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महाराणा प्रताप ‘हिंदुआ सूरज’, संघ प्रमुख बोले-भारत का इत‍िहास कभी गुलामी का नहीं रहा

Last Updated:June 17, 2026, 18:02 IST

मोहन भागवत ने उदयपुर में कहा, भारत का इतिहास गुलामी नहीं संघर्ष की गाथा है, हल्दीघाटी में वास्तविक विजय महाराणा प्रताप की थी, उन्हें हिंदुआ सूरज बतायामहाराणा प्रताप 'हिंदुआ सूरज', संघ प्रमुख बोले-भारत का इत‍िहास गुलामी का नहींZoomसंघ प्रमुख मोहन भागवत.

आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि भारत का इतिहास कभी भी पराधीनता या गुलामी का नहीं रहा है, बल्कि यह विदेशी आक्रांताओं के खिलाफ एक निरंतर संघर्ष की गौरवशाली गाथा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि हल्दीघाटी का युद्ध केवल महाराणा प्रताप या उनकी सेना तक सीमित कोई संघर्ष नहीं था, बल्कि यह पूरे समाज के सामूहिक प्रतिरोध का एक महान प्रतीक था. संघ प्रमुख ने जोर देकर कहा कि उपलब्ध ऐतिहासिक तथ्य, यहां तक क‍ि खुद मुगल इतिहासकारों ने ल‍िखा है क‍ि हल्दीघाटी के युद्ध में वास्तविक विजय महाराणा प्रताप की ही हुई थी.उन्‍होंने महाराणा प्रताप को ‘हिंदुआ सूरज’ यानी सन ऑफ ह‍िन्‍दू कहकर पुकारा.

मोहन भागवत बुधवार को उदयपुर में आयोजित ‘राष्ट्र चेतना संकल्प सभा’ को संबोधित कर रहे थे. यह सभा महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती और हल्दीघाटी के युद्ध में प्राप्त विजय की 450वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित की गई थी. इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आज पूरे देश में महाराणा प्रताप की जयंती अत्यंत श्रद्धा और गर्व के साथ मनाई जाती है, जो इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि हमारा राष्ट्र उन महान हस्तियों को हमेशा याद रखता है जिन्होंने स्वाभिमान, स्वतंत्रता और अपनी संस्कृति की रक्षा के लिए आजीवन संघर्ष किया.

हल्‍दीघाटी में हार गए थे मुगल

सेना और संसाधनों की तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि हल्दीघाटी के युद्ध में मुगलों का सेना के आकार, संसाधनों और हथियारों के मामले में पलड़ा भारी था, जबकि महाराणा प्रताप के पास सीमित संसाधन और छोटी सैन्य शक्ति थी; फिर भी उन्होंने संघर्ष का मार्ग कभी नहीं छोड़ा. आरएसएस प्रमुख ने कहा कि भारतीय समाज ने कभी भी आसानी से अधीनता स्वीकार नहीं की है और जब भी किसी आक्रांता ने इस भूमि पर नियंत्रण करने का प्रयास किया, तो प्रतिरोध की प्रक्रिया तुरंत शुरू हो गई.

भागवत ने बताया कि इतिहास को अक्सर एक विशिष्ट नैरेटिव के तहत पेश किया गया है, जबकि मुगल इतिहासकारों ने खुद ल‍िखा है कि युद्ध के दौरान मुगल सेना को पीछे हटने के लिए मजबूर होना पड़ा था. उन्होंने युद्ध के चरणों का जिक्र करते हुए कहा कि शुरुआती हमले में ही मुगल सेना पीछे हट गई थी, दूसरे चरण में प्रताप की सेना और उनके घोड़े चेतक की वीरता ने दुश्मनों को भारी नुकसान पहुंचाया, और तीसरे चरण के बाद मुगलों की यह स्थिति हो गई थी कि वे खुलकर आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं जुटा पाए और सिर्फ अपनी जान बचाते रहे.

बप्पा रावल और ललितादित्य की याद द‍िलाई

संघ प्रमुख ने याद दिलाया कि पश्चिम से उठी आक्रामकता की लहर को भारत में बप्पा रावल और ललितादित्य जैसे शूरवीरों ने विफल कर दिया था. उन्होंने कहा कि भारतीय समाज ने अनेक कठिनाइयां झेलकर भी अपनी संस्कृति को सुरक्षित रखा है और संकट के साथ-साथ सामान्य परिस्थितियों में भी समाज को एकजुट रहने की आवश्यकता है. बाबू कुंवर सिंह का उदाहरण देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि इतिहास अक्सर विजेताओं या सत्ता के करीब रहने वालों के दृष्टिकोण से लिखा गया है, इसलिए हल्दीघाटी के युद्ध से जुड़े तथ्यों का भी फिर से परीक्षण करने की नितांत आवश्यकता है.

महाराणा प्रताप ‘हिंदुआ सूरज’

महाराणा प्रताप को ‘हिंदुआ सूरज’ बताते हुए भागवत ने कहा कि उन्होंने कभी भी अपने धर्म, स्वाभिमान या मूल्यों से समझौता नहीं किया और उनका संघर्ष सत्ता के लिए नहीं बल्कि राष्ट्र रक्षा के लिए था. उन्होंने युवा पीढ़ी से प्रताप के आदर्श प्रशासन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया. इसी सभा में निम्बार्क पीठ के प्रमुख श्रीजी श्यामचरण महाराज ने भी उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए समाज में एकता, संगठन और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया. उन्होंने समाज से विभाजनकारी प्रवृत्तियों को त्यागकर सद्भाव, एकता और राष्ट्रहित के मार्ग पर चलने का आग्रह किया.

About the AuthorGyanendra Mishra

Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi.news18.com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for ‘Hindustan Times Group…और पढ़ें

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