Rajasthan

कॉलेज में पढ़ाई के साथ कमाई भी! वेस्ट से बना रहे बेस्ट प्रोडक्ट, छात्रों को मिल रहा 75% मुनाफा

Last Updated:June 17, 2026, 13:40 IST

Swami Keshvanand Rajasthan Agricultural University: बीकानेर के स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय में विद्यार्थी पढ़ाई के साथ-साथ स्वरोजगार और उद्यमिता के व्यावहारिक गुर सीख रहे हैं. सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय की अनुभवात्मक अधिगम इकाई (ईएलयू) के तहत छात्र-छात्राएं वेस्ट सामग्री से उपयोगी और आकर्षक उत्पाद तैयार कर रहे हैं. इन उत्पादों की बिक्री से होने वाले मुनाफे का 75 प्रतिशत हिस्सा विद्यार्थियों को दिया जाता है. वेस्ट कपड़ों, पुरानी साड़ियों और अन्य सामग्री से बैग, पर्स, डायरी कवर समेत कई उत्पाद बनाए जा रहे हैं. इस पहल से विद्यार्थियों में आत्मनिर्भरता, मार्केटिंग और व्यवसायिक कौशल विकसित हो रहे हैं.

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बीकानेर. स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय में विद्यार्थी पढ़ाई के साथ-साथ उद्यमिता और स्वरोजगार के गुर भी सीख रहे हैं. यहां छात्र-छात्राएं वेस्ट सामग्री से उपयोगी और आकर्षक उत्पाद तैयार कर न केवल अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन कर रहे हैं, बल्कि अच्छी-खासी कमाई भी कर रहे हैं. खास बात यह है कि इन उत्पादों की बिक्री से होने वाले मुनाफे का 75 प्रतिशत हिस्सा विद्यार्थियों को दिया जाता है.  महाविद्यालय में संचालित अनुभवात्मक अधिगम इकाई (ईएलयू) के तहत विभिन्न विभागों के विद्यार्थी बाजार की मांग के अनुरूप उत्पाद तैयार कर रहे हैं. इन उत्पादों की स्थानीय स्तर पर अच्छी मांग भी देखने को मिल रही है. विद्यार्थियों को पहले उत्पाद निर्माण और डिजाइनिंग का प्रशिक्षण दिया जाता है, इसके बाद वे स्वयं उत्पाद तैयार करते हैं और उनकी मार्केटिंग भी सीखते हैं.

महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. वीर सिंह ने बताया कि कौशल विकास प्रशिक्षण स्वरोजगारोन्मुखी शिक्षा का महत्वपूर्ण आधार है. ईएलयू का उद्देश्य विद्यार्थियों में उद्यमिता विकास, कौशल संवर्धन और विपणन प्रबंधन की समझ विकसित करना है. अंतिम सेमेस्टर में संचालित इस इकाई के माध्यम से विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया जाता है.  टेक्सटाइल एवं परिधान विभाग में वेस्ट कपड़ों से आकर्षक और उपयोगी उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं.  विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रसन्नलता आर्य ने बताया कि कपड़ा सिलाई के दौरान बचने वाले कपड़े को स्थानीय दर्जियों से कम कीमत पर खरीदा जाता है. इसके बाद विद्यार्थियों द्वारा इन कपड़ों से बैग, पर्स, डायरी कवर, रोटी कवर, मेकअप पाउच, की-चेन और अन्य कई उपयोगी वस्तुएं तैयार की जाती हैं.

घरों में अनुपयोगी पड़ी पुरानी साड़ियों और दुपट्टों का भी कर रहे उपयोग

घरों में अनुपयोगी पड़ी पुरानी साड़ियों और दुपट्टों का भी रचनात्मक उपयोग किया जा रहा है. हर वर्ष नए उत्पाद विकसित किए जाते हैं और इस वर्ष भी लगभग दस नए उत्पाद तैयार किए गए हैं. प्रसार शिक्षा एवं संचार प्रबंधन विभाग में विद्यार्थियों द्वारा कंप्यूटर आधारित रचनात्मक उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं. छात्रा राधा शर्मा ने बताया कि वे स्वयं कंप्यूटर पर ग्राफिक डिजाइन तैयार करती हैं और कॉलेज की प्रिंटिंग मशीनों की सहायता से फोल्डर, इनवेल्प, माउस पैड, बुकमार्क, फोन कवर, फ्रिज मैग्नेट तथा अन्य शैक्षणिक सामग्री तैयार करती हैं.  वहीं खाद्य एवं पोषण विभाग में छात्राओं ने पौष्टिक खाद्य उत्पादों का निर्माण किया है. विभागाध्यक्ष डॉ. ममता सिंह के निर्देशन में पापड़, स्क्वैश, अचार, मसाले और चटनियां तैयार की जा रही हैं, जिन्हें उपभोक्ताओं द्वारा पसंद किया जा रहा है.

आत्मनिर्भर बनने और अपना व्यवसाय शुरू करने का मिल रहा हुनर

महाविद्यालय में आयोजित प्रदर्शनी में विद्यार्थियों द्वारा तैयार इन सभी उत्पादों का प्रदर्शन किया गया. प्रदर्शनी में हस्तनिर्मित साड़ियां, स्टॉल, बैग, डायरी, कोस्टर सेट सहित अनेक उत्पाद आकर्षण का केंद्र रहे. इनके निर्माण में कशीदाकारी, बांधनी, चित्रकारी और अन्य पारंपरिक कलाओं का उपयोग किया गया. विद्यार्थियों का कहना है कि इस पहल से उन्हें न केवल व्यावहारिक ज्ञान मिल रहा है, बल्कि आत्मनिर्भर बनने और भविष्य में अपना व्यवसाय शुरू करने का आत्मविश्वास भी विकसित हो रहा है. वेस्ट सामग्री से बेस्ट उत्पाद तैयार करने की यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ रोजगार सृजन का भी उत्कृष्ट उदाहरण बन रही है.

About the Authordeep ranjan

दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें

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