कोटा में चार प्रसूताओं की मौत से हड़कंप, अस्पतालों में लापरवाही की जांच जारी, CMS ने लिया जायजा, आयोग सख्त

कोटा. राजस्थान के कोटा में चार प्रसूताओं की मौत मामले ने अब बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक रूप ले लिया है. न्यू मेडिकल कॉलेज और जेके लोन अस्पताल में सामने आए अलग-अलग मामलों के बाद राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गए हैं. मुख्य चिकित्सा सचिव गायत्री राठौर ने न्यू मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण किया और पूरे घटनाक्रम को बेहद संवेदनशील और दुखद बताया.
मुख्य चिकित्सा सचिव गायत्री राठौर ने कहा कि शुरुआती जांच में दो डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई की गई है, लेकिन यह केवल शुरुआत है. पूरे मामले की विस्तृत जांच अभी जारी है और किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने यह भी बताया कि जांच कमेटी से लगातार फीडबैक लिया जा रहा है ताकि हर पहलू की बारीकी से जांच हो सके.
स्वास्थ्य विभाग ने कुछ दवाओं के उपयोग पर लगाई रोक
स्वास्थ्य विभाग ने एहतियात के तौर पर कुछ दवाओं के उपयोग पर रोक लगा दी है और दवाइयों के सैंपल जांच के लिए लैब में भेज दिए गए हैं. इस बीच जन स्वास्थ्य निदेशक डॉ. रवि प्रकाश शर्मा भी कोटा पहुंचे और अस्पताल की व्यवस्थाओं का जायजा लिया. उन्होंने अस्पताल प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश दिए कि मरीजों की सुरक्षा में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
कांग्रेस ने मेडिकल कॉलेज के बहार शुरू किया धरना
इधर, कोटा के जेके लोन अस्पताल में प्रसूता पिंकी की तबीयत बिगड़ने और मौत के मामले को लेकर तनाव और बढ़ गया है. इस घटना के बाद कांग्रेस ने मेडिकल कॉलेज SSB के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है. प्रदर्शनकारी परिजनों के साथ बड़ी संख्या में लोग शामिल हैं और न्याय की मांग कर रहे हैं. स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब देर रात धरना स्थल की बिजली काट दी गई, जिससे अंधेरे में बिना लाइट और पंखे के भी धरना जारी रहा.
दोषियों को किसी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा
मुख्य चिकित्सा सचिव ने यह भी घोषणा की है कि वे जल्द ही जेके लोन अस्पताल का दौरा करेंगी और वहां की स्थिति की विस्तृत समीक्षा करेंगी. उन्होंने संकेत दिया कि प्रारंभिक जांच में कहीं न कहीं बड़ी लापरवाही की आशंका है और दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा.
मानव अधिकार आयोग ने स्वत: लिया संज्ञान
इस बीच मानव अधिकार आयोग ने भी मामले में स्वतः संज्ञान लिया है. आयोग के अध्यक्ष जस्टिस जी.आर. मूलचंदानी ने इसे गंभीर मामला मानते हुए जिला कलेक्टर, मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल और सीएमएचओ से तत्काल रिपोर्ट तलब की है. आयोग ने स्वास्थ्य सेवाओं और संभावित लापरवाही पर विस्तृत जवाब भी मांगा है.
सिस्टम की जवाबदेही पर सवाल हो रहा खड़ा
पूरा मामला अब सिर्फ एक अस्पताल की घटना न रहकर सिस्टम की जवाबदेही का बड़ा सवाल बन गया है. एक ओर प्रशासन जांच और कार्रवाई की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर परिजन और विपक्षी दल न्याय की मांग को लेकर सड़क पर हैं. आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और मानव अधिकार आयोग की रिपोर्ट इस पूरे मामले की दिशा तय करेगी.



