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‘सूर्यनगरी’ की धूप अब पैदा कर रही बिजली, पीएम कुसुम योजना से सोलर पावर हब बना जोधपुर; जानें कैसे बदल रही किसानों की किस्मत

Last Updated:May 13, 2026, 04:43 IST

Solar Power Hub Jodhpur: जोधपुर अब केवल पर्यटन ही नहीं, बल्कि सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भी अपनी नई पहचान बना रहा है. प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत जोधपुर डिस्कॉम क्षेत्र में 670 मेगावाट से अधिक बिजली उत्पादन शुरू हो चुका है. पश्चिमी राजस्थान की तेज धूप का लाभ उठाकर 279 से ज्यादा संयंत्र स्थापित किए गए हैं. इस योजना ने किसानों को ऊर्जा उत्पादक बनाकर उनकी आय बढ़ाई है और कृषि फीडरों को दिन में बिजली देने की राह आसान की है. जोधपुर अब राजस्थान के सबसे बड़े सोलर पावर हब की ओर मजबूती से कदम बढ़ा रहा है. पूरी रिपोर्ट विस्तार से पढ़ें.

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जोधपुर: सोलर पावर का नया हब बनी 'सूर्यनगरी'Zoomपीएम कुसुम योजना से बदली सूर्यनगरी की तस्वीर, किसान बने बिजली उत्पादक

जोधपुर: राजस्थान का जोधपुर शहर, जो अपनी ऐतिहासिक विरासत और पर्यटन के लिए विश्व विख्यात है, अब सौर ऊर्जा के क्षेत्र में देश का नया केंद्र बनकर उभर रहा है. सूरज की जो तपिश कभी यहाँ की चुनौती मानी जाती थी, आज वही धूप जोधपुर के लिए सबसे बड़ी ताकत बन गई है. प्रधानमंत्री कुसुम (PM-KUSUM) योजना के शानदार क्रियान्वयन ने जोधपुर को राजस्थान का उभरता हुआ ‘सोलर पावर हब’ बना दिया है. इस योजना की बदौलत अब तक यहाँ 670 मेगावाट से अधिक बिजली का उत्पादन शुरू हो चुका है, जिसने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की बिजली व्यवस्था को एक नया आधार दिया है.

योजना के तहत जोधपुर डिस्कॉम क्षेत्र में सौर ऊर्जा परियोजनाओं का जाल बिछाया जा रहा है. विभागीय आंकड़ों के अनुसार, कुल 475 परियोजनाओं के माध्यम से 1073 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया था. सुखद बात यह है कि पश्चिमी राजस्थान की तेज धूप और जागरूक किसानों के सहयोग से आधे से अधिक लक्ष्य प्राप्त किया जा चुका है. आरती डोगरा, ऊर्जा सचिव, राजस्थान सरकार, इस पूरी योजना की बारीकी से मॉनिटरिंग कर रही हैं. उनका मुख्य फोकस फीडर सोलराइजेशन और कृषि क्षेत्र को दिन में निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने पर है.

आंकड़ों की जुबानी: जोधपुर डिस्ट्रिक्ट सर्कल ने मारी बाजीजोधपुर डिस्कॉम के प्रबंध निदेशक डॉ. भंवरलाल के नेतृत्व में तकनीकी प्रक्रियाओं और संयंत्र स्थापना में अभूतपूर्व तेजी आई है. आंकड़ों पर गौर करें तो जोधपुर डिस्ट्रिक्ट सर्कल इस मामले में सबसे आगे रहा है. यहाँ अब तक 279 सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं, जिनसे 666.88 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है. वहीं, जोधपुर सिटी सर्कल में भी 2 संयंत्रों के माध्यम से 4 मेगावाट बिजली ग्रिड में जोड़ी जा रही है. यह विस्तार न केवल बिजली की कमी को दूर कर रहा है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा कर रहा है.

अन्नदाता अब बने ‘ऊर्जादाता’: ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिली मजबूतीपीएम कुसुम योजना का सबसे क्रांतिकारी पहलू यह है कि इसने किसानों की भूमिका बदल दी है. डॉ. भंवरलाल के अनुसार, अब किसान केवल बिजली के उपभोक्ता नहीं रहे, बल्कि वे ‘ऊर्जा उत्पादक’ (Energy Producer) बन गए हैं. अपनी अनुपयोगी या कम उपजाऊ भूमि पर सोलर प्लांट लगाकर किसान हर महीने अतिरिक्त आय प्राप्त कर रहे हैं. इससे बिजली तंत्र पर कृषि लोड का दबाव कम होगा और लाइन लॉस में भी भारी कमी आएगी. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसानों को अब सिंचाई के लिए रात में जागने की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि सौर ऊर्जा के जरिए दिन में ही बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है.

भविष्य का सोलर ज़ोन और पर्यावरण संरक्षणजोधपुर की यह सफलता इसे प्रदेश के सबसे बड़े सोलर ज़ोन के रूप में स्थापित कर रही है. बड़ी संख्या में किसानों द्वारा अपनी जमीन सौर परियोजनाओं के लिए देना इस बात का प्रमाण है कि ग्रामीण राजस्थान अब स्वच्छ ऊर्जा की अहमियत समझ रहा है. यह मॉडल न केवल डीजल पंपों पर निर्भरता कम कर रहा है, बल्कि कार्बन उत्सर्जन घटाकर पर्यावरण संरक्षण में भी बड़ी भूमिका निभा रहा है. आने वाले समय में जोधपुर न केवल राजस्थान बल्कि पूरे उत्तर भारत के लिए सौर ऊर्जा का सबसे बड़ा पावर हाउस बनकर उभरेगा.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें

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