंद्रावती द्वारा सन् 1840 से 1855 के मध्य करवाया गया था. शुरुआत में इसका नाम ‘राम चंद्रावती मंदिर’ रखा गया था, जिसमें ‘राम’ शब्द महाराजा रामसिंह और ‘चंद्रावती’ महारानी के नाम से लिया गया था. समय के साथ इसका नाम बदलकर श्री रामचंद्र मंदिर हो गया. मंदिर के पुजारियों के अनुसार, महारानी चंद्रावती भगवान कृष्ण की अनन्य भक्त थीं, इसलिए उन्होंने यहां स्थापना के लिए श्री कृष्ण का एक बड़ा विग्रह तैयार करवाया था.

क्यों नहीं हुई भगवान राम की स्थापना?मंदिर के इतिहास से जुड़ी एक रोचक कहानी है. जब मंदिर बनकर तैयार हुआ और मूर्ति स्थापना व प्राण प्रतिष्ठा का समय आया, तभी महारानी चंद्रावती का स्वर्गवास हो गया. शास्त्रों के अनुसार उस समय मूल विग्रह की स्थापना को अशुभ माना गया. इसके बाद महारानी की निज सेवा वाली धातु की छोटी मूर्तियों (भगवान कृष्ण) को ही मंदिर में विराजमान कर दिया गया. यही कारण है कि रामचंद्र मंदिर होने के बावजूद यहां सदियों से भगवान कृष्ण की ही पूजा अर्चना की जा रही है.

वास्तुकला का बेजोड़ नमूना और अद्भुत शांतिवैष्णव संप्रदाय का यह मंदिर जयपुर का एकमात्र ऐसा मंदिर है जिसका प्रांगण सबसे बड़ा और भव्य है. एक एकड़ क्षेत्रफल में फैले इस मंदिर के भवन में कुल 9 अलग-अलग चौक बने हैं. यह दो मंजिला महल के रूप में निर्मित है, जिसका अग्रभाग जाली और झरोखों से सुसज्जित है. बाजार के शोर-शराबे के बीच स्थित होने के बावजूद मंदिर के भीतर प्रवेश करते ही अद्भुत शांति की अनुभूति होती है. वर्तमान में यह मंदिर देवस्थान विभाग के अधीन है और 1997 से दिव्य ज्योति संस्थान इसकी देखरेख कर रहा है.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें

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