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India vs China Schools: चीन के स्कूलों में ‘जादुई’ ब्लैकबोर्ड, चॉक की खड़खड़ खत्म, टच स्क्रीन पर चल रही क्लास

नई दिल्ली (India vs China Schools). क्या आपने ऐसा ब्लैकबोर्ड देखा है जो एक टच से कंप्यूटर बन जाए और अगले ही पल उस पर चॉक से लिखा जा सके? चीन के वायरल वीडियो ने पूरी दुनिया के शिक्षा जगत को हैरान कर दिया है. जहां दुनिया के कई देशों में अभी भी लकड़ी वाली बेंच और घिसे हुए ब्लैकबोर्ड का इस्तेमाल हो रहा है, वहीं चीन के लगभग हर स्कूल की क्लास ‘स्मार्ट इंटरएक्टिव ब्लैकबोर्ड’ से लैस है. इस टेक्नोलॉजी से पढ़ाई मजेदार बन गई है और शिक्षकों के सिखाने का अंदाज भी बदल गया है.

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे साधारण दिखने वाला ब्लैकबोर्ड पलक झपकते ही हाई-टेक स्क्रीन में बदल जाता है. इस पर 3D डायग्राम से लेकर लाइव वीडियो तक सब कुछ एक साथ चलता है. चीन का यह ‘स्मार्ट क्लासरूम’ मॉडल अब ग्लोबल चर्चा का विषय बन गया है, जो सोचने पर मजबूर करता है कि क्या भविष्य की शिक्षा सिर्फ किताबों तक ही सीमित रहेगी या फिर स्क्रीन ही नई ‘किताब’ बनेगी? भारतीय स्टूडेंट्स भी जानना चाहते हैं कि उनके स्कूल में यह तकनीक कब आएगी.

स्मार्ट इंटरएक्टिव ब्लैकबोर्ड क्या है?

स्मार्ट इंटरएक्टिव ब्लैकबोर्ड कोई साधारण स्क्रीन नहीं है. इसे ‘नैनो-स्मार्ट ब्लैकबोर्ड’ कहा जाता है. इसमें एंटी-ग्लेयर ग्लास लगा होता है, जिस पर साधारण चॉक या लिक्विड पेन से भी लिखा जा सकता है और जब जरूरत हो तो यह टच-सेंसिटिव कंप्यूटर स्क्रीन की तरह काम करने लगता है… यानी टीचर लिखते-लिखते अचानक किसी भी टॉपिक का वीडियो या 3D मॉडल स्टूडेंट्स को दिखा सकते हैं.

इस टेक्नोलॉजी से पढ़ाई कैसे बदल रही है?

पुराने जमाने में टीचर को नक्शे या डायग्राम बनाने में काफी वक्त लगता था. अब इन बोर्ड्स में पहले से ही ‘स्मार्ट टूल्स’ मौजूद हैं. अगर टीचर को सौर मंडल (Solar System) पढ़ाना है तो वे बस एक क्लिक करते हैं और पूरा ब्रह्मांड स्क्रीन पर नाचने लगता है. इससे बच्चों की ‘विजुअल लर्निंग’ बढ़ती है और कठिन से कठिन विषय भी आसानी से समझ में आ जाते हैं.

चीन के लगभग हर स्कूल में कवरेज

वायरल हो रहे दावे के मुताबिक, चीन ने अपने ‘डिजिटल इंडिया’ जैसे मिशन के तहत शहरों ही नहीं, बल्कि ग्रामीण इलाकों के स्कूलों को भी इस तकनीक से जोड़ा है. चीन की सरकार का मानना है कि तकनीक तक पहुंच समान होनी चाहिए, तभी देश का टैलेंट निखर कर सामने आएगा. आज वहां के प्राइमरी स्कूलों में भी बच्चे कोडिंग और डिजिटल टूल्स के जरिए सीख रहे हैं.

स्मार्ट बोर्ड की खास खूबियां

इस क्लास बोर्ड में इतनी खूबियां हैं कि आपका दोबारा स्कूल जाकर पढ़ाई करने का मन होगा-

मल्टी-टच सपोर्ट: एक साथ कई स्टूडेंट्स बोर्ड पर आकर अलग-अलग काम कर सकते हैं.
क्लाउड सिंकिंग: बोर्ड पर जो कुछ भी पढ़ाया गया, वह सीधे क्लाउड पर सेव हो जाता है जिसे स्टूडेंट बाद में घर पर अपने टैबलेट या फोन पर देख सकते हैं.
आंखों की सुरक्षा: इन बोर्ड्स को ‘आई-प्रोटेक्शन’ तकनीक से बनाया गया है, जिससे लंबे समय तक देखने पर बच्चों की आंखों पर बुरा असर न पड़े.

क्या नई टेक्नोलॉजी शिक्षकों की जगह ले लेगी?

इस वायरल वीडियो को देखकर मन में यह सवाल उठना लाजिमी है. लेकिन यह तकनीक शिक्षकों को रिप्लेस करने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें ‘सुपरपावर’ देने के लिए है. शिक्षक अब सिर्फ सूचना देने वाले नहीं, बल्कि ‘गाइड’ की तरह काम करते हैं. वे तकनीक का इस्तेमाल करके पढ़ाई को इंटरएक्टिव बनाते हैं, जिससे क्लास में बच्चों की अटेंडेंस और दिलचस्पी दोनों बढ़ी है.

भारत के लिए इसमें क्या सबक है?

भारत में भी ‘स्मार्ट सिटी’ और ‘डिजिटल क्लासरूम’ प्रोजेक्ट्स के तहत कई स्कूलों में स्मार्ट बोर्ड लग रहे हैं. हालांकि, चीन जैसी व्यापकता (Mass Implementation) अभी बाकी है. चीन का लेटेस्ट एजुकेशन मॉडल दिखाता है कि अगर इंफ्रास्ट्रक्चर पर सही तरह से इनवेस्ट किया जाए तो आने वाली पीढ़ी को ग्लोबल कॉम्पिटीशन के लिए तैयार किया जा सकता है.

भविष्य का क्लासरूम कैसा होगा?

आने वाले समय में इन बोर्ड्स में AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) को भी जोड़ा जा रहा है. बोर्ड खुद बता पाएगा कि क्लास का कौन सा स्टूडेंट किस टॉपिक में कमजोर है और उसे कैसे बेहतर तरीके से समझाया जा सकता है. यह भारतीय एजुकेशन सिस्टम का वो भविष्य है जिसे चीन आज हकीकत बना रहा है.

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