हत्या | डकैत | Jagan Gurjar

हरवीर शर्मा/धौलपुर. चंबल के बीहड़ों में कभी शाम ढलते ही सन्नाटा उतर आता था. गांवों के दरवाजे जल्दी बंद हो जाते थे. लोग बच्चों को डराने के लिए किसी भूत का नहीं, बल्कि एक डकैत का नाम लेते थे. कहा जाता था कि अगर उसकी नजर किसी पर पड़ गई, तो फिर बचना आसान नहीं होता. बंदूक, बदला, खून और सरेंडर, इन चार शब्दों के बीच एक ऐसा नाम सालों तक घूमता रहा, जिसने राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की पुलिस को लंबे समय तक परेशान रखा. वह नाम था जगन गुर्जर.
हाल ही में अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में उसकी मौत हो गई. इसके साथ ही एक बार फिर लोग उसके पुराने कारनामों को याद करने लगे. उसकी कहानी सिर्फ एक डकैत की नहीं थी. इसमें बदले की आग थी, गैंग की कमान थी, पुलिस से बचने की कोशिश थी, कई बार सरेंडर था और ऐसे कई घटनाक्रम थे, जिनकी चर्चा आज भी चंबल के इलाकों में होती है.
जब जीजा की हत्या ने बदल दी पूरी जिंदगीजगन गुर्जर की कहानी वर्ष 1994 की एक घटना से जुड़ी बताई जाती है. धौलपुर जिले की बाड़ी उपखंड के खनपुरा गांव में उसके जीजा की जमीन विवाद में हत्या कर दी गई. आरोप था कि इस घटना के पीछे डकैत मोहन गुर्जर के रिश्तेदार थे. यही घटना जगन के जीवन का सबसे बड़ा मोड़ बनी. बदला लेने की ठान चुके जगन ने वर्ष 1999 में मोहन गुर्जर की हत्या कर दी. इसके बाद उसने उसी गैंग की कमान संभाल ली और खुद सरगना बन बैठा.
तीन भाई भी बने गैंग का हिस्सागैंग की कमान हाथ में आते ही उसके तीनों भाई पप्पू गुर्जर, लाल सिंह और पान सिंह भी उसके साथ जुड़ गए. इसके बाद करीब सात साल तक इस गैंग ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में अपना आतंक फैलाया. हत्या, अपहरण और लूट की कई वारदातों के बाद उसका नाम पुलिस की सबसे वांछित सूची में शामिल हो गया. चंबल के कई गांवों में उसका नाम सुनते ही लोग सहम जाते थे.
पहली बार हथियार छोड़े, लेकिन ज्यादा दिन नहीं
वर्ष 2001 में जगन गुर्जर ने तत्कालीन एसपी बीजू जॉर्ज जोसफ के सामने आत्मसमर्पण किया. उस समय लगा कि अब उसका अपराध का सफर खत्म हो जाएगा. लेकिन कुछ समय बाद जमानत पर बाहर आने के बाद वह फिर से पुराने रास्ते पर लौट गया. पुलिस के लिए उसकी तलाश फिर शुरू हो गई.
जब पूर्व मुख्यमंत्री के महल को दी धमकीवर्ष 2008 में गुर्जर आंदोलन के दौरान जगन गुर्जर ने तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के धौलपुर महल को बम से उड़ाने की धमकी दी. इस धमकी के बाद पुलिस ने उस पर शिकंजा और कस दिया. उसके खिलाफ 11 लाख रुपए का इनाम घोषित किया गया. लगातार दबाव बढ़ने पर उसने 30 जनवरी 2009 को कैमरी गांव में कांग्रेस नेता सचिन पायलट के सामने आत्मसमर्पण कर दिया.
एक ही दिन में कई वारदातों से मच गया हड़कंप
12 जून 2019 को जगन गुर्जर फिर सुर्खियों में आया. उसने बाड़ी के पुराने बस स्टैंड अस्पताल के पास दिनदहाड़े फायरिंग की. घटना की सीसीटीवी फुटेज भी सामने आई. इसके बाद वह बसेड़ी टोल नाके पहुंचा, जहां कुछ लोगों से मारपीट की. फिर सोने का गुर्जा इलाके में मुखबिरी के शक में लोगों के साथ मारपीट की गई. इसी रात वह बसई डांग थाना क्षेत्र के करण सिंह का पुरा गांव पहुंचा. दर्ज मामले के अनुसार वहां महिलाओं और बच्चों के साथ मारपीट की गई. आरोप यह भी लगा कि हथियार के दम पर महिलाओं को निर्वस्त्र कर गांव में घुमाया गया. इस घटना के बाद मामला दर्ज हुआ. बढ़ते दबाव के बीच 28 जून 2019 को उसने बाड़ी सदर थाने में सरेंडर कर दिया.
विधायक को धमकी और फिर तीसरा सरेंडरवर्ष 2022 में जगन गुर्जर ने बाड़ी से तीन बार विधायक रहे गिर्राज सिंह मलिंगा को कथित तौर पर फोन पर धमकी दी. इस बातचीत का ऑडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. मामला बढ़ा तो पुलिस ने उस पर 50 हजार रुपए का इनाम घोषित कर दिया. आखिरकार पुलिस का दबाव बढ़ने पर उसने 7 फरवरी 2022 को करौली पुलिस के सामने फिर आत्मसमर्पण कर दिया.
आखिरी पड़ाव, जेल में थम गई कहानीकभी चंबल के बीहड़ों में बंदूक लेकर घूमने वाला जगन गुर्जर आखिरकार जेल की सलाखों के पीछे पहुंच गया. हाल ही में अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में उसकी मौत हो गई. उसके साथ चंबल के एक ऐसे डकैत की कहानी भी खत्म हो गई, जिसने बदले से शुरुआत की, कई बार कानून के सामने झुका, लेकिन अपने कारनामों की वजह से सालों तक लोगों और पुलिस दोनों के बीच चर्चा का विषय बना रहा.



