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ईसाई नाम, सिख कड़ा, हिंदू कलावा और नमाज की टोपी, आखिर किस धर्म को मानते हैं थलापति विजय?

Last Updated:May 12, 2026, 08:40 IST

जोसेफ विजय चन्द्रशेखर की एक झलक ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है. शपथ समारोह में कैमरों ने उनकी कलाई पर कुछ ऐसा कैद किया, जिसने लोगों को चौंका दिया. सालों से पहना जाने वाला कड़ा पहले ही चर्चा में था, अब उसके साथ दिखे एक और प्रतीक ने सवालों की आग और भड़का दी. दिलचस्प बात ये है कि विजय कभी मंदिरों में पूजा करते नजर आते हैं, कभी चर्च में, तो कभी नमाज और इफ्तार में शामिल होकर सुर्खियां बटोर लेते हैं. उनकी यही रहस्यमयी छवि अब लोगों को सोचने पर मजबूर कर रही है-क्या विजय किसी एक धर्म से जुड़े हैं या उनकी पहचान उससे कहीं ज्यादा बड़ी है?

नई दिल्ली. तमिल सिनेमा के सुपरस्टार और राजनीति के नए चेहरे जोसेफ विजय चन्द्रशेखर एक बार फिर चर्चा में हैं, लेकिन इस बार वजह कोई फिल्म या राजनीतिक बयान नहीं. शपथ समारोह की कुछ तस्वीरों ने सोशल मीडिया पर ऐसा तूफान खड़ा कर दिया, जिसने लोगों को उनकी धार्मिक पहचान पर सवाल पूछने पर मजबूर कर दिया. किसी ने उनकी कलाई में दिखे धागे पर नजर डाली तो किसी ने कड़े को लेकर बहस छेड़ दी. दिलचस्प बात ये है कि विजय कभी मंदिर में तिलक लगाए दिखते हैं, कभी चर्च में प्रार्थना करते नजर आते हैं, तो कभी दरगाह और नमाज में शामिल होकर सुर्खियां बटोर लेते हैं. यही वजह है कि अब हर कोई एक ही सवाल पूछ रहा है… आखिर थलापति विजय किस धर्म को मानते हैं?

ईसाई नाम, हिंदू कलावा, सिख कड़ा और नमाज में टोपी… तमिलनाडु के नवनिर्वाचित सीएम जोसेफ विजय चंद्रशेखर से ज्यादा जटिल व्यक्तित्व इस समय भारतीय राजनीति में शायद ही कोई हो. 10 मई, 2026 को चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित भव्य शपथ ग्रहण समारोह में हर नजर उनकी कलाई पर थी, जहां उन्होंने एक साथ सिख कड़ा और हिंदू कलावा धारण किया था. उनकी इस पसंद ने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींचा. इसके बाद इंटरनेट पर बहस शुरू हो गई कि आखिर विजय किस धर्म को मानते हैं.

हालांकि, अब तक ये पुष्टि नहीं हुई है कि विजय ने जो धागा पहना था वह वास्तव में हिंदू परंपरा का कलावा ही था. इसी तरह, सालों से उनके हाथ में दिखने वाले कड़े को लेकर भी कभी कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया. लेकिन ये सच है कि विजय की पर्सनल लाइफ खुद काफी विविध रही है.

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जोसेफ विजय चंद्रशेखर का पूरा नाम ही उनकी कहानी बयां करता है. 22 जून 1974 को चेन्नई में जन्मे विजय के पिता एस.ए. चंद्रशेखर ईसाई हैं, जबकि मां शोभा चंद्रशेखर हिंदू. घर में कभी धार्मिक सीमाएं नहीं रहीं. पिता की ईसाई आस्था और मां की हिंदू परंपराओं का मिश्रण विजय को बचपन से ही सभी धर्मों के प्रति सम्मान सिखाता रहा. उनकी बहन विद्या की कम उम्र में मृत्यु के बाद परिवार की आस्था और भी गहरी हुई.

कड़ा का अनसुलझा रहस्य: कई सालों से विजय हाथ में एक कड़ा पहनते नजर आते हैं, जिसे ज्यादातर लोग सिख आस्था से जोड़ते हैं. ‘मास्टर’ फिल्म (2021) के बाद तो यह कड़ा वायरल हो गया. अमेजन और अन्य ई-कॉमर्स साइट्स पर ‘थलापति विजय मास्टर मूवी कड़ा – प्योर पंजाबी स्टाइल’ के नाम से हूबहू बिकने लगे. हालांकि विजय या उनकी टीम ने कभी इसका स्पष्ट कारण नहीं बताया. यह चुप्पी खुद एक बड़ी बात है.

हाथ में कलावा: शपथ ग्रहण के दौरान नजर आए कलावा ने चर्चा और बढ़ा दी. कई मीडिया रिपोर्ट्स में इसे हिंदू रक्षासूत्र बताया गया. हालांकि कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है, लेकिन तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं. विजय को कई बार मंदिरों में पूजा करते देखा गया है. वे माथे पर चंदन का तिलक लगाए और रुद्राक्ष की माला पहने भी नजर आ चुके हैं.

साईं बाबा में आस्था: विजय को साईं के दरबार में कई बार देखा गया है. दरअसल, विजय की मां शोभा साईं बाबा की भक्त हैं. विजय ने चेन्नई के कोरट्टूर में साईं बाबा मंदिर बनाने में चुपचाप मदद की, इसे कभी प्रचार का माध्यम नहीं बनाया.

यीशु मसीह में विश्वास: पिता एस.ए. चंद्रशेखर ईसाई हैं और नाम के साथ भी जोसेफ जुड़ा को आस्था यीशु मसीह से भी बचपन से ही जुड़ी. पिता के साथ चर्च जाकर प्रार्थना करने वाले जोसेफ विजय चंद्रशेखर यानी थलापति विजय चर्च भी जाते रहे हैं और कई मौकों पर उन्होंने खुद कहा कि वे हर धर्म का सम्मान करते हैं.

इफ्तार कार्यक्रम और टोपी: मार्च 2025 में उन्होंने चेन्नई में एक इफ्तार पार्टी में टोपी पहनी और उपस्थित लोगों के साथ नमाज भी पढ़ी. यहां तक कि अमीन पीर दरगाह में भी उन्हें प्रार्थना करते देखा गया है. यह वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था. दिलचस्प बात यह रही कि वहां मौजूद लोगों के लिए ये हैरानी की बात नहीं थी.

तमिलनाडु का नया मुख्यमंत्री साबित कर रहा है कि एक नाम कई आस्थाओं को समेट सकता है. पुराने इंटरव्यू में विजय कह चुके हैं कि वे खुद को ‘स्पिरिचुअल’ मानते हैं। उन्होंने कहा था कि वे चर्च भी जाते हैं, मंदिर भी और दरगाह भी. भारत में जहां नेता धर्म को हथियार बनाते हैं, वहां विजय का यह रवैया अलग है. वे कहते हैं कि वे भगवान में विश्वास करते हैं और सभी धर्मों का सम्मान करते हैं. एक तरफ क्रिश्चियन नाम, दूसरी तरफ हिंदू परंपराओं से जुड़ाव, साथ में सिख शैली का कड़ा और मुस्लिम कार्यक्रमों में सक्रिय मौजूदगी. विजय की यही बहुआयामी छवि उन्हें बाकी नेताओं से अलग बनाती है.

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