45 डिग्री की गर्मी और धधकती अग्नि के बीच योगी की ‘पंचधूनी’ तपस्या

Last Updated:May 10, 2026, 14:24 IST
Alwar News: सरिस्का के बाबा भर्तृहरी धाम पर योगी सोमवार नाथ जी महाराज 45 डिग्री तापमान और धधकती पंचधूनी अग्नि के बीच 31 दिन की कठोर तपस्या कर रहे हैं. यह तपस्या अच्छी बारिश, प्रकृति संरक्षण और जनकल्याण की कामना के लिए की जा रही है. पिछले 6 साल से नियमित इस साधना के जरिए महाराज लोगों को वृक्षारोपण का संदेश दे रहे हैं. 24 मई को समापन पर भव्य महाभंडारा आयोजित होगा, जिसमें भारी संख्या में भक्त शामिल होंगे.
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धधकती अग्नि के बीच शांत मुद्रा में बैठे योगी, सरिस्का में जनकल्याण के लिए हो रही है कठोर तपस्या
अलवर/सरिस्का. राजस्थान के अलवर जिले में स्थित सरिस्का के सघन जंगलों और बाबा भर्तृहरी की तपोस्थली इन दिनों एक अलौकिक दृश्य की गवाह बन रही है. भीषण गर्मी के इस मौसम में, जहाँ पारा 45 डिग्री सेल्सियस को छू रहा है, वहां सरिस्का की वादियों में एक तपस्वी अग्नि के घेरे में शांत मुद्रा में लीन नजर आ रहे हैं. योगी सोमवार नाथ जी महाराज जनकल्याण, अच्छी बारिश और पर्यावरण संरक्षण की कामना के साथ 31 दिन की कठोर ‘पंचधूनी’ तपस्या कर रहे हैं. संतोषनाथ जी के आश्रम में चल रही इस साधना को देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुँच रहे हैं.
योगी सोमवार नाथ पिछले छह सालों से लगातार यह अनुष्ठान कर रहे हैं. उनकी दिनचर्या रोंगटे खड़े कर देने वाली है. दोपहर 12 बजे की कड़ी धूप में, जब जमीन तप रही होती है, महाराज अपने चारों ओर पांच स्थानों पर अग्नि प्रज्वलित कर उसके मध्य बैठ जाते हैं. शाम तक चलने वाली इस साधना के दौरान वे केवल फलाहार ग्रहण करते हैं. श्रद्धालुओं का कहना है कि यह केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि धैर्य, संयम और आत्मशक्ति की वह पराकाष्ठा है जो समाज को दृढ़ इच्छाशक्ति का संदेश देती है.
पर्यावरण और वन्यजीवों के लिए प्रार्थनाइस तपस्या का मुख्य उद्देश्य प्रकृति का संतुलन बनाए रखना है. योगी सोमेश्वर नाथ जी महाराज का मानना है कि यदि समय पर अच्छी बारिश होगी तो सरिस्का के जंगल हरे-भरे रहेंगे. इससे न केवल नदी-नाले और तालाब लबालब होंगे, बल्कि जंगल में विचरने वाले वन्य जीवों को भी भीषण गर्मी में पानी के लिए भटकना नहीं पड़ेगा. अपनी साधना के माध्यम से वे लोगों को अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने और प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने की प्रेरणा दे रहे हैं.
24 मई को होगा समापन और महाभंडाराआश्रम में आध्यात्मिक ऊर्जा का ऐसा संचार हो रहा है कि यहाँ आने वाला हर भक्त मंत्रमुग्ध है. भक्त सीताराम के अनुसार, महाराज की इस तपस्या से पूरे क्षेत्र में सकारात्मकता बढ़ रही है. आगामी 24 मई को इस 31 दिवसीय पंचधूनी तपस्या का विधिवत समापन होगा. इस अवसर पर आश्रम परिसर में विशाल सत्संग और भव्य महाभंडारे का आयोजन किया जाएगा, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें
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Alwar,Alwar,Rajasthan



