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8 मई को रिलीज हुई वो फिल्म, जिसमें मेकर्स ने लगाया बूढ़े हीरो-जवान हीरोइन पर दांव, बॉक्स ऑफिस पर निकले गोल्डमाइन

Last Updated:May 08, 2026, 14:10 IST

साल 2015 की 8 मई को बॉलीवुड में एक अनोखी फिल्म रिलीज हुई, जिसने साबित कर दिया कि कहानी अच्छी हो तो उम्र का फर्क कोई मायने नहीं रखता. शूजित सरकार द्वारा निर्देशित इस फिल्म में मेकर्स ने लगाया बूढ़े हीरो और जवान हीरोइन पर दांव लगाया. इस जोड़ी को पर्दे पर इतनी खूबसूरती से पेश किया कि दर्शक पूरी तरह मंत्रमुग्ध हो गए. फिल्म में न कोई इंटीमेंट सीन न कोई बोल्ड गाने… कुल मिलकर जितनी बार फिल्म देखेंगे आप मुस्कुराएंगे और आंखे नम भी होंगी.

नई दिल्ली. 8 मई 2015 को रिलीज हुई एक ऐसी फिल्म, जिस पर शुरुआत में शायद ही किसी ने बड़ा दांव लगाया था. कहानी ना पूरी तरह रोमांटिक थी, ना मसाला एंटरटेनर और ना ही उसमें कोई पारंपरिक हीरो-हीरोइन वाला फॉर्मूला था. मेकर्स ने एक बूढ़े किरदार और उससे कई दशक छोटी एक्ट्रेस के रिश्ते के इमोशनल उतार-चढ़ाव पर पूरी फिल्म खड़ी कर दी. ऊपर से कहानी कब्ज जैसी ‘अजीब’ समस्या के इर्द-गिर्द घूमती थी. इंडस्ट्री को लगा था कि इतनी साधारण कहानी शायद दर्शकों को थिएटर तक खींच नहीं पाएगी. लेकिन रिलीज के बाद फिल्म ने ऐसा जादू चलाया कि लोग हंसते-हंसते रो पड़े. कम बजट में बनी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद से कई गुना ज्यादा कमाई की और साबित कर दिया कि अगर कहानी दिल छू जाए तो उम्र और ग्लैमर सब पीछे छूट जाते हैं.

बात कर रहे हैं. साल 2015 में आज ही के दिन रिलीज हुई फिल्म पीकू की. ये बॉलीवुड की उन फिल्मों में गिनी जाती है, जिसने यह साबित किया कि बिना बड़े एक्शन, ग्लैमर और मसाले के भी कोई फिल्म दर्शकों के दिल जीत सकती है. जब फिल्म का ऐलान हुआ था, तब शायद किसी ने नहीं सोचा था कि कब्ज जैसी समस्या पर आधारित कहानी और एक बूढ़े पिता-बेटी के रिश्ते पर बनी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर इतना बड़ा कमाल कर देगी. लेकिन रिलीज के बाद ‘पीकू’ सिर्फ हिट नहीं हुई, बल्कि हिंदी सिनेमा की सबसे यादगार फिल्मों में शामिल हो गई. फोटो साभार-वीडियो ग्रैब

पीकू का निर्देशन शूजित सरकार ने किया था. फिल्म में अमिताभ बच्चन, दीपिका पादुकोण और इरफान खान मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे. बॉलीवुड में हीरो-हीरोइन के बीच उम्र का फर्क आमतौर पर 10-15 साल तक ही देखा जाता था. ऐसे में मेकर्स ने बूढ़े पिता और जवान बेटी की जोड़ी पर दांव लगाया, जो बेहद रिस्की था. लेकिन यह दांव सोने चढ़ गया. अमिताभ बच्चन और दीपिका पादुकोण की उम्र में लगभग 43 साल का अंतर था, लेकिन फिल्म की कहानी में यही अंतर इसकी सबसे बड़ी ताकत बन गया. जहां अमिताभ ने एक जिद्दी, सनकी लेकिन बेहद भावुक पिता भास्कर बनर्जी का किरदार निभाया, वहीं दीपिका उनकी जिम्मेदार बेटी पीकू के रोल में दिखाई दीं. फोटो साभार-वीडियो ग्रैब

