सीकर का 500 साल पुराना बरगद! इस संत की सोच से खड़ा हुआ हरियाली का महा प्रतीक

Last Updated:June 16, 2026, 09:40 IST
Raivasa Dham 500 Year Old Banyan Tree: सीकर जिले के रैवासा धाम में स्थित लगभग 500 वर्ष पुराना बरगद का वृक्ष प्रकृति संरक्षण और संत परंपरा की अनमोल विरासत का प्रतीक है. इसे संत अग्रदेवाचार्य महाराज ने रोपित किया था, जिन्होंने स्वयं इसकी देखभाल की और नियमित रूप से पानी दिया. समय के साथ यह पौधा विशाल वृक्ष बन गया, जो आज श्रद्धालुओं और पशु-पक्षियों को शीतल छाया प्रदान करता है. यह वृक्ष न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और पौधरोपण की प्रेरणा भी देता है.
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सीकर: राजस्थान के सीकर जिले के प्रसिद्ध रैवासा धाम में सैकड़ों साल पुराना एक ऐसा बरगद का पेड़ है जो प्रकृति संरक्षण का उदाहरण है. यह पेड़ संत परंपरा की महान विरासत का प्रतीक बना हुआ है. स्थानीय लोगों के अनुसार, यह बरगद का पेड़ 500 साल पुराने हैं. पूर्व अग्रपीठ रैवासा धाम के संत अग्रदेवाचार्य महाराज ने इस पेड़ को लगाया था. उन्होंने जानकीनाथ मंदिर और गुरुकुल के समाने मुख्य प्रवेश द्वार के बाहर एक छोटे से बरगद के पौधे का रोपण किया था. उस समय शायद किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी कि यह छोटा-सा पौधा आने वाली कई पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन जाएगा.
स्थानीय लोगों के अनुसार, अग्रदेवाचार्य महाराज प्रकृति के प्रति संवेदनशील थे. वे अपने पूर्वजों की पूजा-अर्चना करने के बाद स्वयं पीतल के बर्तन में पानी भरकर इस पौधे को सींचते थे. उनकी यह दिनचर्या केवल एक वृक्ष की देखभाल तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह प्रकृति के प्रति उनके समर्पण और संरक्षण की भावना को दर्शाती थी. उनके प्रयासों और नियमित देखभाल के कारण यह पौधा धीरे-धीरे विशाल बरगद के वृक्ष के रूप में विकसित हुआ.
अग्रदेवाचार्य महाराज ने दो विशाल बरगद के पौधे लगाए थे
गांव के 72 वर्षीय जनार्दन दाधीच बताते हैं कि उस समय क्षेत्र में पशुओं के लिए तेज धूप से बचने के लिए पर्याप्त छायादार स्थान उपलब्ध नहीं थे. गर्मियों में पशुओं और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता था. इस समस्या को देखते हुए अग्रदेवाचार्य महाराज ने दूरदर्शिता का परिचय देते हुए मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार और धूणा स्थल के पास बरगद का पौधे लगाया. इसके बाद जब एक पौधा बड़ा हो गया था. उन्होंने एक और बरगद का पौधा पास में लगाया. समय के साथ ये दोनों पौधे विशाल वृक्षों में परिवर्तित हो गए और आज हजारों लोगों तथा पशु-पक्षियों को शीतल छाया प्रदान कर रहे हैं.
पौधरोपण और प्रकृति संरक्षण का देते हैं संदेश
आज ये बरगद के वृक्ष केवल एक पेड़ नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की सदियों पुरानी परंपरा का साक्षी है. प्रतिदिन यहां आने वाले श्रद्धालु वृक्ष की छांव में विश्राम करते हैं और इसकी ऐतिहासिक महत्ता को महसूस करते हैं. आज जब दुनिया जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना कर रही है, तब रैवासा धाम का यह 500 वर्ष पुराना बरगद हमें पौधरोपण और प्रकृति संरक्षण का संदेश देता है. संत अग्रदेवाचार्य महाराज द्वारा लगाया गया यह वृक्ष आने वाली पीढ़ियों को भी पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा देता रहेगा.
About the Authordeep ranjan
दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें
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Sikar,Rajasthan



