Rajasthan

इतिहास, आस्था और रहस्य का संगम है जालोर, समेटे हुए हैं अनोखी कहानियां, जानिए यहां की 5 खास जगहें

Last Updated:May 08, 2026, 14:34 IST

Mysterious Places of Jalore: राजस्थान का जालोर जिला अपने ऐतिहासिक और रहस्यमयी स्थलों के कारण खास पहचान रखता है. यहां का तोपखाना कभी संस्कृत विद्यालय हुआ करता था, जबकि सुंधा माता मंदिर अरावली की ऊंची पहाड़ियों पर आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है. निंबावास का कीड़ी नगरा एशिया का सबसे बड़ा चींटियों का बसेरा बताया जाता है. वहीं सरूपरा महादेव मंदिर में लोग चर्म रोग से राहत की मान्यता लेकर पहुंचते हैं. तिलोरा गांव का कुतरा जी मंदिर इंसान और जानवर की वफादारी की अनोखी मिसाल पेश करता है.

जालोर शहर के भीतर स्थित तोपखाना इतिहास की अनोखी कहानी समेटे हुए है. कहा जाता है कि यह स्थान 13 वीं शताब्दी में राजा भोज की एक भव्य संस्कृत विद्यालय हुआ करता था, जहां विद्या का प्रचार-प्रसार होता था. समय के साथ इसे युद्धकाल में तोपखाने में परिवर्तित कर दिया गया, जिससे इसका स्वरूप पूरी तरह बदल गया. यहां की दीवारों और नक्काशीदार संरचनाओं में आज भी प्राचीन कला की झलक देखने को मिलती है.  यह स्थान दर्शाता है कि कैसे एक शैक्षणिक केंद्र समय के साथ सैन्य उपयोग में बदल गया.

अरावली पर्वतमाला की करीब 1220 मीटर ऊंची चोटी पर स्थित यह मंदिर जालोर जिले का प्रमुख धार्मिक स्थल है. यहां माता के मस्तक की पूजा की जाती है, जो इसे अन्य मंदिरों से अलग बनाती है.  पहाड़ों के बीच बना यह धाम प्राकृतिक सौंदर्य से भी भरपूर है, जहां दूर-दूर तक हरियाली और घाटियों का नज़ारा देखने को मिलता है. श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए कठिन चढ़ाई या रोपवे का सहारा लेते हैं, जो अपने आप में एक रोमांचक अनुभव होता है. मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई मुराद यहां जरूर पूरी होती है. यह मंदिर आस्था और प्रकृति का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है.

निंबावास का कीड़ी नगरा जालोर की सबसे रहस्यमयी और अनोखी जगहों में से एक है. यह लगभग 150 बीघा क्षेत्र में फैला हुआ है और इसे एशिया का सबसे बड़ा ‘कीड़ी नगरा’ कहा जाता है. यहां करोड़ों की संख्या में चींटियां रहती हैं, जो एक विशाल प्राकृतिक संरचना का रूप ले चुकी हैं. स्थानीय लोग इसे सिर्फ एक प्राकृतिक घटना नहीं, बल्कि आस्था से जोड़कर देखते हैं और पूजा भी करते हैं. यहां आने वाले लोग इस अद्भुत दृश्य को देखकर हैरान रह जाते हैं. यह स्थान विज्ञान और विश्वास दोनों का अनोखा मेल प्रस्तुत करता है. जालोर की पहचान को अलग बनाने में इस जगह का बड़ा योगदान है.

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जालोर जिले में स्थित सरूपरा महादेव मंदिर अपनी अनोखी मान्यताओं और चमत्कारी विश्वास के लिए प्रसिद्ध है. स्थानीय लोगों के अनुसार, यहाँ चर्म रोग से पीड़ित लोग श्रद्धा के साथ नमक चढ़ाते हैं. मान्यता है कि ऐसा करने से उन्हें रोगों से राहत मिलती है. जिन लोगों को मस्से, बवासीर (पाइल्स) जैसी समस्याएं होती हैं, वे यहां चांदी से बने छोटे मस्से (प्रतीक रूप में) चढ़ाते हैं. यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और दूर-दूर से लोग अपनी आस्था के साथ यहां पहुंचते हैं. सरूपरा महादेव सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि लोगों के विश्वास, उम्मीद और चमत्कार की एक अनोखी मिसाल बन चुका है.

जालोर जिले के तिलोरा गांव में स्थित कुतरा जी का मंदिर अपनी अनोखी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है. यहां किसी देवी-देवता की नहीं, बल्कि एक वफादार कुत्ते की पूजा की जाती है. लोककथाओं के अनुसार, इस कुत्ते ने अपने मालिक की जान बचाने के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी थी. उसकी वफादारी और बलिदान को सम्मान देने के लिए यह मंदिर बनाया गया. आज भी लोग यहां श्रद्धा के साथ आते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं. यह मंदिर इंसान और जानवर के बीच सच्चे रिश्ते की मिसाल पेश करता है. जालोर की अजब-गजब परंपराओं में यह स्थान सबसे अलग और खास माना जाता है.

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