एक OT, एक जैसी सर्जरी और लगातार बिगड़ती हालत… कोटा अस्पताल की घटना ने मचाया हड़कंप

कोटा: कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिलाओं की तबीयत बिगड़ने के बाद दो महिलाओं की मौत हो गई और चार की हालत गंभीर बनी हुई है. राजस्थान सरकार ने विशेषज्ञों की एक टीम कोटा भेजी. उधर कांग्रेस की भी जांच कमेटी अस्पताल पहुंची. हैरानी ये कि एक ही ओटी में हुई सर्जरी के बाद आठ महिलाओं की हालत खराब होने से अस्पताल में सर्जरी को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए.
पूरा सिलसिला 3 मई से शुरू हुआ, जब सिजेरियन के बाद सुशीला, चंद्रकला, रागिनी, पायल, ज्योति और धन्नी को पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड में भर्ती किया गया. शुरुआत में सभी सामान्य थीं, लेकिन 4 मई की रात पायल की तबीयत अचानक बिगड़ी. इसके बाद अगले 48 घंटों में लगातार 6 महिलाओं की हालत खराब होती गई और पायल व ज्योति ने दम तोड़ दिया.
सभी महिलाओं में एक जैसी समस्या यूरिन बंद होना, प्लेटलेट्स गिरना, बीपी लो होना और किडनी फेल होने जैसे लक्षण मिले. इसके बावजूद अस्पताल ने उसी ओटी में दो और महिलाओं किरण और शिरीन की सर्जरी कर दी, जिनकी हालत भी बाद में गंभीर हो गई.
प्राइवेट हॉस्पिटल में शिफ्ट करना पड़ाकिरण की 6 मई की रात सिजेरियन डिलीवरी हुई थी. लेकिन 18 घंटे बाद यूरिन बंद हो गया, तेज दर्द शुरू हुआ और बीपी गिरने लगा. वहीं शिरीन को 6 महीने की गर्भावस्था में बच्चेदानी में टांके लगाए गए थे, लेकिन 12 घंटे बाद ही ब्लीडिंग शुरू हो गई और हालत बिगड़ गई. दोनों को बाद में प्राइवेट हॉस्पिटल में शिफ्ट करना पड़ा.
हालात बिगड़ते देख 8 मई की रात कलेक्टर और एडीएम सिटी प्राइवेट हॉस्पिटल पहुंचे. दो और महिलाओं की किडनी फेल होने पर तुरंत डायलिसिस करवाई गई. प्रशासन ने माना कि मामला बेहद गंभीर है और जांच तेज कर दी गई.
लेबर रूम की सिस्टर इंचार्ज निमेश वर्मा सस्पेंडइसके बाद अस्पताल प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए ऑपरेटिंग सर्जन असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. श्रद्धा की सेवाएं बर्खास्त कर दीं. साथ ही एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नवनीत शर्मा, ओटी सिस्टर इंचार्ज गुरजीत कौर और लेबर रूम की सिस्टर इंचार्ज निमेश वर्मा को सस्पेंड कर दिया गया. ड्रग कंट्रोल विभाग ने भी बड़ा कदम उठाते हुए गायनी वार्ड में ऑपरेशन के बाद दी जाने वाली 24 दवाओं और उपकरणों के उपयोग पर रोक लगा दी. शुरुआती जांच में यही शक है कि या तो दवाओं में दिक्कत थी या ओटी में संक्रमण फैल गया था.
शनिवार को जयपुर से एसएमएस हॉस्पिटल की विशेषज्ञ टीम कोटा पहुंची. टीम में नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. धनंजय अग्रवाल भी शामिल हैं. सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में भर्ती चार महिलाओं की हालत पर टीम लगातार नजर रख रही है. धन्नी बाई की स्थिति अभी भी गंभीर बताई जा रही है.
महिलाओं की जान जोखिम में डाली गईकांग्रेस ने भी इसे गंभीर मामला मानते हुए जांच कमेटी बनाई है. पीसीसी अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा द्वारा गठित चार सदस्यीय टीम ने हॉस्पिटल का दौरा किया और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की. कमेटी तीन दिन में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी. पूर्व चिकित्सा मंत्री परसादीलाल मीणा ने कहा कि ये सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि प्रबंधन की बड़ी नाकामी है. महिलाओं की जान जोखिम में डाली गई है. दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी ही चाहिए.
सुरक्षा उपाय बढ़ा दिए गएऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर खुद अस्पताल पहुंचे और मामले को बेहद गंभीर बताया. मंत्री ने भर्ती महिलाओं से मुलाकात की और डॉक्टरों से पूरे उपचार की जानकारी ली. उन्होंने साफ कहा कि दो प्रसूताओं की मौत बेहद पीड़ादायक है और सरकार दोषियों को बख्शेगी नहीं. जयपुर से विशेषज्ञ डॉक्टर लगातार कंसल्टेंसी दे रहे हैं और सुरक्षा उपाय बढ़ा दिए गए हैं.
लेकिन मृतका ज्योति के परिजन आरोप लगा रहे हैं कि डिलीवरी सीनियर डॉक्टर ने नहीं की. उनका कहना है कि जब तक जिम्मेदार डॉक्टर व स्टाफ सस्पेंड नहीं होंगे, वे शव नहीं ले जाएंगे.



