पेट में जमा पुराना से पुराना कचरा खींच निकलेगा ये पहाड़ी अंजीर, छुटकू सा फल पाचन का है बादशाह

Last Updated:June 18, 2026, 17:44 IST
Pahadi Anjeer Benefits: उत्तराखंड के पहाड़ों पर मिलने वाला तिमला यानी पहाड़ी अंजीर स्वाद और सेहत का एक अनोखा खजाना है. अप्रैल से जून के महीने में मिलने वाले इस जंगली फल की सब्जी, अचार और रायता पहाड़ों में बहुत चाव से खाया जाता है. आयुर्वेदिक डॉक्टर सिराज सिद्दीकी के मुताबिक, तिमला पेट की बीमारियों, कब्ज और डायबिटीज के मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. हालांकि, इसका जरूरत से ज्यादा सेवन सेहत को नुकसान भी पहुंचा सकता है. आइए जानते हैं पहाड़ी अंजीर को खाने का सही तरीका, इसके बड़े फायदे और सावधानियां.
देहरादून: उत्तराखंड के खूबसूरत पहाड़ों पर कुदरत ने कई ऐसे अनमोल फल दिए हैं, जो न सिर्फ खाने में स्वादिष्ट होते हैं बल्कि दवा की तरह काम करते हैं. ऐसा ही एक अनोखा पहाड़ी फल है ‘तिमला’, जिसे ‘पहाड़ी अंजीर’ भी कहा जाता है. पहाड़ों में अप्रैल से लेकर जून के महीने में यह फल बहुत आसानी से मिल जाता है. जब तिमला का फल हल्का लाल और पीला हो जाता है, तब इसका मीठा स्वाद लोगों को खूब पसंद आता है. पहाड़ों में इसके कच्चे फल से बनी सब्जी, अचार और रायता बेहद मशहूर हैं. यह फल स्वाद के साथ-साथ हमारी सेहत और पाचन क्रिया को भी एकदम दुरुस्त रखता है.
पाचन तंत्र के लिए वरदान देहरादून के आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. सिराज सिद्दीकी बताते हैं कि पहाड़ी अंजीर उत्तराखंड का एक पारंपरिक और बेहद गुणकारी फल है. पोषक तत्वों की बात करें तो इसमें लगभग 80 प्रतिशत पानी, 60 कैलोरी एनर्जी, 12 ग्राम कार्बोहाइड्रेट और 6 ग्राम नेचुरल शुगर पाई जाती है. इसमें प्रोटीन और फैट बहुत कम होता है, जबकि फाइबर अच्छी मात्रा में मिलता है.जिन लोगों को पेट से जुड़ी परेशानियां या डाइजेस्टिव डिसऑर्डर यानी पाचन संबंधी समस्या रहती है, उनके लिए तिमला बहुत फायदेमंद है. अगर आप रात के समय इसका सही तरीके से सेवन करते हैं, तो सुबह पेट खुलकर साफ होता है और खुलकर भूख भी लगती है. कम शुगर होने की वजह से डायबिटीज के मरीज भी इसका सेवन कर सकते हैं, लेकिन उन्हें एक बार अपने डॉक्टर से सलाह जरूर ले लेनी चाहिए.
ज्यादा खाया तो हो सकता है नुकसानडॉ. सिराज सिद्दीकी का कहना है कि तिमला जितना फायदेमंद है, इसका सेवन सही मात्रा में करना उतना ही जरूरी है. अगर आप बिना सोचे-समझे इसे ज्यादा खा लेते हैं, तो यह नुकसान भी पहुंचा सकता है. एक सामान्य वयस्क को एक दिन में 3 से ज्यादा कच्चे या पके तिमला नहीं खाने चाहिए. किसी भी हाल में एक दिन में 8 से ज्यादा तिमला का सेवन न करें, वरना आपको डायरिया, उल्टी और दस्त जैसी परेशानियां हो सकती हैं. अगर आप बाजार में मिलने वाले इसके सूखे पाउडर का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो ध्यान रखें कि दिनभर में इसकी मात्रा 10 ग्राम से ज्यादा नहीं होनी चाहिए.
तिमला खाने के 3 सबसे बेहतरीन तरीके1. दूध या पानी में भिगोकर खाएं: बाजार में पहाड़ी अंजीर सूखे रूप में भी मिलते हैं. रात के समय 2 से 4 सूखे तिमला को दूध या पानी में भिगोकर रख दें. सुबह उठकर खाली पेट इसका सेवन करने से पुरानी से पुरानी कब्ज की समस्या जड़ से खत्म हो जाती है.2. चटनी और पाउडर के रूप में: पहाड़ों पर लोग इसकी स्वादिष्ट चटनी बनाकर भी लंबे समय तक इस्तेमाल करते हैं, जो खाने का स्वाद बढ़ाने के साथ पेट को भी ठीक रखती है.3. पत्तियों का काढ़ा: तिमला के फल ही नहीं, बल्कि इसकी पत्तियां भी बहुत काम की हैं. आधे लीटर पानी में तिमला की पत्तियों को तब तक उबालें जब तक कि पानी घटकर 50 एमएल न रह जाए. इस अर्क को पीने से कब्ज, बदहजमी और पेट की हर छोटी-बड़ी समस्या से तुरंत आराम मिलता है.
About the AuthorSeema Nath
सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें
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