Sports

पडिक्कल का गॉल में ‘देव’ रूप… 24 साल का खत्म हो गया सूखा, शतक ठोककर सौरव गांगुली के खास क्लब में हुए शामिल

नई दिल्ली.  श्रीलंका के खिलाफ पहले टेस्ट मैच का पहला दिन भारतीय क्रिकेट के लिए एक बेहद खास और ऐतिहासिक मौका बनकर आया. दिन का सबसे बड़ा आकर्षण रहे कर्नाटक के 26 वर्षीय बाएं हाथ के युवा बल्लेबाज देवदत्त पडिक्कल, जिन्होंने अपनी बेहतरीन बल्लेबाजी से श्रीलंकाई गेंदबाजों की बखिया उधेड़ दी. सुबह के सेशन में जब भारत का पहला विकेट गिरा, तो पडिक्कल तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे. स्टंप्स तक वह 131 रन बनाकर नाबाद रहे और भारत को एक मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया. यह महज एक शतक नहीं था, बल्कि इसने देवदत्त को भारतीय टेस्ट इतिहास के सबसे चुनिंदा और दिग्गज क्रिकेटरों के क्लब में शामिल कर दिया. अपने करियर का केवल तीसरा टेस्ट खेल रहे पडिक्कल टेस्ट क्रिकेट इतिहास में भारत के लिए तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए शतक बनाने वाले महज आठवें बाएं हाथ के बल्लेबाज बन गए हैं.

देवदत्त पडिक्कल (Devdutt Padikkal) के लिए यह दिन इसलिए भी यादगार रहा क्योंकि उन्होंने अपने टेस्ट करियर का पहला शतक जड़ा. अपनी इस शतकीय पारी के दौरान उन्होंने 178 गेंदों का सामना किया, जिसमें 12 शानदार चौके और 1 गगनचुंबी छक्का शामिल था. इससे पहले उन्होंने श्रीलंका क्रिकेट एकादश के खिलाफ अभ्यास मैच की पहली पारी में भी शानदार शतक जमाया था, जिससे यह साफ हो गया था कि वह श्रीलंका की धरती पर लाल गेंद के खिलाफ बेहतरीन फॉर्म में हैं.

देवदत्त पडिक्कल ने शतक जड़कर सौरव गांगुली के क्लब में बनाई जगह.

छह दशक पुरानी परंपरा और शुरुआती दिग्गजभारत के लिए तीसरे नंबर पर शतक बनाने वाले बाएं हाथ के बल्लेबाजों की यह परंपरा छह दशक पुरानी है. इसकी शुरुआत अप्रैल 1962 में हुई थी, जब सलीम दुर्रानी पोर्ट ऑफ स्पेन में वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरी पारी में 104 रन बनाकर इस स्थान पर शतक जड़ने वाले पहले भारतीय बाएं हाथ के बल्लेबाज बने थे. इसके बाद फरवरी 1964 में बापू नाडकर्णी ने कानपुर के मैदान पर इंग्लैंड के खिलाफ खेलते हुए 15 चौकों की मदद से नाबाद 122 रनों की ऐतिहासिक पारी खेली थी.

वाडेकर, सोल्कर और अमरनाथ का शानदार दौरसमय के साथ यह सूची और भी समृद्ध होती गई. फरवरी 1968 में अजीत वाडेकर ने वेलिंगटन में न्यूजीलैंड के खिलाफ 143 रन बनाए, जबकि जनवरी 1975 में एकनाथ सोल्कर ने मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में वेस्टइंडीज के खिलाफ 102 रनों की पारी खेली. अगले ही साल, यानी जनवरी 1976 में सुरिंदर अमरनाथ ने ऑकलैंड में न्यूजीलैंड के विरुद्ध 16 चौकों और 1 छक्के की मदद से 124 रन जड़कर इस सूची में अपना नाम दर्ज कराया.

कांबली के लगातार शतकों का अनोखा कीर्तिमाननब्बे के दशक में विनोद कांबली ने इस क्रम पर अपनी बल्लेबाजी का लोहा मनवाया. कांबली ने फरवरी 1993 में वानखेड़े में इंग्लैंड के खिलाफ 411 गेंदों पर 224 रनों की मैराथन पारी खेली. इसके तुरंत बाद मार्च 1993 में दिल्ली में जिम्बाब्वे के खिलाफ उन्होंने 227 रन बनाए. कांबली का बल्ला यहीं नहीं रुका; उन्होंने जुलाई और अगस्त 1993 में श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो के एसएससी (SSC) और पीएसएस (PSS) मैदानों पर क्रमशः 125 और 120 रनों की पारियां खेलकर लगातार शतक जमाने का अनोखा कीर्तिमान स्थापित किया.

गांगुली का युग और 24 साल का लंबा इंतजारइसके बाद दौर आया सौरव गांगुली का. गांगुली ने जून 1996 में लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर इंग्लैंड के खिलाफ 131 रन बनाकर अपने टेस्ट करियर का भव्य आगाज किया था. इसके तुरंत बाद उन्होंने जुलाई 1996 में नॉटिंघम में इंग्लैंड के खिलाफ ही 136 रनों की एक और बेहतरीन पारी खेली. गांगुली ने इस क्रम पर अपना आखिरी शतक फरवरी 2002 में दिल्ली में जिम्बाब्वे के खिलाफ 136 रन बनाकर जड़ा था. गांगुली के उस शतक के बाद से पिछले 24 सालों में कोई भी भारतीय बाएं हाथ का बल्लेबाज तीसरे नंबर पर टेस्ट शतक नहीं बना पाया था, जिसे आखिरकार आज पडिक्कल ने खत्म कर दिया.

केएल राहुल और पंत के साथ मजबूत साझेदारीपडिक्कल की इस पारी की मदद से भारतीय टीम ने मैच में अपना दबदबा पूरी तरह कायम कर लिया. उन्होंने केएल राहुल के साथ मिलकर दूसरे विकेट के लिए 252 गेंदों में 150 रनों की एक बेहद परिपक्व और मजबूत साझेदारी निभाई. राहुल 77 रन बनाकर दुर्भाग्यपूर्ण ढंग से रिटायर्ड हर्ट होकर मैदान से बाहर गए. इसके बाद पडिक्कल ने विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत के साथ मिलकर तीसरे विकेट के लिए नाबाद 52 रनों की साझेदारी की, जिसमें पंत 36 गेंदों में 27 रन बनाकर खेल रहे हैं.

शुभमन गिल के बाद तीसरे नंबर पर शतक लगाने वाले बल्लेबाजअगर सामान्य रूप से तीसरे नंबर के बल्लेबाज की बात करें, तो पडिक्कल से पहले भारत के लिए इस पोजीशन पर शतक बनाने वाले आखिरी खिलाड़ी शुभमन गिल थे. गिल ने चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में बांग्लादेश के खिलाफ पहले टेस्ट की दूसरी पारी में 119 रन बनाए थे. लेकिन एक बाएं हाथ के बल्लेबाज के रूप में तीसरे नंबर पर पडिक्कल की यह पारी लंबे समय तक याद रखी जाएगी.

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj