Rajasthan

राजस्थान का यह गांव बना ‘मिनी ब्राजील, रेतीले धोरों की बेटियां इंटरनेशनल लेवल पर फुटबॉल में कर रहीं कमाल

बीकानेर. राजस्थान के बीकानेर जिले का छोटा सा ढींगसरी गांव आज अपनी फुटबॉल प्रतिभा के कारण “मिनी ब्राजील” के नाम से देशभर में पहचान बना रहा है. कभी जहां दूर-दूर तक रेत के टिब्बे और बंजर जमीन नजर आती थी, वहीं अब हरे-भरे फुटबॉल मैदान गांव की नई पहचान बन चुके हैं. इन मैदानों पर सुबह-शाम बालक और बालिकाएं फुटबॉल की प्रैक्टिस करते दिखाई देते हैं. ढींगसरी गांव की सबसे बड़ी खासियत यहां की बेटियां हैं, जिन्होंने खेल के दम पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है.

सीमित संसाधनों और ग्रामीण माहौल के बावजूद यहां की खिलाड़ी लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं. गांव में फुटबॉल को लेकर बच्चों और युवाओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिलता है. स्थानीय लोग भी खिलाड़ियों को पूरा समर्थन देते हैं. रेगिस्तान की मिट्टी से निकली इन बेटियों ने साबित कर दिया है कि मेहनत और जुनून के आगे कोई बाधा बड़ी नहीं होती. आज ढींगसरी गांव सिर्फ बीकानेर ही नहीं, बल्कि पूरे राजस्थान के लिए गर्व का प्रतीक बन चुका है.

बदलाव के पीछे छिपा है कोच विक्रम सिंह राजवी का संघर्ष

बीकानेर से करीब 75 किलोमीटर दूर ढींगसरी गांव की इस बदलाव भरी कहानी के पीछे कोच विक्रम सिंह राजवी का संघर्ष और सपना छिपा है. वर्ष 2021 में उन्होंने गांव में बालिकाओं के लिए फुटबॉल प्रशिक्षण शुरू किया. शुरुआत आसान नहीं थी. ग्रामीण परिवेश और रूढ़िवादी सोच के कारण परिवार अपनी बेटियों को मैदान तक भेजने से हिचकिचाते थे, लेकिन विक्रम सिंह ने हार नहीं मानी. वे घर-घर जाकर अभिभावकों को समझाया और बेटियों को खेल में आगे बढ़ने का मौका देने की अपील की. धीरे-धीरे बालिकाएं मैदान तक पहुंचने लगीं और फिर यह कारवां लगातार बढ़ता चला गया.

कई देशों में जोहर दिखा चुकीं है ढींगसरी गांव की बटियां

आज ढींगसरी गांव की बेटियां अंडर-15, अंडर-17 और अंडर-19 राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी बन चुकी हैं. गांव की कई बालिकाएं भारतीय टीम के कैंप तक पहुंच चुकी हैं. खिलाड़ी मुन्नी भांभू चीन में आयोजित एशियन क्वालिफायर टूर्नामेंट तक खेल चुकी हैं. यहां की बेटियां रूस, नेपाल, बांग्लादेश, चीन और उज़्बेकिस्तान जैसे देशों में भी खेलने जा चुकी हैं. अब तक 10 बालिकाओं के पासपोर्ट बनवाए जा चुके हैं.

खुद फुटबॉल खिलाड़ी रह चुके हैं विक्रम सिंह राजवी

विक्रम सिंह राजवी खुद फुटबॉल खिलाड़ी रहे हैं. उनका सपना था कि गांव की बेटियों को भी वही मंच मिले, जो बड़े शहरों के खिलाड़ियों को मिलता है. इसी सोच के साथ उन्होंने अपनी जमीन बेचकर गांव के अंदर करीब आठ बीघा जमीन खरीदी और फुटबॉल मैदान तैयार किया. बाद में दो बीघा जमीन एक भामाशाह ने दान में दी. आज यहां तीन घास के मैदान, दो फुटबॉल मैदान, हॉस्टल, डाइट और खेल की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं.

अकादमी में 130 लड़कियां नियमित ले रही हैं प्रशिक्षण

अकादमी में बालिकाओं को सभी सुविधाएं नि:शुल्क दी जा रही हैं. यहां बने हॉस्टल में करीब 40 बालिकाएं रह सकती हैं. दिन में ये बच्चियां सरकारी स्कूल में पढ़ाई करती हैं और शाम को मैदान में घंटों अभ्यास करती हैं. वर्तमान में यहां करीब 130 बालिकाएं नियमित प्रशिक्षण ले रही हैं. इन खिलाड़ियों की सबसे खास बात यह है कि अधिकांश बच्चियां गरीब किसान और पशुपालक परिवारों से आती हैं. कई खिलाड़ियों के पिता बकरी पालन कर परिवार चलाते हैं. ऐसे परिवारों में बेटियों को खेल के लिए आगे भेजना आसान नहीं था, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं. आज गांव के लोग खुद अपनी बेटियों को फुटबॉल खेलने के लिए प्रेरित कर रहे हैं.

2024 में ढींगसरी गांव की बेटियों ने रचा था इतिहास

ढींगसरी गांव ने वर्ष 2024 में इतिहास भी रचा. कर्नाटक में आयोजित प्रतियोगिता में राजस्थान की बालिका टीम ने मेजबान कर्नाटक को उसके ही होम ग्राउंड पर 3-1 से हराकर पहली बार कप अपने नाम किया. करीब 60 साल बाद राजस्थान की बेटियां यह ट्रॉफी जीतकर लाई थीं और उस टीम की अधिकांश खिलाड़ी ढींगसरी गांव की थीं. अब मगन सिंह राजवी स्पोर्ट्स अकादमी में रूफ टॉप सोलर प्लांट भी शुरू हो गया है. इससे खिलाड़ियों को बिजली की समस्या से राहत मिलेगी और वे रात के समय भी बेहतर सुविधाओं के साथ अभ्यास कर सकेंगी. राइजिंग सन एनर्जी ने अपनी सीएसआर गतिविधियों के तहत अकादमी को सोलर प्लांट, खेल उपकरण और 100 जोड़ी स्पोर्ट्स शूज उपलब्ध करवाए हैं.

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj