जापान, सिंगापुर और मॉरीशस खूब लगा रहे भारत में पैसा, आपके लिए कहां बन रहा मौका

तनाव की वजह से विदेशी निवेशक भारत से रूठ से गए थे. शेयर मार्केट खाली कर रहे थे, पैसा लगाने से बच रहे थे. लेकिन अब इनकी वापसी हो गई है.आरबीआई की रिपोर्ट बता रही कि विदेशी निवेशक एक बार फिर भारत में तेजी से पैसा लगा रहे हैं. खास बात यह है कि यह पैसा सिर्फ शेयर बाजार में नहीं, बल्कि बैंकिंग, मैन्युफैक्चरिंग, रिटेल और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में भी आ रहा है. जापान, सिंगापुर और मॉरीशस के इन्वेस्टर्स भर-भरकर पैसा इन सेक्टरों में डाल रहे हैं. यह भारतीयों के लिए मौके की तरह है.
RBI की जुलाई बुलेटिन में पब्लिश ‘स्टेट ऑफ द इकॉनमी’ रिपोर्ट के मुताबिक, फाइनेंशियल इयर 2026-27 के अप्रैल-मई के दौरान भारत में नेट एफडीआई बढ़कर 6.5 अरब डॉलर पहुंच गया, जो पिछले साल सिर्फ 2.47 अरब डॉलर था. यानी एक साल में विदेशी निवेश करीब ढाई गुना हो गया.
तो एफडीआई होता क्या है?
एफडीआई यानी Foreign Direct Investment. जब कोई विदेशी कंपनी भारत में फैक्टरी लगाती है, किसी भारतीय कंपनी में बड़ी हिस्सेदारी खरीदती है या लंबे समय के लिए कारोबार में निवेश करती है, तो उसे एफडीआई कहा जाता है. यह शेयर बाजार में रोज खरीद-बिक्री करने वाले निवेश से अलग होता है. इसलिए एफडीआई को किसी देश की इकोनॉमी में लंबे समय के भरोसे का संकेत माना जाता है.
विदेशी निवेशकों का भरोसा क्यों बढ़ा?
आरबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक- भारत अभी भी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी इकॉनमी में शामिल है. इंडस्ट्री और सर्विस सेक्टर लगातार अच्छा परफार्मेंस दे रहे हैं. घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है और विदेशी मुद्रा भंडार भी अच्छी स्थिति में है. पूरी दुनिया में तनाव है, इसके बावजूद भारत में आर्थिक गतिविधियां तेज बनी हुई हैं. ऊपर से भारत लगातार फ्री ट्रेड एग्रीमेंट कर रहा है, जो दुनिया भर के इन्वेस्टर्स के लिए भरोसे के रूप में काम कर रहा है.
कहां से आ रहा सबसे ज्यादा पैसा
आरबीआई की रिपोर्ट बता रही कि इस बार तीन देशों ने भारत में सबसे ज्यादा निवेश किया. जापान, सिंगापुर और मॉरीशस… इन तीनों देशों से भारत में आए कुल इक्विटी निवेश का करीब 74 प्रतिशत हिस्सा आया.
जापान क्यों बढ़ा रहा है निवेश?
जापानी कंपनियां पिछले कुछ वर्षों से चीन पर अपनी निर्भरता कम कर रही हैं. इसके लिए भारत उनके लिए बड़ा विकल्प बनकर उभरा है. ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, लॉजिस्टिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर में जापानी कंपनियां पहले से सक्रिय हैं. अब वे अपनी मौजूदगी और बढ़ा रही हैं.
सिंगापुर से क्यों आ रहा इन्वेस्टमेंट
सिंगापुर लंबे समय से एशिया का बड़ा फाइनेंशियल सेंटर है. दुनिया की कई इन्वेस्टमेंट कंपनियां वहीं से भारत में पैसा लगाती हैं. इसलिए सिंगापुर हमेशा भारत के सबसे बड़े इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन में शामिल रहता है.
मॉरीशस अब भी क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत और मॉरीशस के बीच टैक्स व्यवस्था और निवेश समझौतों की वजह से लंबे समय से कई विदेशी फंड मॉरीशस के रास्ते भारत में निवेश करते रहे हैं. नियमों में बदलाव के बाद भी यह रास्ता पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है.
सबसे ज्यादा पैसा किन सेक्टरों में गया?
फाइनेंशियल सर्विसेस में सबसे ज्यादा पैसा विदेशी निवेशकों ने लगाया. उन्होंने बैंक, एनबीएफसी, फिनटेक कंपनियां, डिजिटल पेमेंट, इन्वेस्टमेंट फर्म और वेल्थ मैनेजमेंट में खूब निवेश किया.उन्हें लग रहा कि तेजी से बढ़ रही डिजिटल इकोनॉमी और बैंकिंग सर्विसेस उन्हें फायदा करा सकती है.
दूसरे स्थान पर मैन्युफैक्चरिंग रही. मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, रक्षा उत्पादन और औद्योगिक मशीनरी जैसे क्षेत्रों में विदेशी कंपनियां लगातार निवेश बढ़ा रही हैं. मेक इन इंडिया और PLI जैसी सरकारी योजनाओं ने भी निवेश आकर्षित किया है.
भारत दुनिया का सबसे बड़ा उपभोक्ता बाजार बनने की ओर बढ़ रहा है. ऑनलाइन शॉपिंग, संगठित रिटेल और सप्लाई चेन के विस्तार की वजह से विदेशी कंपनियां इस क्षेत्र में भी तेजी से निवेश कर रही हैं.
आईटी, सॉफ्टवेयर, क्लाउड, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल सेवाओं में भारत की मजबूत पकड़ ने विदेशी निवेशकों को आकर्षित किया है. आरबीआई के अनुसार इन चारों क्षेत्रों में मिलाकर कुल विदेशी निवेश का लगभग 80 प्रतिशत आया.
एफपीआई भी लौटे
सिर्फ एफडीआई ही नहीं, बल्कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक यानी FPI भी भारतीय बाजार में लौट रहे हैं. जून 2026 में एफपीआई ने भारतीय शेयर और बॉन्ड बाजार में शुद्ध निवेश किया. 20 जुलाई तक एफपीआई का कुल निवेश 3.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया. आरबीआई के अनुसार इसके पीछे दो बड़े कारण रहे. पहला, डेट मार्केट के लिए सरकार और आरबीआई की नई नीतियां आईं और तनाव में कुछ कमी रही.



