Investment Tips : ईरान संकट के बीच लोकप्रिय हो रही कंट्रैरियन इन्वेस्टिंग, पैसा लगाने से पहले जान लें इसकी ABCD

Last Updated:June 09, 2026, 13:03 IST
Investment Opportunity : ईरान युद्ध की वजह से अभी निवेशकों के लिए बहुत मुश्किल वक्त चल रहा है. आपदा इस समय भी निवेश के कई अवसर हैं और इसी अवसर का फायदा उठाने के लिए कुछ लोग कंट्रैरियन इन्वेस्टिंग का रास्ता अपना रहे हैं. आखिर यह क्या चीज है और निवेशक कैसे व कहां इसका फायदा उठा सकते हैं. एक्सपर्ट के नजरिये से इसकी पूरी जानकारी देते हैं.ईरान संकट के बीच कंट्रैरियन इन्वेस्टिंग तेजी से लोकप्रिय हो रही है.
नई दिल्ली. ईरान युद्ध से शेयर बाजार सहित हर तरह के निवेश पर असर पड़ा है. ऐसे माहौल में निवेशकों के बीच विपरीत निवेश (कंट्रैरियन इन्वेस्टिंग) तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. सरल शब्दों में कहें तो विपरीत निवेश का मतलब ये है कि बाजार में हालात जितने खराब दिखते हैं, लाभ कमाने के अवसर उतने ही बेहतर होते हैं. वैसे तो यह काम लंबे समय से होता है कि गिरते बाजार में खरीदो और चढ़ने पर बेचो. लेकिन, मौजूदा माहौल में कंट्रैरियन इन्वेस्टिंग का लाभ उठाने के लिए इसकी पूरी एबीसीडी जानना जरूरी है.
ऑप्टिमा मनी के संस्थापक और निवेश एक्सपर्ट पंकज मठपाल का कहना है कि जैसा नाम से ही स्पष्ट है कंट्रैरियन निवेशक आम चलन के विपरीत चलने की कोशिश करते हैं. वे तब उत्साहित होते हैं, जब किसी अच्छी कंपनी के शेयर की कीमत में अचानक लेकिन अनुचित रूप से गिरावट आती है. ठीक वैसे ही जैसे बाजार में मौजूदा गिरावट संघर्ष और वैश्विक अनिश्चितता का परिणाम है. यह गिरावट कंपनी के मूलभूत सिद्धांतों के कारण नहीं है. लिहाजा ऐसी कंपनी के स्टॉक्स में निवेश करना परिणाम को सकारात्मक बना सकता है.
अभी कहां लगाना चाहिए पैसामठपाल का मानना है कि मौजूदा स्तरों पर खरीदारी करना एक अच्छा अवसर है और लार्ज व मिडकैप आकार वाली कंपनियों के पोर्टफोलियो वाले म्यूचुअल फंड में निवेश करना एक अच्छी रणनीति साबित हो सकती है. शायद यही बाजार में प्रवेश करने का सबसे सही समय है, खासकर उन म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए जो तेजी आने से पहले इस अवसर से चूक गए थे. विशेषज्ञों का तर्क है कि शेयरों में हालिया गिरावट ने भारत के वैल्यूएशन प्रीमियम को कम किया है. शेयरों की कीमतों में अत्यधिक वृद्धि को समाप्त किया है और लार्ज-मिडकैप आकार की कंपनियों को अधिक आरामदायक स्तर पर पहुंचाया है.
स्टॉक्स से ज्यादा म्यूचुअल फंड भरोसेमंदअर्थशास्त्रियों का मानना है कि भारत आने वाले महीनों में उच्च विकास के दौर में प्रवेश करेगा और यह विकास बड़ा होगा. इसमें विनिर्माण, उपभोग, बिजली, वित्तीय सेवाएं, इन्फ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और डिजिटल सेवाएं जैसे लगभग सभी उद्योग क्षेत्र शामिल होंगे. इससे लार्ज और मिडकैप शेयरों को लाभ होने की संभावना है, जो आर्थिक गतिविधियों के विस्तार से सबसे अधिक लाभान्वित होंगे. चूंकि, एक अनुभवी फंड मैनेजर अस्थिर बाजार की जटिलताओं को आसानी से संभाल सकता है, लिहाजा अभी म्यूचुअल फंड के माध्यम से निवेश करना निवेशकों के लिए एक कारगर निवेश रणनीति साबित हो सकती है.
कैसा रहा है लॉर्ज और मिडकैप का रिटर्नपिछले कुछ वर्षों में लार्ज और मिड-कैप म्यूचुअल फंड्स का प्रदर्शन अच्छा रहा है. इनमें सबसे आगे निप्पॉन इंडिया विजन लार्ज एंड मिडकैप फंड है, जो इस श्रेणी के सबसे पुराने फंड्स में से एक है. इस फंड ने तीन वर्षों में करीब 17.91% का सालाना रिटर्न दिया है. आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल, बंधन और इन्वेस्को के लार्ज और मिडकैप फंड्स ने भी तीन वर्षों में दोहरे अंकों का रिटर्न दिया है. आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल ने 16.41% का रिटर्न दिया, तो बंधन और इन्वेस्को के लार्ज और मिड-कैप फंड्स ने पिछले तीन वर्षों में क्रमशः 15.33% और 14.97% का रिटर्न दर्ज किया. यह अच्छा रिटर्न इसलिए मिलता है, क्योंकि लार्ज कैप मजबूती प्रदान करते हैं और मिडकैप में विकास की अपार संभावनाएं होती हैं.
About the AuthorPramod Kumar Tiwari
प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
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