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फिल्म का बजट करीब 42 करोड़ रुपये था, लेकिन इसकी कमाई ने सभी को चौंका दिया. दुनिया भर में फिल्म ने लगभग 141 करोड़ रुपये का कारोबार किया और बॉक्स ऑफिस पर गोल्डमाइन साबित हुई. उस दौर में जब बड़े स्टार्स की मसाला फिल्में भी संघर्ष कर रही थीं, तब ‘पीकू’ जैसी साधारण लेकिन दिल छू लेने वाली कहानी ने लोगों को सिनेमाघरों तक खींच लिया. फोटो साभार-वीडियो ग्रैब

फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसकी रियलिस्टिक कहानी थी. इसमें एक ऐसे पिता-बेटी के रिश्ते को दिखाया गया, जो प्यार, झुंझलाहट, जिम्मेदारी और भावनाओं से भरा हुआ है. भास्कर बनर्जी का कब्ज को लेकर हर वक्त परेशान रहना फिल्म में कॉमेडी पैदा करता है, लेकिन इसके पीछे अकेलेपन और उम्र के डर को भी बारीकी से दिखाया गया. यही वजह रही कि दर्शक फिल्म से खुद को जोड़ पाए. फोटो साभार-वीडियो ग्रैब

दीपिका पादुकोण के करियर में भी ‘पीकू’ एक टर्निंग पॉइंट साबित हुई. उन्होंने इस फिल्म में ग्लैमरस हीरोइन की बजाय एक आम कामकाजी लड़की का किरदार निभाया, जो अपने पिता की जिम्मेदारियों के बीच खुद की जिंदगी को संभालने की कोशिश करती है. उनके अभिनय को दर्शकों और समीक्षकों दोनों ने खूब सराहा. फोटो साभार-वीडियो ग्रैब

वहीं, अमिताभ बच्चन ने अपने अभिनय से फिल्म को नई ऊंचाई दी. उन्होंने भास्कर के किरदार में इतनी सच्चाई भर दी कि कई लोगों को अपने घर के बुजुर्ग याद आ गए. यही कारण था कि फिल्म सिर्फ एंटरटेनमेंट नहीं रही, बल्कि लोगों की निजी भावनाओं से जुड़ गई. फोटो साभार-वीडियो ग्रैब

फिल्म में इरफान खान का किरदार भी बेहद अहम था. उन्होंने राणा नाम के टैक्सी कंपनी मालिक की भूमिका निभाई, जो पीकू और उसके पिता के सफर का हिस्सा बनता है. इरफान की सहज एक्टिंग और सूखा हास्य फिल्म में अलग ही रंग भर देता.  फोटो साभार-वीडियो ग्रैब

‘पीकू’ को समीक्षकों से भी शानदार प्रतिक्रिया मिली. फिल्म ने कई अवॉर्ड जीते और इसे कंटेंट-ड्रिवन सिनेमा की बड़ी सफलता माना गया. ‘पीकू’ ने बॉलीवुड को सिखाया कि बड़े-बड़े सितारे, आइटम सॉन्ग या भारी एक्शन के बिना भी फिल्म हिट हो सकती है, अगर कहानी और परफॉर्मेंस सही हों. 8 मई 2015 को रिलीज हुई यह फिल्म आज भी बॉलीवुड की उन चुनिंदा फिल्मों में शुमार है जिन्होंने दर्शकों को हंसाते हुए सोचने पर मजबूर किया. ‘पीकू’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक यादगार सफर है.

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