Rajasthan

2 साल से सूखा पड़ा जल जीवन मिशन का सपना, मांडावास गांव में पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे लोग

Last Updated:June 28, 2026, 11:10 IST

Jal Jeevan Mission Rajasthan: पाली जिले की रोहट तहसील के मांडावास गांव में जल संकट ग्रामीणों के लिए बड़ी समस्या बना हुआ है. ग्रामीणों का आरोप है कि जल जीवन मिशन के तहत बिछाई जाने वाली पाइपलाइन का काम पिछले करीब दो वर्षों से अधूरा पड़ा है, जिसके कारण आज भी गांव के लोग पेयजल के लिए संघर्ष कर रहे हैं. कई परिवारों को दूर-दराज के स्रोतों से पानी लाना पड़ रहा है, जबकि गर्मी और मानसून के बीच भी स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ है. ग्रामीणों का कहना है कि योजना की घोषणा के बाद उन्हें जल्द राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन कार्य में देरी से उनकी परेशानी बढ़ती जा रही है. स्थानीय लोगों ने संबंधित विभाग से जल्द काम पूरा कर नियमित जलापूर्ति शुरू करने की मांग की है. जल जीवन मिशन का उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है.

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पाली. मांडावास गांव के हालात इस कदर बदतर हो चुके हैं कि इस कड़ी धूप और भीषण गर्मी में भी गांव की महिलाएं और मासूम बच्चे दूर-दराज से पानी ढोने को मजबूर हैं. ग्रामीणों का कहना है कि पाइप लाइन का काम लंबे समय से रुका पड़ा है, जिसकी वजह से पीने के पानी की भारी किल्लत हो गई है. हाल ही में जगरवाल मदन सिंह ने माडवास गांव का दौरा कर मौके पर हालातों का जायजा लिया. उन्होंने पीड़ित ग्रामीणों और महिलाओं से मुलाकात की, जिन्होंने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि पानी के लिए उन्हें कितनी मशक्कत करनी पड़ रही है. इस गंभीर समस्या को देखते हुए अब राज्य सरकार से मांग की जा रही है कि जल जीवन मिशन के इस लंबित कार्य को तुरंत पूरा किया जाए ताकि ग्रामीणों को इस नरकीय स्थिति से निजात मिल सके.

हर घर जल का दावा करने वाली सरकार की ‘जल जीवन मिशन’ योजना रोहट क्षेत्र में पूरी तरह हांफती नजर आ रही है. इसका सबसे बड़ा उदाहरण क्षेत्र का मांडावास गांव है, जिसे कागजों में पाइपलाइन बिछाकर ‘आदर्श गांव’ बनाने का खाका तैयार किया गया था. लेकिन हकीकत यह है कि पिछले दो साल से ठेकेदार का भुगतान अटकने के कारण यहां काम पूरी तरह ठप पड़ा है. लाखों रुपये के सरकारी पाइप सड़कों और रास्तों में लावारिस पड़े-पड़े खराब हो रहे हैं, और ग्रामीण बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं.

आधी आबादी प्यासी, बंद कर दी पुरानी लाइनेंजगरवाल मदन सिंह ने कहा कि मांडावास गांव में पीएचईडी और ठेकेदार की लापरवाही का खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है. योजना के तहत नई पाइपलाइन डालने के लिए गांव की पुरानी चालू लाइनों को बंद कर दिया गया था. अब स्थिति यह है कि नई लाइनें आधी-अधूरी पड़ी हैं और पुरानी बंद हो चुकी हैं. इस कारण आधे गांव में तो जैसे-तैसे पानी पहुंच रहा है, लेकिन आधा गांव पिछले दो साल से पूरी तरह सूखा पड़ा है.

जनता प्यासी, पशुधन के नाम पर केवल औपचारिकतारोहट और इसके आस-पास के दर्जनों गांवों में कमोबेश यही हालात हैं. हर जगह काम आधा-अधूरा छोड़कर ठेकेदार गायब हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन केवल पशुधन के लिए खेलियों में पानी पहुंचाने का दिखावा कर रहा है, जबकि इंसानों को पानी पिलाने के लिए धरातल पर कोई ठोस काम नहीं किया जा रहा.

1500 से 2000 रुपये में टैंकर मंगवाने को मजबूर ग्रामीणभीषण गर्मी और पेयजल संकट के बीच ग्रामीणों के पास महंगे दामों पर निजी टैंकर मंगवाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है. एक टैंकर के लिए गरीब ग्रामीणों को 1500 से 2000 रुपये तक भुगतने पड़ रहे हैं, जिससे उनके बजट पर भारी असर पड़ रहा है. जो सक्षम नहीं हैं, वे दूर-दराज के कुओं से पानी ढोने को मजबूर हैं.

मुख्यमंत्री से गुहारभुगतान बहाल हो और टैंकरों की संख्या बढ़े रोहट क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने अब सीधे मुख्यमंत्री से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है. ग्रामीणों की मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:

ठप पड़े कामों को शुरू कराया जाएजल जीवन मिशन के तहत अटके ठेकेदारों के भुगतान तुरंत जारी किए जाएं ताकि मांडावास सहित अन्य गांवों में रास्ते में पड़े पाइपों को जोड़कर जलापूर्ति सुचारू हो सके.

सरकारी टैंकरों की संख्या बढ़ेजब तक स्थाई समाधान नहीं होता, तब तक बड़े गांवों में चल रहे सरकारी पानी के टैंकरों के फेरे (संख्या) बढ़ाए जाएं ताकि जनता को इस भीषण संकट से राहत मिल सके.

About the AuthorJagriti Dubey

Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें

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