Rajasthan

टोंक फर्जी रजिस्ट्री केस में बड़ा एक्शन! हाईकोर्ट ने कलेक्टर टीना डाबी से पूछा- आखिर अब तक क्या कार्रवाई हुई?

Last Updated:June 21, 2026, 11:40 IST

Fake Registry Case Tonk: टोंक के चर्चित फर्जी रजिस्ट्री मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कलेक्टर टीना डाबी से विस्तृत जवाब मांगा है. अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा कि मामले में अब तक क्या कार्रवाई की गई और कर्मचारियों की संभावित संलिप्तता पर क्या कदम उठाए गए हैं. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुई कलेक्टर टीना डाबी ने कोर्ट को बताया कि मामले में सरपंच, पटवारी और सब-रजिस्ट्रार की भूमिका संदिग्ध प्रतीत होती है. उन्होंने एक ही दिन में रजिस्ट्री और नामांतरण की प्रक्रिया पूरी होने पर भी गंभीर सवाल उठाए. सुनवाई के दौरान एडीएम (बीसलपुर) की जांच रिपोर्ट और पुलिस जांच में सामने आए विरोधाभासों पर भी हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई. परिवादी रामधन चौधरी की ओर से एडवोकेट प्रवेंद्र कुंतल ने पक्ष रखा.

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फर्जी रजिस्ट्री केस: हाईकोर्ट के निशाने पर प्रशासन, टीना डाबी से मांगा जवाबZoomटोंक फर्जी रजिस्ट्री केस में बड़ा एक्शन

टोंक. टोंक जिले से एक चर्चित फर्जी रजिस्ट्री मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने टोंक जिला कलेक्टर टीना डाबी को कड़ी फटकार लगाते हुए इस पूरे मामले पर अब तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है. मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी कई तीखे सवाल खड़े किए हैं. इस पूरा घटनाक्रम पर आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया.

हाईकोर्ट जस्टिस रवि चिरानिया की एकलपीठ में इस मामले की सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान टोंक कलेक्टर टीना डाबी 19 जून को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए अदालत में पेश हुईं. हाईकोर्ट ने कलेक्टर से सीधे शब्दों में पूछा कि कोतवाली थाने में दर्ज इस फर्जी रजिस्ट्री मामले में प्रशासन ने अब तक क्या ठोस कदम उठाए हैं? कोर्ट ने विशेष रूप से सरकारी कर्मचारियों की संलिप्तता पर नाराजगी जताते हुए पूछा कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से यह खेल हुआ, उन पर अब तक क्या विभागीय या कानूनी कार्रवाई की गई है?

कलेक्टर ने माना— सरपंच, पटवारी और सब-रजिस्ट्रार की भूमिका संदिग्धहाईकोर्ट की फटकार के बाद जिला कलेक्टर टीना डाबी ने अदालत में अपना जवाब पेश किया. कलेक्टर ने स्वीकार किया कि इस पूरे फर्जीवाड़े में स्थानीय सरपंच, पटवारी और सब-रजिस्ट्रार (उप-पंजीयक) की भूमिका अहम है. कलेक्टर टीना डाबी ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि सिर्फ एक दिन के अंदर जमीन की रजिस्ट्री भी हो गई और उसका नामांतरण (म्यूटेशन) भी खोल दिया है. प्रशासनिक प्रक्रियाओं में इतनी जल्दबाजी साफ तौर पर बड़े भ्रष्टाचार और मिलीभगत की ओर इशारा करती है.

जांच रिपोर्टों में विरोधाभास पर कोर्ट नाराजसुनवाई के दौरान एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया. इस मामले में एडीएम (बीसलपुर) द्वारा की गई प्रशासनिक जांच और स्थानीय पुलिस द्वारा की गई रिपोर्ट में भारी विरोधाभास (अंतर) देखने को मिला. दोनों विभागों की थ्योरी अलग-अलग होने पर हाईकोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई और पूछा कि आखिर दोनों जांच रिपोर्टों में इतना अंतर क्यों है?

22 जून को आएगा कोर्ट का फैसलाअदालत में परिवादी रामधन चौधरी की ओर से पैरवी वरिष्ठ एडवोकेट प्रवेंद्र कुंतल ने की. उन्होंने कोर्ट के सामने भू-माफियाओं और अधिकारियों की साठगांठ के सबूत पेश किए. फिलहाल, हाईकोर्ट ने इस मामले में शामिल आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है, जो 22 जून को सुनाया जाएगा. कोर्ट के इस सख्त रुख के बाद टोंक के प्रशासनिक और राजस्व महकमे में हड़कंप मचा गया है.

About the AuthorJagriti Dubey

Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें

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