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राजस्थान में शुरू हुआ प्रोजेक्ट कैराकल, भरतपुर से शुरू होगा दुर्लभ वन्यजीव संरक्षण मिशन

Last Updated:May 17, 2026, 17:41 IST

Project Caracal Conservation Bharatpur: राजस्थान में दुर्लभ वन्यजीव कैराकल के संरक्षण के लिए राज्य सरकार ने ‘प्रोजेक्ट कैराकल’ की शुरुआत की है. इस मिशन का पहला चरण भरतपुर के बंध बारैठा क्षेत्र से शुरू होगा. करीब 18 महीने तक चलने वाले इस वैज्ञानिक अध्ययन में कैराकल की आबादी, व्यवहार, आवास और मूवमेंट पर रिसर्च की जाएगी. वन विभाग के साथ वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और SACON भी इस परियोजना में शामिल हैं. अधिकारियों के अनुसार यह पहल राजस्थान में जैव विविधता संरक्षण को मजबूत करने और कैराकल की घटती संख्या को बचाने की दिशा में अहम कदम साबित होगी.

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भरतपुर. राजस्थान में दुर्लभ वन्यजीव कैराकल के संरक्षण के लिए राज्य सरकार ने एक महत्वाकांक्षी पहल प्रोजेक्ट कैराकल की शुरुआत की है. इस वैज्ञानिक मिशन के पहले चरण की शुरुआत भरतपुर जिले के बंध बारैठा क्षेत्र से की जाएगी करीब 18 महीने तक चलने वाला यह प्रोजेक्ट कैराकल की घटती संख्या को समझने और उसके संरक्षण के लिए ठोस रणनीति तैयार करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है.

डीएफओ चेतन कुमार ने लोकल 18 से खास बातचीत में बताया कि राजस्थान में तेजी से घटती कैराकल की आबादी को देखते हुए राज्य सरकार ने यह विशेष परियोजना शुरू की है. कैराकल एक दुर्लभ और शर्मीला वन्यजीव है, जो खुले घास के मैदानों और शुष्क क्षेत्रों में पाया जाता है. इसके संरक्षण के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाते हुए इस प्रोजेक्ट को तैयार किया गया है. जिसमें कई महत्वपूर्ण संस्थाएं मिलकर काम कर रही हैं.

इस परियोजना में भरतपुर के अलावा तीन जिले शामिल हैं

इस परियोजना में सवाई माधोपुर, करौली और धौलपुर के साथ अब भरतपुर जिले का बंध बारैठा क्षेत्र भी शामिल किया गया है.यह इलाका कैराकल के संभावित आवास के रूप में पहचाना गया है. जहां कुछ समय पहले यह एक कैराकल कैमरे में कैद हुआ था जिसकी इसकी मौजूदगी के संकेत पहले भी मिल चुके हैं. इसी कारण इसे प्रोजेक्ट के लिए महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में बंद बरेठा को चुना गया है. वन विभाग, वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया WII और सलीम अली सेंटर फॉर ऑर्निथोलॉजी एंड नेचुरल हिस्ट्री SACON की संयुक्त भागीदारी से इस मिशन को लागू किया जा रहा है.

18 महीने तक चलेगा गहन वैज्ञानिक अध्ययन

डीएफओ के अनुसार, पहले चरण में 18 महीने तक गहन वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा. इस दौरान कैराकल की आबादी उसके व्यवहार आवास शिकार के पैटर्न और उसके मूवमेंट से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाई जाएंगी इस अध्ययन के आधार पर भविष्य में कैराकल के संरक्षण के लिए ठोस और प्रभावी रणनीति तैयार की जाएगी. साथ ही जरूरत पड़ने पर इसके लिए सुरक्षित आवास विकसित करने और संख्या बढ़ाने के प्रयास भी किए जाएंगे. डीएफओ के अनुसार, यदि यह प्रोजेक्ट सफल रहता है तो न सिर्फ कैराकल की संख्या में वृद्धि होगी बल्कि राजस्थान के जैव विविधता संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी. बंध बारैठा से शुरू हो रहा यह मिशन आने वाले समय में पूरे राज्य के लिए एक मॉडल साबित हो सकता है.

About the Authordeep ranjan

दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें

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Bharatpur,Rajasthan

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