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जल संकट के बीच नवाचार का कमाल, 6 बीघा खेत को किसान रामकुंवार ने बना दिया कमाई का मजबूत मॉडल

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जल संकट के बीच रामकुंवार का कमाल, 6 बीघा खेत को बना दिया कमाई की फैक्ट्री

Last Updated:June 19, 2026, 15:06 IST

Farmer Ramkunwar Bhakar Success Story: जल संकट और घटते भूजल स्तर के बीच डीडवाना-कुचामन जिले के क्यामसर गांव के किसान रामकुंवार भाकर ने पारंपरिक खेती से हटकर फलदार बागवानी का रास्ता चुना. उन्होंने 6 बीघा भूमि पर करीब 300 फलदार पौधे और 100 आडू-नीम के पौधे लगाकर खेती का नया मॉडल तैयार किया. चार साल बाद अधिकांश पौधे फल देने की स्थिति में पहुंच चुके हैं और आय के नए स्रोत बन रहे हैं. बागवानी से न केवल कम पानी में बेहतर उत्पादन मिल रहा है, बल्कि भूमि की उर्वरता भी बढ़ी है. रामकुंवार का मानना है कि आधुनिक तकनीक और बागवानी के जरिए कम पानी में भी खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है.

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Agriculture Success Story: डीडवाना-कुचामन जिले के क्यामसर गांव किसान रामकुंवार भाकर उन्नत खेती कर रहे हैं. उन्होंने खेती में नवाचार कर यह साबित कर दिया है कि सीमित संसाधनों और जल संकट के बावजूद खेती में लाखों की कमाई की जा सकती है. उनका कहना है कि आधुनिक सोच व वैज्ञानिक खेती के जरिए खेती को लाभ का सौदा बनाया जा सकता है. लगातार गिरते भूजल स्तर और सिंचाई के सीमित साधनों के कारण क्षेत्र में रबी की खेती लगभग समाप्त होती जा रही है, लेकिन रामकुंवार ने परिस्थितियों के आगे हार मानने के बजाय नवाचार का रास्ता चुना और अपनी भूमि को आय के स्थायी स्रोत में बदल दिया.

करीब चार वर्ष पहले उन्होंने अपनी 6 बीघा भूमि पर फलदार बगीचा विकसित करने का निर्णय लिया. इससे पहले वे पारंपरिक खेती किया करते थे, जिसमें उन्हें अधिक मुनाफा नहीं मिला पा रहा था. उनकी योजना ऐसी थी कि खेत में खरीफ फसलों का उत्पादन भी जारी रहे और साथ ही भविष्य में नियमित आय देने वाला बाग भी तैयार हो जाए. इसी सोच के साथ उन्होंने पौधों के बीच 30-30 फीट की दूरी रखते हुए वैज्ञानिक तरीके से बागवानी की शुरुआत की.

रामकुंवार ने बगीचा लगाने में अपनाया खास तरीका

रामकुंवार ने खेत में 60 नींबू, 60 बेल, 60 आंवला, 30 अनार, 30 अमरूद, 30 मौसमी तथा बेर के पौधों सहित करीब 300 फलदार पौधे लगाए. इसके अलावा खेत की चारदीवारी के आसपास लगभग 100 आडू और नीम के पौधे भी रोपे, जिससे पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था हो सके और खेत को प्राकृतिक सुरक्षा भी मिले. आज चार साल बाद उनकी मेहनत रंग लाने लगी है. अधिकांश पौधे विकसित होकर फल देने की अवस्था में पहुंच चुके हैं.

भूमि की उत्पादकता में भी ऐसे आया सुधार

बगीचे से मिलने वाली आय की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं. साथ ही खेत में विविध फसलों और फलदार वृक्षों के कारण भूमि की उत्पादकता में भी सुधार हुआ है. कम पानी में अधिक लाभ देने वाली बागवानी ने उनके खेती मॉडल को आसपास के किसानों के लिए प्रेरणा का केंद्र बना दिया है. इस सफल खेती के कारण रामकुंवार की गिनती राजस्थान के प्रगतिशील किसानो में होने लगी है. रामकुंवार का कहना है कि बदलते जलवायु परिदृश्य और घटते जल संसाधनों को देखते हुए किसानों को पारंपरिक खेती के साथ बागवानी को भी अपनाना चाहिए. इससे कम पानी में बेहतर उत्पादन और लंबे समय तक आय का स्रोत तैयार किया जा सकता है.About the Authordeep ranjan

दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें

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