Chambal River Origin to End Route Map in Hindi

Last Updated:June 27, 2026, 07:27 IST
Chambal River Origin to End Route Map: चंबल नदी का सफर मध्य प्रदेश के विंध्याचल पर्वतमाला के जनापाव क्षेत्र से शुरू होता है. मानसून में उफान पर रहने वाली इस नदी का पानी सबसे पहले गांधी सागर बांध में इकट्ठा होता है, जहां से यह राणा प्रताप सागर और जवाहर सागर बांध होते हुए कोटा बैराज तक पहुंचता है. ऊपर के तीनों बांधों से जलविद्युत का उत्पादन किया जाता है, जबकि अंतिम पड़ाव कोटा बैराज से दाईं और बाईं नहरों के जरिए राजस्थान और मध्य प्रदेश के खेतों की सिंचाई और शहरों को पेयजल मिलता है. बैराज से छोड़ा गया अतिरिक्त पानी आगे बहते हुए उत्तर प्रदेश के इटावा के पास यमुना नदी में मिल जाता है.
बरसात के मौसम में जब चंबल नदी उफान पर होती है, तब लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि आखिर कोटा बैराज तक पहुंचने वाला पानी कहां से आता है. दरअसल, चंबल नदी का उद्गम मध्य प्रदेश के विंध्याचल पर्वतमाला के जनापाव क्षेत्र के पास होता है. वहां से नदी आगे बढ़ते हुए कई जिलों का पानी अपने साथ लेकर सबसे पहले गांधी सागर बांध तक पहुंचती है. इसके बाद यही पानी राणा प्रताप सागर, जवाहर सागर और अंत में कोटा बैराज तक पहुंचता है.
अगर बात करें चंबल नदी पर बने गांधी सागर बांध की, तो यह इस परियोजना का पहला और सबसे बड़ा बांध है. यहां तक पहुंचने वाला पानी चंबल नदी के ऊपरी कैचमेंट, विंध्य क्षेत्र की पहाड़ियों, छोटी-छोटी नदियों और बरसाती नालों से आता है. इस बांध में पानी का विशाल भंडारण किया जाता है और जलविद्युत उत्पादन के बाद नियंत्रित तरीके से इसे आगे छोड़ा जाता है. यही पानी आगे राजस्थान की ओर बढ़ता है.
इसके बाद बात आती है गांधी सागर बांध की, जहां से छोड़ा गया पानी लगभग 52 किलोमीटर नीचे राणा प्रताप सागर बांध तक पहुंचता है. रास्ते में आसपास के कैचमेंट एरिया से आने वाला वर्षा जल भी इसमें मिल जाता है. यहां भी पानी का उपयोग मुख्य रूप से बिजली उत्पादन और जल संग्रहण के लिए किया जाता है. इसके बाद इस नियंत्रित जल प्रवाह को अगले बांध की ओर भेज दिया जाता है.
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ऐसे ही राणा प्रताप सागर से निकलने वाला पानी जवाहर सागर बांध तक पहुंचता है. यह चंबल घाटी परियोजना का तीसरा प्रमुख बांध है. यहां भी बड़े पैमाने पर जलविद्युत का उत्पादन किया जाता है. मानसून के दौरान स्थानीय कैचमेंट का पानी भी इसमें जुड़ता है, जिससे इसका जल स्तर काफी बढ़ जाता है. इसके बाद, यहां से छोड़ा गया पानी सीधे कोटा की ओर बढ़ता है.
और फिर कोटा बैराज चंबल घाटी परियोजना की चौथी और अंतिम प्रमुख संरचना है. यहां पहुंचने वाला अधिकांश पानी गांधी सागर, राणा प्रताप सागर और जवाहर सागर से छोड़ा गया होता है. बैराज से इस पानी को दाईं और बाईं मुख्य नहरों के माध्यम से राजस्थान और मध्य प्रदेश के लाखों हेक्टेयर कृषि क्षेत्र तक सिंचाई के लिए पहुंचाया जाता है.
देखने में कोटा बैराज का यह दृश्य बेहद विहंगम लगता है. जब बारिश का पानी चंबल नदी में आता है, तो यहां के गेट खोलकर पानी की निकासी की जाती है. बता दें कि कोटा शहर सहित कई आसपास के क्षेत्रों की पेयजल व्यवस्था भी इसी जल पर निर्भर है. बैराज से छोड़ा गया अतिरिक्त पानी आगे चंबल नदी के प्राकृतिक प्रवाह में बहता हुआ जाता है और अंततः उत्तर प्रदेश में यमुना नदी में मिल जाता है.
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