Rajasthan

जोधपुर विधायक ने तबादलों के लिए खोला ‘डिजायर मंदिर’? अब भगवान श्रीराम तय करेंगे ट्रांसफर!

Last Updated:June 24, 2026, 12:27 IST

Jodhpur MLA Atul Bhansali Desire Mandir: जोधपुर शहर विधायक अतुल भंसाली ने तबादलों के सीजन में अनोखा प्रयोग करते हुए अपने कार्यालय में ‘डिजायर मंदिर’ बनाया है. उन्होंने भगवान श्रीराम के दरबार के आगे एक अर्जी पेटी रखी है, जिसमें सरकारी कर्मचारी ट्रांसफर के लिए अपने प्रार्थना-पत्र डाल रहे हैं. विधायक का कहना है कि वे केवल डाकिया हैं और काम भगवान की मर्जी से होगा. इस व्यवस्था से कर्मचारियों की भीड़ से बचकर विधायक क्षेत्र के विकास कार्यों पर ध्यान दे पा रहे हैं.

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Jodhpur: राजस्थान में सरकारी कर्मचारियों के तबादलों (ट्रांसफर) से पाबंदी हटते ही अपनी मनपसंद जगह पोस्टिंग पाने के लिए होड़ मच गई है. नेता, मंत्रियों और विधायकों के बंगलों पर सरकारी बाबुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है. इसी बीच, जोधपुर शहर विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक अतुल भंसाली ने ट्रांसफर डिजायर (सिफारिशी पत्र) लेने का एक ऐसा अनोखा और अकल्पनीय तरीका निकाला है, जिसने पूरे प्रदेश के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में तहलका मचा दिया है. विधायक अतुल भंसाली ने अपने सरकारी कार्यालय में बकायदा एक ‘डिजायर मंदिर’ स्थापित कर दिया है. अब सरकारी कर्मचारी अपनी सिफारिशी अर्जियां नेताओं के हाथों में देने के बजाय भगवान के दरबार में चढ़ा रहे हैं.

विधायक कार्यालय में बकायदा मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का एक सुंदर मंदिर बनाया गया है, जहां राम दरबार की तस्वीर के ठीक सामने एक विशेष ‘अर्जी पेटी’ (ड्रॉप बॉक्स) रखी गई है. ट्रांसफर और पसंदीदा पोस्टिंग की चाह रखने वाले सरकारी कर्मचारी या उनके परिजन विधायक कार्यालय पहुंचकर अपनी तबादला संबंधी प्रार्थना-पत्र सीधे इस पेटी में डाल रहे हैं. विधायक अतुल भंसाली का इस अनोखे प्रयोग पर कहना है, “एक जनप्रतिनिधि होने के नाते हमारे पास रोजाना सैकड़ों लोग तबादलों की सिफारिश लेकर पहुंचते हैं. किसी एक को प्राथमिकता देना और दूसरे को छोड़ना पूरी तरह अनुचित है. इसलिए हमने यह काम प्रभु श्रीराम को सौंप दिया है. हम तो सिर्फ एक डाकिया हैं, काम भगवान की मर्जी से ही होगा, इसलिए भगवान के चरणों में अर्जी लगा दें.”

डिजायर के चक्कर में जनता के काम न हों प्रभावित, इसलिए बनाया मंदिरविधायक अतुल भंसाली ने इस व्यवस्था के पीछे का एक व्यावहारिक कारण भी बताया. उन्होंने कहा कि तबादलों से पाबंदी हटने के बाद से ही कार्यालय में डिजायर लेने वालों का तांता लगा हुआ था. यदि जनप्रतिनिधि और उनका पूरा स्टाफ दिनभर केवल इन तबादलों के आवेदनों को लेने, छांटने और लोगों की सिफारिशें सुनने में ही अपना समय गंवा देगा, तो क्षेत्र की अन्य गंभीर जनसमस्याओं, बिजली-पानी के मुद्दों और विकास कार्यों पर ध्यान देना बिल्कुल नामुमकिन हो जाएगा. इसी सोच के चलते इस ‘डिजायर मंदिर’ की शुरुआत की गई ताकि व्यवस्था सुचारू रूप से चल सके.

सिफारिशी कल्चर पर चोट या नया अंधविश्वास? जनता में छिड़ी बहसविधायक कार्यालय का यह ‘डिजायर मंदिर’ अब पूरे जोधपुर संभाग सहित राजस्थान में भारी चर्चा का विषय बन चुका है. कार्यालय में अर्जी लगाने आए एक कर्मचारी विकास ने बताया कि यह बेहद पारदर्शितापूर्ण कार्य है, अब इसके लिए किसी बड़े राजनेता या दलाल की सिफारिश की जरूरत नहीं है. कुछ लोग इसे भ्रष्टाचार और राजनीतिक दबाव को कम करने वाला एक बेहतरीन और पारदर्शी प्रयोग मान रहे हैं, जहां अमीर-गरीब सबकी अर्जी एक ही पेटी में जा रही है.

क्या भगवान के भरोसे चलेगी प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था?विधायक अतुल भंसाली के इस कदम ने व्यवस्था पर कई बड़े सवाल (?) खड़े कर दिए हैं. क्या राजस्थान की प्रशासनिक व्यवस्था और सरकारी कर्मचारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग अब योग्यता और विभागीय नियमों के बजाय भगवान की ‘मर्जी’ या पर्ची सिस्टम से तय होंगे? क्या यह अनोखा प्रयोग वाकई ट्रांसफर उद्योग और सिफारिशी कल्चर को खत्म करने में मददगार साबित होगा या फिर यह केवल अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने का एक राजनीतिक पैंतरा है? जवाब जो भी हो, लेकिन फिलहाल जोधपुर का यह डिजायर मंदिर पूरे प्रदेश में आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें

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