फ्रैक्चर हाथ, खाली जेब और बड़ा सपना! धौलपुर के जाकिर ने 2000 खिलाड़ियों को दी नई उड़ान

धौलपुर : खेल सिर्फ जीत और हार का नाम नहीं होता, कई लोग इसे अपने जीवन का मकसद बना लेते हैं. धौलपुर में बैडमिंटन को नई पहचान दिलाने वाले मोहम्मद जाकिर हुसैन भी ऐसे ही लोगों में शामिल हैं. उन्होंने अपने संघर्षों को पीछे छोड़ते हुए हजारों बच्चों के भविष्य को संवारने का काम किया है. पिछले करीब 20 वर्षों से वे बच्चों और युवाओं को निशुल्क बैडमिंटन प्रशिक्षण दे रहे हैं और अब तक 2 हजार से ज्यादा खिलाड़ियों को तैयार कर चुके हैं.
मोहम्मद जाकिर हुसैन बताते हैं कि उन्होंने पांचवी कक्षा से ही बैडमिंटन खेलना शुरू कर दिया था. उस समय परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी. अच्छी रैकेट और शटल खरीदने तक के पैसे नहीं होते थे, लेकिन उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी. संसाधनों की कमी के बावजूद उनका खेल के प्रति जुनून लगातार बढ़ता गया. उन्होंने पहली बार स्कूल टूर्नामेंट खेलने के लिए बांदीकुई में हिस्सा लिया, जहां उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए राजस्थान में दूसरा स्थान हासिल किया और सिल्वर मेडल जीता. इसके बाद उन्होंने तीन बार राजस्थान टीम का प्रतिनिधित्व भी किया। यह उनके लिए गर्व का पल था.
मामा से मिली प्रेरणा, जाकिर बने बैडमिंटन की पहचानमोहम्मद जाकिर हुसैन कहते हैं कि उन्हें बैडमिंटन खेलने की प्रेरणा अपने मामा जी से मिली. उनके मामा ने भी राजस्थान टीम से खेलते हुए सिल्वर मेडल जीता था. बचपन में उन्हें देखकर ही उन्होंने सपना देखा कि एक दिन वे भी राजस्थान और देश के लिए मेडल जीतेंगे. मामा जी के कोच एस.एन. भान ने उन्हें बैडमिंटन की बारीकियां सिखाईं. वे खुद साइकिल से उन्हें कोर्ट तक लेकर जाते थे और अभ्यास करवाते थे.
साइकिल पर पहुंचे कोर्ट, मेहनत से चमका धौलपुरआज धौलपुर के जिला बैडमिंटन संघ परिसर में हर शाम खिलाड़ियों की मेहनत और रैकेट की आवाज सुनाई देती है. यहां रोजाना 40 से 50 खिलाड़ी अभ्यास करते हैं. इन खिलाड़ियों के पीछे सबसे बड़ी ताकत बनकर खड़े रहते हैं कोच मोहम्मद जाकिर हुसैन. वे शाम 4:30 बजे से रात 8 बजे तक लगातार खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देते हैं.
टूटा हाथ, फिर भी नहीं टूटा खिलाड़ियों का हौसलाखिलाड़ियों के प्रति उनका समर्पण इतना गहरा है कि वर्ष 2012 में सड़क दुर्घटना में उनका हाथ फ्रैक्चर हो गया था. ऑपरेशन के बाद हाथ में प्लेट डाली गई, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देना बंद नहीं किया. मुश्किल समय से बाहर आने के बाद वे फिर पूरे उत्साह के साथ कोर्ट में लौटे और आज भी उसी ऊर्जा के साथ खिलाड़ियों को तैयार कर रहे हैं.
जाकिर की कोचिंग से 20 खिलाड़ी पहुंचे नेशनलउनके मार्गदर्शन में अब तक करीब 20 खिलाड़ी राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके हैं. धौलपुर जैसे छोटे जिले में बैडमिंटन को नई दिशा देने में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. एक शिक्षक होने के साथ-साथ वे बच्चों के लिए प्रेरणा भी हैं. वे खिलाड़ियों को सिर्फ खेल नहीं सिखाते, बल्कि अनुशासन, मेहनत और खेल भावना का महत्व भी समझाते हैं.
धौलपुर में बैडमिंटन की नई पहचान बने जाकिरवर्तमान में मोहम्मद जाकिर हुसैन जिला बैडमिंटन संघ धौलपुर में सचिव पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इसके अलावा राजस्थान बैडमिंटन संघ में संयुक्त सचिव के रूप में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. उनके प्रयासों से जिले में कई नई प्रतिभाओं को मंच मिला है और युवाओं का बैडमिंटन के प्रति रुझान लगातार बढ़ रहा है.
भारत की जर्सी का सपना, खिलाड़ियों को दे रहे उड़ानमोहम्मद जाकिर हुसैन का सबसे बड़ा सपना है कि धौलपुर का कोई खिलाड़ी भारत की जर्सी पहनकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश और जिले का नाम रोशन करे. यही सपना उन्हें हर दिन नई ऊर्जा देता है. उनकी कहानी संघर्ष, मेहनत, समर्पण और खेल के प्रति जुनून की ऐसी मिसाल है, जो हर युवा खिलाड़ी को प्रेरणा देती है.



