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UAE China Artificial Island : Scotland 5000 Year-Old Artificial Island | UAE-चीन खोदते रह गए, इस देश को मिला 5 हजार साल पुराना वही खजाना

UAE और चीन जो खजाना तलाशने के लिए दुनिया भर की तिकड़म भिड़ाते हैं, वो एक देश को बिना किसी मेहनत के मिल गया है. ये कोई सोने-चांदी का संदूक नहीं है, बल्कि एक ऐसा ‘खजाना’ है जो 5000 सालों से जमीन के अंदर दबा था है. ये चमत्कार स्कॉटलैंड में हुआ है, जहां की एक झील के शांत और धुंधले पानी के नीचे कुछ ऐसा मिला है, जिसे देखकर इंजीनियर-वैज्ञानिक सभी हैरान रह गए हैं. दावा किया जा रहा है कि जो काम चीन और दुबई में आज के वक्त में हो रहा है वो स्कॉटलैंड के पूर्वज 5 हजार साल पहले कर चुके हैं, वो भी बिना की किसी आधुनिक मशीन के.

आखिर क्या है स्कॉटलैंड की ये रहस्यमयी खोज?

टलैंड की ‘लोच भोरगास्टेल’ झील की गहराई में वैज्ञानिकों को एक आर्टीफिशियल आईलैंड यानी इंसान का बनाया हुआ ‘टापू’ मिला है. इसे आर्किओलॉजी भाषा में ‘क्रैनॉग’ कहा जाता है. अब तक माना जाता था कि ये टापू थोड़े नए समय के हैं, लेकिन नई तकनीक ने साबित कर दिया कि इन्हें करीब 5,000 साल पहले बनाया गया था.

इंसान का बनाया हुआ ‘जादुई’ टापू

जब हम आर्टिफिशियल टापुओं की बात करते हैं तो दिमाग में दुबई के ‘पाम जुमेराह’ या चीन के बड़े प्रोजेक्ट्स आते हैं लेकिन स्कॉटलैंड के पूर्वजों ने ये कारनामा तब कर दिखाया था जब दुनिया में न मशीनें थीं और न ही बिजली. स्कॉटलैंड की झीलों में ऐसे सैकड़ों टापू मौजूद हैं, जिनमें से कई तो आज भी अनछुए हैं.

पहले लोग सोचते थे कि ये लोहे के युग के बने हैं, लेकिन अब पता चला है कि ये तो ईसा पूर्व 3800 से 3300 साल पुराने हैं. इन टापुओं के आस-पास पानी में वैज्ञानिकों को पत्थर के बर्तनों और जारों के टुकड़े भी मिले हैं.

मशीनों ने कैसे पकड़ा ये राज?

झील का पानी इतना धुंधला और गंदा था कि वहां साधारण कैमरा काम नहीं कर रहा था. ऐसे में वैज्ञानिकों ने एक कमाल की तकनीक का इस्तेमाल किया जिसे ‘स्टीरियोफोटोग्रामेट्री’ कहते हैं. इस तकनीक से किसी भी चीज का असली जैसा दिखने वाला 3D मॉडल बनाया जा सकता है.

चूंकि पानी गंदा था, इसलिए ड्रोन काम नहीं कर पाए. एक गोताखोर ने पानी के नीचे दो स्पेशल कैमरों के साथ तैरकर सटीक रास्ता नापा और वहां की एक-एक बारीकी को कैमरे में कैद किया. इस तकनीक की मदद से ही पानी के नीचे दबी लकड़ी और पत्थरों की उन बुनियादों को देखा जा सका, जो 5000 सालों से छिपी हुई थीं.

5000 साल पुरानी इंजीनियरिंग का नमूना

वैज्ञानिकों को खुदाई के दौरान पता चला कि इन टापुओं को बनाने का तरीका बहुत ही दिलचस्प था. सबसे पहले करीब 5,000 साल पहले एक गोल लकड़ी का प्लेटफॉर्म बनाया गया था, जो लगभग 23 मीटर चौड़ा था. इसके ऊपर झाड़ियों और छोटी टहनियों की एक मोटी परत बिछाई गई ताकि नींव मजबूत रहे.

लगभग 2,000 साल बाद, इसके ऊपर और ज्यादा लकड़ियां और बड़े पत्थर डाले गए ताकि ये पानी की लहरों को झेल सके और बाद में इन टापुओं को किनारे से जोड़ने के लिए पत्थरों का एक रास्ता भी तैयार किया गया था.

अभी यह साफ नहीं है कि ये टापू किस काम के लिए बनाए गए थे. क्या ये रहने के लिए थे, या किसी खास पूजा-पाठ के लिए? लेकिन वहां मिले इंसानी जीवन के निशान बताते हैं कि ये कई सदियों तक लोगों के काम आते रहे. इतिहास के जानकार फ्रेजर स्टर्ट का कहना है कि यह तकनीक पानी के नीचे छिपे और भी कई रहस्यों को उजागर कर सकती है.

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