Rajasthan

18 साल की बेटी ने किया कुछ ऐसा, जिसे देखकर पूरा लूणी कह उठा- ‘म्हारी छोरियां छोरा से कम है के’

Last Updated:June 18, 2026, 05:19 IST

Sharmila Choudhary Bike Trip: जोधपुर के लूणी उपखंड के बासनी झूठा गांव की 18 वर्षीय शर्मिला चौधरी अकेले बाइक पर 3000 किलोमीटर की धार्मिक यात्रा पर निकली हैं. उन्होंने देवभूमि उत्तराखंड के प्रमुख तीर्थस्थलों की यात्रा का संकल्प लिया है. शर्मिला की यह यात्रा न केवल धार्मिक है, बल्कि यह महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता का एक बड़ा संदेश भी देती है. इतनी कम उम्र में अकेले बाइक से इतनी लंबी दूरी तय करने के उनके इस साहसिक फैसले की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है. ग्रामीणों और परिजनों ने उन्हें सुरक्षित यात्रा की शुभकामनाएं देकर रवाना किया.

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Jodhpur: फिल्म दंगल का मशहूर और प्रेरणादायक संवाद ‘म्हारी छोरियां छोरा से कम है के’ आज के दौर में पूरी तरह हकीकत बनकर सामने आ रहा है. राजस्थान के जोधपुर जिले के लूणी उपखंड की रहने वाली 18 वर्षीय बेटी शर्मिला चौधरी ने अपने अदम्य साहस, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प से इस बात को सच साबित कर दिखाया है. बासनी झूठा गांव की निवासी शर्मिला चौधरी ने अकेले अपनी बाइक पर करीब 3000 किलोमीटर लंबी धार्मिक यात्रा शुरू की है. इतनी कम उम्र में और वो भी अकेले इतनी लंबी और कठिन दूरी बाइक से तय करने का उनका यह साहसिक निर्णय पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है.

शर्मिला चौधरी ने इस बेहद खास और चुनौतीपूर्ण सफर के तहत देवभूमि उत्तराखंड के प्रमुख और दुर्गम धार्मिक स्थलों की यात्रा करने का संकल्प लिया है. पहाड़ों के कठिन रास्तों और घुमावदार मोड़ों पर बाइक चलाना किसी चुनौती से कम नहीं होता, लेकिन शर्मिला के मजबूत हौसलों के आगे यह दूरी बेहद छोटी नजर आ रही है. उनकी इस साहसिक यात्रा को देखने के बाद न सिर्फ उनके गांव के लोग बल्कि आसपास के क्षेत्रों के युवा भी अचंभित हैं. शर्मिला की यह यात्रा आज की युवा पीढ़ी के लिए एक बेहतरीन मिसाल और बड़ी प्रेरणा बनकर सामने आई है.

धार्मिक आस्था के साथ महिला सशक्तिकरण का बड़ा संदेशशर्मिला चौधरी की यह यात्रा सिर्फ भगवान के दर्शन और धार्मिक आस्था तक ही सीमित नहीं है. इसके माध्यम से वह समाज को महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और देश की युवा शक्ति का एक बेहद मजबूत संदेश दे रही हैं. आज के आधुनिक दौर में जहां बेटियां शिक्षा, खेल, अंतरिक्ष और सेना जैसे हर क्षेत्र में अपनी अद्भुत प्रतिभा और अद्वितीय क्षमता का परिचय दे रही हैं, वहीं शर्मिला ने यह साबित कर दिया है कि यदि मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो कोई भी राह मुश्किल नहीं होती. अकेले सफर करने का उनका यह कदम समाज की रूढ़िवादी सोच को बदलने में सहायक सिद्ध होगा.

ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियों के लिए बनीं रोल मॉडलएक ग्रामीण परिवेश से निकलकर इतनी बड़ी यात्रा का फैसला लेना अपने आप में बहुत बड़ी बात है. शर्मिला का यह बेखौफ अंदाज ग्रामीण क्षेत्रों की उन तमाम अन्य युवतियों और बेटियों को भी अपने सपनों को जीने और उन्हें पूरा करने के लिए प्रेरित कर रहा है, जो अक्सर समाज या झिझक के कारण पीछे रह जाती हैं. लोगों का मानना है कि इस तरह के साहसिक कदमों से समाज में बेटियों के प्रति सुरक्षात्मक और सकारात्मक सोच को बढ़ावा मिलेगा और उन्हें आगे बढ़ने के समान अवसर मिलेंगे.

ग्रामीणों और परिजनों ने किया जोरदार स्वागत और विदाईइस ऐतिहासिक और धार्मिक यात्रा पर रवाना होने से ठीक पहले बासनी झूठा गांव में शर्मिला चौधरी का भव्य और उत्साहपूर्वक स्वागत किया गया. इस दौरान ग्रामीणों, समाज के प्रबुद्ध लोगों और उनके परिजनों ने शर्मिला को तिलक लगाकर और मिठाई खिलाकर शुभकामनाएं दीं. सभी ने उनके सुरक्षित सफर और सफल यात्रा की मंगल कामना की. ग्रामीणों ने गर्व से कहा कि शर्मिला ने हमारे पूरे क्षेत्र का मान बढ़ाया है और बेटियों की असीम शक्ति का एक शानदार उदाहरण देश के सामने प्रस्तुत किया है.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें

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