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‘लगने लगा था कमी मुझमें ही है…’ शादी के 5 साल बाद प्रेग्नेंट हुईं अनुष्का रंजन, IVF के दर्दनाक सफर पर तोड़ी चुप्पी

Last Updated:June 26, 2026, 09:12 IST

IVF journey Anushka Ranjan : ओटीटी की जानी-मानी एक्ट्रेस अनुष्का रंजन ने बताया कि आईवीएफ (IVF) से कंसीव करने की कोशिश के दौरान एक महिला को किस कदर शारीरिक और मानसिक दोनों मोर्चों पर एक साथ लड़ना पड़ता है. बार-बार क्लीनिक के चक्कर काटना, हर दिन हॉरमोनल बदलावों से गुजरना और हर महीने उम्मीद का टूटना, इंसान को भीतर से खोखला कर देता है.शादी के 5 साल बाद प्रेग्नेंट हुईं अनुष्का रंजन, बयां किया IVF का दर्दनाक सचZoomउन्होंने बेहद ईमानदारी से स्वीकार किया कि जब बार-बार प्रयास करने के बाद भी सफलता नहीं मिल रही थी, तो उनके मन में हीन भावना आने लगी थी.

“मुझे 150 से ज्यादा इंजेक्शन लगवाने पड़े… एक वक्त ऐसा आया जब मैं मानसिक और शारीरिक रूप से पूरी तरह टूट चुकी थी. मुझे लगने लगा था कि शायद कमी मुझमें ही है.” यह दर्द, यह कड़वी सच्चाई और यह भावुक कर देने वाला बयान किसी आम महिला का नहीं, बल्कि बॉलीवुड और ओटीटी की जानी-मानी एक्ट्रेस अनुष्का रंजन का है.

हाल ही में मई 2026 में अपने पहले बच्चे के आने की खुशखबरी देने वाली अनुष्का ने  उस खामोश लड़ाई पर से पर्दा उठाया है, जिससे आज के दौर में न जाने कितनी ही महिलाएं अकेले जूझ रही हैं. वेब सीरीज ‘फितरत’ से सुर्खियां बटोरने वाली 35 वर्षीय अनुष्का रंजन ने आईवीएफ (IVF) के अपने बेहद दर्दनाक और थका देने वाले सफर को बयां किया है.

उन्होंने बेहद ईमानदारी से स्वीकार किया कि जब बार-बार प्रयास करने के बाद भी सफलता नहीं मिल रही थी, तो उनके मन में हीन भावना आने लगी थी.

शारीरिक ही नहीं, मानसिक रूप से भी तोड़ देता है सफरशादी के बाद मां बनना हर महिला के लिए एक खूबसूरत अहसास होता है, लेकिन जब इस सफर में रुकावटें आने लगती हैं, तो वह केवल एक शारीरिक समस्या नहीं रह जाती. अनुष्का रंजन ने साल 2021 में एक्टर आदित्य सील से शादी की थी. शादी के पांच साल बाद जब उन्होंने अपनी प्रेग्नेंसी की घोषणा की, तो हर कोई खुश था, लेकिन बच्‍चे की चाहत, आईवीएफ और मानसिक प्रताड़ना की कहानी अब सामने आई है.

अनुष्का ने बताया कि कंसीव करने की कोशिश के दौरान एक महिला को किस कदर शारीरिक और मानसिक दोनों मोर्चों पर एक साथ लड़ना पड़ता है. बार-बार क्लीनिक के चक्कर काटना, हर दिन हॉरमोनल बदलावों से गुजरना और हर महीने उम्मीद का टूटना, इंसान को भीतर से खोखला कर देता है.

‘सेल्फ-ब्लेम’ का वो खतरनाक दौरअनुष्का की सबसे छू लेने वाली और जरूरी बात थी ‘सेल्फ-ब्लेम’ (खुद को दोषी मानना) का जिक्र. उन्होंने बेहद ईमानदारी से स्वीकार किया कि जब बार-बार प्रयास करने के बाद भी सफलता नहीं मिल रही थी, तो उनके मन में हीन भावना आने लगी थी. उन्हें लगने लगा था कि उनमें ही कोई खराबी है.

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