Rajasthan

क्रिप्टो के खेल में करोड़ों की ठगी! चूरू पुलिस के शिकंजे में हाई-टेक साइबर गैंग, 2.29 करोड़ का किया फ्रॉड

Last Updated:June 27, 2026, 21:01 IST

Cyber fraud of 2 crore in Churu: चूरू की दूधवाखारा थाना पुलिस ने 2.29 करोड़ रुपये के क्रिप्टो साइबर फ्रॉड का खुलासा करते हुए हाई-टेक साइबर सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है. पुलिस ने टेक्निकल एक्सपर्ट समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो क्रिप्टोकरेंसी, म्यूल अकाउंट्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए अवैध लेनदेन को अंजाम दे रहे थे. मामले में पूरे नेटवर्क और अन्य सहयोगियों की तलाश जारी है.चुरू में 2.29 करोड़ के क्रिप्टो साइबर फ्रॉड का भंडाफोड़, चार आरोपी गिरफ्तारZoom

चूरू. जिले की दूधवाखारा थाना पुलिस ने एक बड़े क्रिप्टो साइबर फ्रॉड का पर्दाफाश करते हुए लगभग 2 करोड़ 29 लाख रुपये की अवैध डिजिटल लेनदेन गतिविधि का खुलासा किया है. पुलिस ने इस हाई-टेक साइबर सिंडिकेट से जुड़े चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन पर अंतरराष्ट्रीय क्रिप्टो प्लेटफॉर्म्स के जरिए धोखाधड़ी करने का आरोप है.

पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपियों में भवानी सिंह, मनीष मेघवाल, संजय सिंह और दीपांशु शामिल हैं. दीपांशु राजगढ़ के बास मुंदी का निवासी है और वर्तमान में चूरू की पुनियां कॉलोनी में रह रहा था. बताया जा रहा है कि ये सभी आरोपी मिलकर संगठित तरीके से साइबर फ्रॉड को अंजाम दे रहे थे.

तकनीकी तरीके से होती थी ठगी

एसपी निश्चय प्रसाद के अनुसार, साइबर सेल से मिले इनपुट और संदिग्ध बैंक खातों (म्यूल अकाउंट्स) के आधार पर जांच शुरू की गई थी. तकनीकी जांच के दौरान डिजिटल ट्रांजैक्शन, आईपी एड्रेस और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का विश्लेषण किया गया, जिससे पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ. जांच में सामने आया कि आरोपी Telegram और TronLink जैसे प्लेटफॉर्म्स का उपयोग कर USDT को भारतीय मुद्रा में बदलते थे. इस प्रक्रिया में दीपांशु तकनीकी संचालन संभालता था, जबकि अन्य आरोपी बैंक खातों की व्यवस्था कर अवैध धन को विभिन्न खातों में ट्रांसफर करवाते थे.

नकदी निकालकर नेटवर्क तक पहुंचाई जाती थी रकम

पुलिस के अनुसार, यह गिरोह पहले पैसे को कई बैंक खातों में ट्रांसफर करता था और बाद में एटीएम व चेक के जरिए नकदी निकालकर आगे नेटवर्क तक पहुंचाता था. इस तरह पूरी प्रक्रिया को इस तरह डिजाइन किया गया था कि शुरुआती स्तर पर लेनदेन सामान्य दिखाई दे. पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी पश्चिम बंगाल भाग गए थे, लेकिन वहां नेटवर्क स्थापित न कर पाने के कारण वापस लौटते समय उन्हें पकड़ लिया. फिलहाल पुलिस पूरे साइबर नेटवर्क, अन्य सहयोगियों और वित्तीय लेनदेन की गहराई से जांच कर रही है. अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस गिरोह से जुड़े और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं.

About the AuthorMonali Paul

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें

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