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रूस के वह नेता, जिनका आज तक नहीं किया गया अंतिम संस्कार, 102 सालों बाद भी गला-सड़ा नहीं शव

दुनियाभर में आम तौर पर किसी व्यक्ति की मौत के कुछ घंटे या कुछ दिनों के भीतर अंतिम संस्कार कर दिया जाता है. लेकिन इतिहास में कई ऐसे नेता हुए, जिनका अंतिम संस्कार उनके निधन के काफी दिनों बाद किया गया. ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह खामेनेई का नाम भी इन्हीं नेताओं की फेहरिस्त में शामिल हो गया है. 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका के संयुक्त हमले में उनकी मौत हो गई थी. हालांकि तब देश जंग में घिर चुका था और इस कारण उनका अंतिम संस्कार नहीं किया जा सका. हालांकि अब जंग की धुंध छट चुकी है और अब खामेनेई के निधन के 116 दिन बाद 9 जुलाई को उन्हें सुपुर्द ए खाक किया जाएगा.

इन 116 दिनों तक खामेनेई के शव को किसी गुप्त स्थान पर संरक्षित करके रखा गया था. वैसे दुनिया में एक ऐसे भी नेता रहे हैं, जिनकी मौत के 102 साल बाद भी उनका अंतिम संस्कार नहीं हुआ. उनका पार्थिव शरीर आज भी लाखों लोगों के लिए सार्वजनिक रूप से रखा हुआ है. हम बात कर रहे हैं रूस की क्रांति के महानायक व्लादिमीर इलिच लेनिन की. 21 जनवरी 1924 को उनका निधन हुआ था, लेकिन आज भी उनका शव मॉस्को के रेड स्क्वायर स्थित लेनिन म्यूजोलियम में कांच के विशेष ताबूत में रखा हुआ है. हर साल हजारों पर्यटक और इतिहास प्रेमी इसे देखने पहुंचते हैं.

कौन थे लेनिन?

व्लादिमीर लेनिन का जन्म 22 अप्रैल 1870 को रूस में हुआ था. उन्होंने 1917 की बोल्शेविक क्रांति का नेतृत्व किया, जिसने रूस के राजतंत्र का अंत कर दिया. इसी क्रांति के बाद दुनिया का पहला कम्युनिस्ट देश सोवियत संघ (USSR) अस्तित्व में आया. लेनिन सोवियत संघ के पहले प्रमुख बने और उन्होंने ऐसी राजनीतिक व्यवस्था की नींव रखी, जिसे बाद में दुनिया के कई देशों ने अपनाया.

मौत के बाद क्या हुआ?

21 जनवरी 1924 को 53 वर्ष की उम्र में लेनिन का निधन हो गया. शुरुआत में सरकार ने उनके अंतिम संस्कार की तैयारी की थी, लेकिन लाखों लोग उन्हें अंतिम बार देखना चाहते थे. सर्दियों का मौसम होने की वजह से शव कई दिनों तक सुरक्षित रहा. इस दौरान लोगों की भीड़ लगातार बढ़ती गई.

इसके बाद तत्कालीन सोवियत नेतृत्व ने फैसला किया कि लेनिन के शरीर को हमेशा के लिए संरक्षित रखा जाएगा. पहले उनका शव लकड़ी के अस्थायी स्मारक में रखा गया. बाद में रेड स्क्वायर पर भव्य लेनिन म्यूजोलियम बनाया गया, जहां आज भी उनका पार्थिव शरीर रखा हुआ है.

102 साल से कैसे सुरक्षित है शव?

यह सवाल सबसे ज्यादा लोगों के मन में आता है कि आखिर एक इंसानी शरीर एक सदी से भी ज्यादा समय तक बिना सड़े-गले कैसे सुरक्षित रह सकता है? इसका जवाब आधुनिक विज्ञान और लगातार होने वाली देखभाल में छिपा है. लेनिन के शव को संरक्षित करने के लिए केवल फॉर्मेलिन लगाकर नहीं रखा गया. सोवियत वैज्ञानिकों ने इसके लिए बिल्कुल अलग तकनीक विकसित की. उन्होंने शरीर से रक्त और अन्य तरल पदार्थ निकालकर विशेष रासायनिक घोल का इस्तेमाल किया, जिससे शरीर के टिश्यू लंबे समय तक सुरक्षित रह सकें.

विशेषज्ञों की एक टीम आज भी लेनिन के शव की नियमित देखभाल करती है. हर 18 महीने में उनके शव को विशेष रासायनिक घोल में कई हफ्तों तक रखा जाता है. इस प्रक्रिया से त्वचा की नमी और लचीलापन बनाए रखा जाता है.

वहीं जिस जगह लेनिन का पार्थिव रखा है, उसके अंदर तापमान और आर्द्रता को बेहद नियंत्रित रखा जाता है. बहुत ज्यादा गर्मी या नमी शरीर को नुकसान पहुंचा सकती है, इसलिए वहां आधुनिक तकनीक से वातावरण को लगातार नियंत्रित किया जाता है.

इन वर्षों में लेनिन के शरीर के कुछ हिस्सों की मरम्मत भी की गई है. विशेषज्ञों के अनुसार आज जो शरीर दिखाई देता है, उसमें मूल ऊतकों के साथ वैज्ञानिक रूप से संरक्षित हिस्से भी शामिल हैं. चेहरे, हाथ और त्वचा की बनावट को बनाए रखने के लिए लगातार काम किया जाता है.

क्या पूरा शरीर असली है?

यह सवाल भी अक्सर पूछा जाता है. वैज्ञानिकों के अनुसार लेनिन के शरीर का बड़ा हिस्सा असली है, लेकिन कई दशकों की देखभाल के दौरान कुछ ऊतकों और बाहरी हिस्सों को संरक्षित या पुनर्निर्मित किया गया है. इसलिए आज दिखाई देने वाला शरीर पूरी तरह वैसा नहीं है, जैसा 1924 में था, लेकिन उसका अधिकांश हिस्सा मूल शरीर ही माना जाता है.

1991 में सोवियत संघ टूटने के बाद कई रूसी नेताओं और धार्मिक संगठनों ने मांग की कि लेनिन का अंतिम संस्कार कर दिया जाए. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के कार्यकाल में भी यह मुद्दा कई बार उठा, लेकिन सरकार ने अब तक कोई फैसला नहीं लिया. मॉस्को का रेड स्क्वायर और लेनिन म्यूजोलियम आज भी रूस के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में शामिल हैं. दुनिया भर से आने वाले लोग लेनिन के संरक्षित पार्थिव शरीर को देखने पहुंचते हैं.

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