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अलवर में कार्बाइड से पका रहे आम I rajasthan news I alwar news

Last Updated:June 23, 2026, 21:52 IST

Ripening mangoes using carbide: अलवर और आसपास के खैरथल-तिजारा व किशनगढ़ क्षेत्रों की मंडियों और गोदामों में फलों को कृत्रिम रूप से पकाने का गंभीर मामला सामने आया है. पड़ताल में खुलासा हुआ है कि आम, केला और पपीता जैसे फलों को प्रतिबंधित रसायन कैल्शियम कार्बाइड के जरिए तेजी से पकाकर बाजार में भेजा जा रहा है. खुले कार्टनों में रखी कार्बाइड की पुड़ियों से 24 घंटे में ही फल पीले कर दिए जाते हैं और कुछ ही दिनों में बिक्री के लिए तैयार कर दिए जाते हैं.

अलवर. गर्मियों में फलों के राजा आम की मिठास लोगों को खूब भा रही है, लेकिन बाजार में बिक रहे कुछ आमों की चमक और पीला रंग आपकी सेहत पर भारी पड़ सकता है. खैरथल-तिजारा और किशनगढ़ क्षेत्र में हुई पड़ताल में सामने आया है कि कई गोदामों में आम, केला और पपीता जैसे फलों को प्रतिबंधित रसायन कैल्शियम कार्बाइड के जरिए कृत्रिम रूप से पकाकर बाजार में भेजा जा रहा है. यही फल रोजाना बड़ी मात्रा में उपभोक्ताओं तक पहुंच रहे हैं. पड़ताल के दौरान कई गोदामों में कच्चे आम के कार्टनों के बीच कार्बाइड के पाउच खुलेआम रखे मिले.

फल पकाने की प्रक्रिया के बारे में पूछने पर कर्मचारियों और व्यापारियों ने बिना झिझक पूरा तरीका बताया. कार्रवाई के डर के सवाल पर एक व्यापारी ने बेखौफ अंदाज में कहा, सब कुछ सेटिंग से चलता है. जानकारी के अनुसार, 10 किलो कच्चे आम को महज तीन दिन में बाजार योग्य बनाने के लिए कार्टनों में कार्बाइड की पुड़िया रखी जाती हैं. रसायन के प्रभाव से फल 24 घंटे में पीले पड़ने लगते हैं और तीसरे दिन बिक्री के लिए तैयार हो जाते हैं. फल विक्रेताओं ने बताया कि जल्दी पकाने के लिए एक कैरेट में कैल्शियम कार्बाइड की 5 से 10 पुड़िया तक रखी जाती हैं. इससे हरे आम तेजी से पीले होकर पक जाते हैं. हालांकि अधिक समय तक कार्बाइड के संपर्क में रहने पर फल में गलन शुरू हो जाती है, इसलिए पीला पड़ते ही उन्हें कैरेट से निकाल लिया जाता है.

स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरामुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अरविंद गेट ने बताया कि आमों को कृत्रिम रूप से पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड के उपयोग की शिकायतें मिल रही हैं. यह प्रतिबंधित रसायन है और शिकायत मिलने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने बताया कि ऐसे फलों को बिना अच्छी तरह धोए खाने से जी मिचलाना, चक्कर आना, उल्टी, पेट दर्द और बेहोशी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. लंबे समय तक ऐसे रसायनों से पकाए गए फलों का सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है तथा कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ा सकता है.

कैसे पकाता है कार्बाइड?उद्यान विभाग के अनुसार कैल्शियम कार्बाइड नमी के संपर्क में आने पर एसिटिलीन गैस छोड़ता है. यह गैस फलों को प्राकृतिक प्रक्रिया से कहीं अधिक तेजी से पकाती है, जिससे फल बाहर से पीले दिखाई देते हैं, लेकिन उनकी गुणवत्ता और सुरक्षा पर सवाल खड़े हो जाते हैं. सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब गोदामों में खुलेआम रसायनों से फल पकाने का खेल चल रहा है तो विभागीय अभियान, निरीक्षण और सैंपलिंग की कार्रवाई कितनी प्रभावी है? पड़ताल में यह भी सामने आया कि क्षेत्र में जांच के लिए लैब सुविधा नहीं होने से कार्रवाई में दिक्कत आती है. जनस्वास्थ्य से जुड़े इस गंभीर मामले ने जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं. फिलहाल मंडियों में कार्बाइड से पकाए गए फलों का कारोबार बेखौफ जारी है और उपभोक्ता अनजाने में इन फलों का सेवन करने को मजबूर हैं. आम का रंग असामान्य रूप से एक समान पीला दिखे. फल बाहर से पका, लेकिन अंदर से कच्चा हो. प्राकृतिक खुशबू कम या बिल्कुल न हो. स्वाद में मिठास के बजाय कसैलापन महसूस हो. छिलके पर पीले और हरे रंग का अस्वाभाविक मिश्रण दिखाई दे.

About the AuthorMonali Paul

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें

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