पत्नी और चार बच्चों का सालों तक टालता रहा गुजारा-भत्ता, कोर्ट ने सुनाई ऐसी सजा कि…सुनकर दंग रह जाएंगे आप

Last Updated:June 30, 2026, 17:07 IST
पत्नी और चार बच्चों के भरण-पोषण की राशि लगातार नहीं चुकाने वाले पति पर टोंक फैमिली कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. अदालत ने चार अलग-अलग मामलों में आरोपी को कुल 660 दिन की जेल की सजा सुनाते हुए साफ संदेश दिया कि न्यायालय के आदेशों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी.
टोंक. स्थित पारिवारिक न्यायालय ने भरण-पोषण की राशि का लगातार भुगतान नहीं करने वाले पति के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. फैमिली कोर्ट के न्यायाधीश मधुसूदन शर्मा ने आरोपी पति को पत्नी और चार बच्चों के गुजारा-भत्ते की राशि अदा नहीं करने के चार अलग-अलग मामलों में कुल 660 दिन के कारावास की सजा सुनाई. अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायालय के आदेशों की अनदेखी किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी. मामले के अनुसार, पीड़िता की शादी वर्ष 2007 में हुई थी, विवाह के कुछ समय बाद ही पति और ससुराल पक्ष के लोगों ने उसे प्रताड़ित करना शुरू कर दिया. महिला का आरोप है कि उसके साथ लगातार मारपीट की गई और दहेज के नाम पर पैसों की मांग की जाती रही. वर्षों तक प्रताड़ना सहने के बाद वर्ष 2015 में आरोपी पति ने उसे चार बच्चों सहित घर से बाहर निकाल दिया. इसके बाद महिला बच्चों के साथ बेसहारा हो गई.
पति द्वारा घर से निकाले जाने के बाद पीड़िता ने न्याय पाने के लिए वर्ष 2017 में फैमिली कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. उसने अपने और अपने चार बच्चों के भरण-पोषण के लिए अदालत में परिवाद दायर किया. सुनवाई के बाद कोर्ट ने पति को नियमित रूप से गुजारा-भत्ता देने का आदेश दिया, लेकिन आरोपी ने अदालत के निर्देशों का पालन नहीं किया और लंबे समय तक राशि जमा कराने से बचता रहा.
अदालत का फैसला बना नजीर
भरण-पोषण की राशि का लगातार भुगतान नहीं किए जाने पर अदालत ने आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की. आरोपी को जेल से प्रोडक्शन वारंट के जरिए टोंक फैमिली कोर्ट में पेश किया गया. सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पत्नी और चार बच्चों के भरण-पोषण से जुड़े चार मामलों में आरोपी को कुल 660 दिन की जेल की सजा भुगतने का आदेश दिया. फैमिली कोर्ट का यह फैसला उन लोगों के लिए एक सख्त संदेश माना जा रहा है, जो अदालत के आदेश के बावजूद पत्नी और बच्चों के भरण-पोषण की जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करते हैं. अदालत ने यह स्पष्ट किया कि पत्नी और बच्चों का भरण-पोषण करना केवल नैतिक ही नहीं, बल्कि कानूनी दायित्व भी है. यदि कोई व्यक्ति अदालत के आदेशों की अवहेलना करता है, तो उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है. यह फैसला महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
About the AuthorMonali Paul
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें
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