Seychelles: अफ्रीका का सबसे छोटा देश कौन सा है? खूबसूरती और दौलत में सबसे आगे, नहीं है कोई सेना

Seychelles: भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया सेशेल्स यात्रा के बाद यह छोटा-सा द्वीपीय देश एक बार फिर चर्चा में है. हिंद महासागर के बीचों-बीच बसा सेशेल्स आकार में भले ही अफ्रीका का सबसे छोटा देश हो लेकिन प्राकृतिक सुंदरता के मामले में इसकी पहचान पूरी दुनिया में है. भारत के साथ इसके मजबूत रिश्ते और अनोखी खूबियां इसे बाकी देशों से अलग बनाती हैं. आइए जानते हैं सेशेल्स से जुड़ी 10 ऐसी खास बातें जो इसे दुनिया के सबसे खास देशों में शामिल करती हैं…
अफ्रीका का सबसे छोटा देश
सेशेल्स (Seychelles)हिंद महासागर में स्थित 115 द्वीपों का एक खूबसूरत देश है. इसे क्षेत्रफल के हिसाब से अफ्रीका का सबसे छोटा देश माना जाता है. इसका कुल भू-भाग लगभग 455 से 460 वर्ग किलोमीटर है जबकि यहां की आबादी करीब 1.2 लाख के आसपास है. देश की राजधानी विक्टोरिया (Victoria) है जो मुख्य द्वीप महे (Mahé) पर स्थित है. विक्टोरिया दुनिया की सबसे छोटी राजधानियों में भी गिनी जाती है.
सिर्फ 33 पर रहती है आबादी
सेशेल्स में कुल 115 द्वीप हैं. इनमें ग्रेनाइट यानी चट्टानी और कोरल दोनों तरह के द्वीप शामिल हैं हालांकि इन सभी द्वीपों पर लोग नहीं रहते. केवल लगभग 33 द्वीपों पर ही स्थायी आबादी बसती है. बाकी द्वीप या तो निर्जन हैं या फिर पर्यावरण संरक्षण के लिए सुरक्षित रखे गए हैं. यह देश अफ्रीका के पूर्वी तट से लगभग 1600 किलोमीटर दूर हिंद महासागर में स्थित है.
दुनिया के सबसे खूबसूरत बीच
अगर दुनिया के सबसे खूबसूरत समुद्री तटों की बात होती है तो सेशेल्स का नाम जरूर लिया जाता है. यहां स्थित अंसे सोर्स डी अर्जेंट (Anse Source d’Argent)बीच को दुनिया के सबसे सुंदर बीचों में गिना जाता है. यह बीच ला डिग (La Digue) द्वीप पर स्थित है. यहां का साफ नीला पानी, सफेद रेत और विशाल ग्रेनाइट चट्टानें पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं. यही वजह है कि पर्यटन देश की अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा आधार है और हर साल यहां लाखों विदेशी पर्यटक घूमने आते हैं.
दुनिया की सबसे छोटी राजधानियों में से एक
सेशेल्स की राजधानी विक्टोरिया आकार में काफी छोटी है. यहां की आबादी करीब 30 हजार के आसपास है. छोटा होने के बावजूद यह शहर अपनी खूबसूरती, औपनिवेशिक शैली की इमारतों, स्थानीय बाजारों और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है. एक समय यहां केवल एक ट्रैफिक सिग्नल होने की बात भी काफी चर्चित रही है.
विशाल कछुओं का घर है सेशेल्स
सेशेल्स की पहचान केवल समुद्र तटों से ही नहीं, बल्कि यहां पाए जाने वाले विशाल एल्डाब्रा विशाल कछुओं से भी है. एल्डाब्रा एटोल (Aldabra Atoll) में इन कछुओं की संख्या एक लाख से अधिक बताई जाती है. ये कछुए करीब 150 साल तक जीवित रह सकते हैं और इनका वजन 250 किलोग्राम तक हो सकता है.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी हालिया यात्रा के दौरान इन विशाल कछुओं को भी देखा.
यहां स्थायी सेना नहीं है
दुनिया के अधिकांश देशों के विपरीत सेशेल्स के पास स्थायी सेना नहीं है. देश की सुरक्षा मुख्य रूप से कोस्ट गार्ड और पुलिस बल संभालते हैं. यह देश शांति, समुद्री संसाधनों और पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था पर अधिक ध्यान देता है.
