दुर्लभ पीली-आंखों वाले कबूतर का नया आशियाना बना जोड़बीड़, पक्षी प्रेमियों के लिए बना आकर्षण का केंद्र

Last Updated:June 23, 2026, 19:40 IST
Jodbeed Bird Conservation: जोड़बीड़ क्षेत्र इन दिनों दुर्लभ पीली-आंखों वाले कबूतरों के लिए सुरक्षित आश्रय स्थल के रूप में पहचान बना रहा है. शांत वातावरण, पर्याप्त भोजन और अनुकूल प्राकृतिक परिस्थितियों के कारण यह क्षेत्र इन पक्षियों के लिए आदर्श आवास साबित हो रहा है. पक्षी विशेषज्ञों के अनुसार पीली-आंखों वाले कबूतर सामान्य कबूतरों की तुलना में कम दिखाई देते हैं, इसलिए उनका किसी क्षेत्र में बड़ी संख्या में दिखना जैव विविधता के लिए सकारात्मक संकेत माना जाता है. जोड़बीड़ में इन पक्षियों की बढ़ती मौजूदगी ने पक्षी प्रेमियों, वन्यजीव फोटोग्राफरों और प्रकृति प्रेमियों का ध्यान आकर्षित किया है. यह क्षेत्र न केवल पक्षियों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, बल्कि प्रकृति पर्यटन को भी बढ़ावा दे रहा है.
पीली-आंखों वाला कबूतर कजाकिस्तान, उज़्बेकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, अफगानिस्तान, उत्तर-पूर्वी ईरान और उत्तर-पश्चिमी चीन के प्रजनन क्षेत्रों से हजारों किलोमीटर की लंबी प्रवासी यात्रा कर राजस्थान के जोड़बीड़ संरक्षण रिजर्व पहुंचता है. यह पक्षी पूरे छह माह के दौरान यहां निवास करता है और वसंत ऋतु के आगमन के साथ पुनः अपने प्रजनन क्षेत्रों की ओर लौट जाता है. इसकी नियमित उपस्थिति जोड़बीड़ की अंतरराष्ट्रीय पारिस्थितिक महत्ता को दर्शाती है.
जोड़बीड़ संरक्षण रिजर्व की प्राकृतिक घासभूमियां, झाड़ीदार वनस्पतियां और आसपास की कृषि भूमि पीली-आंखों वाले कबूतर के लिए भरपूर भोजन उपलब्ध कराती हैं. यह पक्षी मुख्य रूप से सेवन, बफेल, क्रोफुट, पैनिकम, एराग्रोस्टिस और एरिस्टिडा जैसी घासों के बीज खाता है. कटाई के बाद खेतों में बचे बाजरे और अन्य अनाज के दाने भी इसके प्रमुख भोजन स्रोत हैं. खुले परिदृश्य और उपयुक्त विश्राम स्थल इसे सुरक्षित शीतकालीन आवास उपलब्ध कराते हैं.
आवासों के लगातार क्षरण, कृषि विस्तार, प्रवासी मार्गों पर शिकार और उपयुक्त शीतकालीन क्षेत्रों के घटने से पीली-आंखों वाले कबूतर की संख्या में लगातार गिरावट आई है. इसी कारण इसे IUCN रेड लिस्ट में ‘असुरक्षित (Vulnerable)’ श्रेणी में शामिल किया गया है. वाइल्ड लाइफ शोधार्थी प्रियव्रत पांडे के अनुसार जोड़बीड़ संरक्षण रिजर्व इस दुर्लभ प्रवासी पक्षी के दीर्घकालीन संरक्षण के लिए भारत के सबसे महत्वपूर्ण शीतकालीन आश्रयों में गिना जाता है.
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अनुकूल मानसून, घासों में पर्याप्त बीज उत्पादन और कृषि क्षेत्रों में उपलब्ध भोजन के कारण जोड़बीड़ में शीतकाल के दौरान पीली-आंखों वाले कबूतरों की अच्छी संख्या दर्ज की जाती है. कई वर्षों में यहां सैकड़ों पक्षियों के समूह देखे गए हैं, जिससे यह क्षेत्र भारत में इस प्रजाति के सबसे बड़े ज्ञात शीतकालीन आवासों में शामिल हो गया है. हालांकि इनकी संख्या हर वर्ष मौसम और पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुसार बदल सकती है.
जोड़बीड़ संरक्षण रिजर्व केवल गिद्ध संरक्षण के लिए ही नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर संकटग्रस्त प्रवासी पक्षियों के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है. वाइल्ड लाइफ शोधार्थी प्रियव्रत पांडे बताते हैं कि यहां की घासभूमियां, देशज वृक्ष, खुला अर्ध-शुष्क परिदृश्य और अपेक्षाकृत कम मानवीय हस्तक्षेप पीली-आंखों वाले कबूतर सहित कई दुर्लभ प्रजातियों को सुरक्षित शीतकालीन आश्रय उपलब्ध कराते हैं. घासभूमियों का संरक्षण इन पक्षियों के भविष्य के लिए बेहद आवश्यक है.
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