कनाडा ने खालिस्तानियों पर कस दी नकेल, संसद से पास हुआ C-9 बिल, खुशी से झूम उठे हिंदू

Last Updated:June 20, 2026, 19:08 IST
कनाडा ने धार्मिक घृणा और कट्टरपंथी गतिविधियों रोकने के लिए बिल पास किया है. नया कानून लोगों की धार्मिक आजादी की रक्षा करेगा. हिंदू संगठनों ने कहा कि यह कानून कनाडाई नागरिकों को धमकियों से निपटने में मदद करेगा. संगठन ने ये भी कहा कि कनाडा में हाल ही के सालों में हिंदू समुदाय को खालिस्तानी चरमपंथी धमकियों का सामना करने का मुद्दा उठाया है.मार्क कार्नी (रायटर्स)
कनाडा ने धार्मिक नफरत और कट्टरपंथी गतिविधियों को रोकने के लिए नया कानून बिल C-9 यानी कॉम्बैटिंग हेट एक्ट पास किया है. इस कानून का मकसद लोगों की धार्मिक आजादी को बनाए रखना है. साथी ही ये अब उन्हें देश में और भी सुरक्षा देगा. इससे अलग-अलग धार्मिक समुदायों के खिलाफ बढ़ती तफरत और धमकियों पर रोक लगेगी.
हिंदू संगठनों ने किया स्वागत
इस कानून का कई हिंदू संगठनों ने स्वागत किया है. कोएलिशन ऑफ हिंदूज ऑफ नॉर्थ अमेरिका ने कहा कि यह कानून धार्मिक समुदायों को नफरत और धमकियों से बचाने में मदद करेगा. संगठन का कहना है कि हाल के सालों में कनाडा में हिंदू समुदाय को खालिस्तानी चरमपंथी समूहों से धमकियों का सामना करना पड़ा है.
ऐसे में यह कानून लोगों और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा बढ़ाने में मददगार साबित हो सकता है. नए कानून में धार्मिक और सामुदायिक स्थलों के आसपास सुरक्षा बढ़ाने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं. साथ ही नफरत फैलाने वाले प्रतीकों और गतिविधियों के खिलाफ भी सख्त कदम उठाने की व्यवस्था की गई है.
कनाडा ने पुरानी गलती को सुधारा: हिंदू संगठनों
वहीं हिंदू कैनेडियन फाउंडेशन ने भी इस कानून का स्वागत किया है. संगठन ने कहा कि कनाडा ने एक पुरानी गलती को सुधारते हुए स्वास्तिक और नाजी प्रतीक हाकेनक्रॉइज के बीच अंतर साफ किया है. फाउंडेशन ने जानकारी दी कि स्वास्तिक हिंदू, बौद्ध और जैन धर्मों में शांति और शुभता का प्रतीक है.
संगठन ने बताया कि कनाडा के 100 से ज्यादा संगठनों ने इस बदलाव का समर्थन किया था. उनका मानना है कि यह कदम बहुसांस्कृतिक समाज में सम्मान को बढ़ावा देगा और विभाजनकारी ताकतों पर लगाम लगाएगा.
‘अभी काम अधूरा है’
संगठन ने कहा कि केवल कानून बनाना ही काफी नहीं है. सरकार को इसे प्रभावी ढंग से लागू भी करना होगा ताकि सभी समुदाय सुरक्षित महसूस कर सकें. संगठन का कहना है कि कुछ हिंदू कनाडाई अब भी खालिस्तानी चरमपंथी समूहों से धमकियों और उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं. इसलिए कानून के तहत मिले अधिकारों और सुरक्षा उपायों का सही तरीके से इस्तेमाल करना जरूरी होगा.
About the Authorसज्जन कुमार दड़बीSenior Sub Editor
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