भारत के लिए क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
सेशेल्स हिंद महासागर में बेहद रणनीतिक स्थान पर स्थित है. अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के कई महत्वपूर्ण मार्ग इसके आसपास से गुजरते हैं. यही वजह है कि भारत, फ्रांस, अमेरिका और चीन जैसे देशों के लिए इसका खास महत्व है.भारत और सेशेल्स के संबंध लंबे समय से मजबूत रहे हैं. हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस (National Day) के गोल्डन जुबली समारोह में मुख्य अतिथि (Guest of Honour) के रूप में हिस्सा लिया. इस दौरान उन्होंने वहां के राष्ट्रपति से मुलाकात की.मंदिर का दौरा किया और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े सम्मान भी प्राप्त किए. दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा, रक्षा सहयोग और हिंद महासागर क्षेत्र में साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है. भारत पहले भी सेशेल्स को फास्ट पेट्रोल वेसल समेत कई सुरक्षा सहायता उपलब्ध करा चुका है.
पर्यटन और समुद्री अर्थव्यवस्था से चलता है देश
सेशेल्स की अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा आधार पर्यटन उद्योग है. यहां के समुद्र तट, प्राकृतिक सुंदरता, समुद्री जीव-जंतु और शांत वातावरण दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित करते हैं.इसके अलावा मछली पकड़ना, खासकर टूना मछली का निर्यात, देश की अर्थव्यवस्था का दूसरा बड़ा आधार है. प्रति व्यक्ति आय के मामले में भी सेशेल्स अफ्रीका के सबसे समृद्ध देशों में शामिल है.
यहां मिलता है दुनिया का सबसे भारी बीज
सेशेल्स में मिलने वाला कोको डेमेर (Coco de Mer)पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है. इसे दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे भारी बीज माना जाता है. इसका वजन लगभग 30 किलोग्राम तक हो सकता है.यह मुख्य रूप से प्रास्लिन (Praslin) द्वीप स्थित वैले दी मै (Vallée de Mai)क्षेत्र में पाया जाता है. यह पेड़ और इसका बीज सेशेल्स की खास पहचान माने जाते हैं.
जमीन छोटी, लेकिन समुद्री इलाका बेहद विशाल
सेशेल्स का भू-भाग केवल लगभग 459 वर्ग किलोमीटर है लेकिन इसका एक्सलूसिव इकोनॉमिक जोन (Exclusive Economic Zone,EEZ)करीब 13 से 13.5 लाख वर्ग किलोमीटर तक फैला हुआ है यानी इसका समुद्री क्षेत्र उसकी जमीन से लगभग 3000 गुना बड़ा है. यहां का समुद्री पानी दुनिया के सबसे साफ पानी वाले इलाकों में गिना जाता है. इस क्षेत्र में 900 से अधिक प्रजातियों की मछलियां और समुद्री जीव पाए जाते हैं. यही वजह है कि स्कूबा डाइविंग और समुद्री संरक्षण के लिए भी सेशेल्स दुनिया के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है.
संस्कृति में दिखता है कई देशों का संगम
सेशेल्स की संस्कृति को क्रिओल (Creole) संस्कृति कहा जाता है जिसमें अफ्रीकी, यूरोपीय और एशियाई परंपराओं का खूबसूरत मिश्रण देखने को मिलता है. यहां की तीन आधिकारिक भाषाएं अंग्रेजी (English), फ्रेंच (French) और सेशेल्वा क्रिओल (Seychellois Creole) हैं. यह देश वर्ष 1976 में ब्रिटेन से आजाद हुआ था.
पर्यावरण संरक्षण में दुनिया के लिए मिसाल
सेशेल्स को पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में दुनिया के सबसे जागरूक देशों में माना जाता है.यहां के कई प्राकृतिक क्षेत्र यूनेस्को (UNESCO) की विश्व धरोहर (World Heritage Site) सूची में शामिल हैं.सरकार समुद्री जैव विविधता, जंगलों और दुर्लभ जीव-जंतुओं की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देती है.
भारत-सेशेल्स रिश्ते लगातार हो रहे मजबूत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया यात्रा ने भारत और सेशेल्स के रिश्तों को नई मजबूती दी है. दोनों देश हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा, समुद्री सहयोग, पर्यावरण संरक्षण और विकास से जुड़े कई क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं. छोटे आकार के बावजूद सेशेल्स आज रणनीतिक, आर्थिक और पर्यावरणीय दृष्टि से दुनिया के महत्वपूर्ण देशों में अपनी अलग पहचान बना चुका है.



