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सीकर में मेहरबान हुआ मानसून! खेतों में लौटी रौनक, सीकर में 4.25 लाख हेक्टेयर फसल बुवाई का लक्ष्य

सीकर. राजस्थान के सीकर जिले में प्री-मानसून की अच्छी बारिश के बाद खरीफ फसलों की बुवाई ने गति पकड़ ली है. कृषि विभाग के अनुसार, जिले की करीब 10 तहसीलों से जुड़े 500 से अधिक गांवों में बुवाई के लिए पर्याप्त बारिश दर्ज की गई है. किसानों ने खेतों में तैयारी शुरू कर दी है और जिलेभर में लगभग 40 प्रतिशत क्षेत्र में बुवाई का कार्य पूरा हो चुका है. इस वर्ष कृषि विभाग ने खरीफ सीजन के लिए 4.25 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई का लक्ष्य निर्धारित किया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 15 हजार हेक्टेयर अधिक है.

कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक मोहनसिंह बिजारणियां ने बताया कि खरीफ बुवाई की सभी तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया गया है. विभाग लगातार किसानों को मौसम और फसल प्रबंधन संबंधी सलाह भी दे रहा है. उन्होंने कहा कि जून के पहले पखवाड़े में होने वाली बारिश खरीफ फसलों के लिए अत्यंत लाभदायक मानी जाती है. इस दौरान बोई गई फसलों में अंकुरण और बढ़वार बेहतर होती है तथा मिट्टी में मौजूद गर्मी के कारण कीट एवं रोगों का प्रकोप भी अपेक्षाकृत कम रहता है.

फसलों की पैदावार बेहतर रहने की संभावना

विभाग ने सलाह दी है कि जिन क्षेत्रों में 18 से 20 मिलीमीटर या उससे अधिक वर्षा दर्ज हो चुकी है, वहां किसान तत्काल खरीफ फसलों की बुवाई शुरू कर सकते हैं. समय पर बुवाई होने से फसलों की पैदावार बेहतर रहने की संभावना बढ़ जाती है. साथ ही रबी सीजन की तैयारी के लिए खेत भी समय पर खाली हो सकेंगे. वहीं जिन क्षेत्रों में अभी 18 मिलीमीटर से कम बारिश हुई है, वहां किसानों को पर्याप्त नमी बनने तक इंतजार करने की सलाह दी गई है.

सीकर में 500 टन डीएपी खाद का आवंटन

किसानों की मांग को देखते हुए इफको द्वारा सीकर जिले के लिए 500 टन डीएपी खाद का आवंटन किया गया है. इफको के क्षेत्रीय प्रबंधक शंकरलाल गिठाला ने बताया कि डीएपी खाद श्रीमाधोपुर, नांगल भीम, थोई, पाटन, धोद, रायपुरपाटन, नाथूसर रतनपुरा, भारणी, सिहोड़ी, रुल्याणा, लामियां और पचार के सहकारी केंद्रों तक पहुंचा दी गई है. इसके अलावा धोद, खूड़ और अरणियां के निजी विक्रेताओं के माध्यम से भी किसानों को खाद उपलब्ध कराई जाएगी.

सीकर में बुवाई का ये है लक्ष्य

कृषि विभाग के अनुसार, इस वर्ष बाजरे की बुवाई में विशेष बढ़ोतरी का अनुमान है. जिले में 2.10 लाख हेक्टेयर में बाजरा, 1.20 लाख हेक्टेयर में ग्वार, 40 हजार हेक्टेयर में मूंग, 35 हजार हेक्टेयर में मूंगफली, 18 हजार हेक्टेयर में चवला, एक-एक हजार हेक्टेयर में ज्वार और मोठ तथा 260 हेक्टेयर में तिल की बुवाई का लक्ष्य रखा गया है. एग्रीकल्चर एक्सपर्ट दिनेश जाखड़ ने बताया कि किसानों को मूंग, मोठ और बाजरे की बुवाई से पहले बीजों को फफूंदनाशी दवा से उपचारित करना चाहिए. उन्होंने बताया कि इस योजना से शुरुआती बीमारियों से फसलों की सुरक्षा की जा सकती है. साथ ही डीएपी खाद का उपयोग निर्धारित मात्रा में करने और कतारों में बुवाई के दौरान खाद को बीज से थोड़ा नीचे डाले.

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