Health

सांस सूंघकर कुत्ता बता देगा कि किसी को कैंसर है या नहीं, 10 सेकेंड में चल जाएगा पता, हजारों शेरू हो रहे हैं तैयार

Last Updated:June 30, 2026, 15:59 IST

Dog Detect Cancer: कैंसर की जांच बेहद जटिल होती है. इसके लिए कष्टप्रद बायोप्सी से गुजरना पड़ता है लेकिन देश में एक स्टार्ट अप कंपनी ने कुत्तों को इस तरह से तैयार किया है कि वह पलक झपकते ही किसी व्यक्ति की सांसों से कैंसर को पहचान लेता है. बेंगलुरु में इसके लिए 10 कुत्तों को प्रशिक्षित किया गया है. एक मिनट के अंदर यह कुत्ता 72 सांसों के नमूनों को पहचान सकता है. सबसे खास बात यह है कि यह जांच बेहद सटीक होता है. लैब टेस्ट में यह प्रमाणित हो चुका है.
सांस सूंघकर कुत्ता बता देगा कि किसी को कैंसर है या नहीं, 10 सेकेंड में चलेगा Zoomकैंसर की पहचान अब कुत्ते करेंगे.

Dog Detect Cancer: अभी तक तो आप यह जानते ही हैं कि कुत्ता इंसान का सबसे वफादार दोस्त होता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह शेरू बीमारियों की पहचान भी कर सकता है. जी हां, बेंगलुरु में एक स्टार्टअप कंपनी ऐसे कुत्तों की फौज खड़ा कर रही है जो किसी भी तरह के कैंसर की पहचान पलक झपकते ही कर लेगी. ये कुत्ते इंसानी सांस के सैकड़ों नमूनों में से कैंसर वाले नमूनों को अलग पहचान लेते हैं. बेंगलुरु में नेलमंगला स्थित डॉग्नोसिस फार्म में 15 कुत्तों को मानव सांस से कैंसर की पहचान करने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है. इस कंपनी का नाम डॉग्नोसिस है. इसकी स्थापना भारत में इजरायल के इटामार बिटान ने की है. बिटान कंपनी के सह-संस्थापक और प्रोडक्ट लीड भी हैं. पिछले कई महीनों से इन कुत्तों को प्रशिक्षित किया जा रहा है. इसमें शानदार सफलता मिली है.

कैसे टेस्ट करता है यह कुत्ताहिन्दुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक यह सब एक लैब में होता है. एक आयताकार कमरा है होता है जिसके बीचों-बीच एक मशीन लगी होती है जो समय-समय पर कुत्तों को ट्रीट देती है. इसके चारों ओर एक अंडाकार हरे रंग का रैंप बना हुआ है, जिसमें कई छोटे-छोटे स्टेशन हैं. इन स्टेशनों पर इंसानी सांसों के नमूने रखे जाते हैं. कमरे में कुत्ते को खास उपकरण पहनाया जाता है. इसमें ईईजी हेलमेट और एक विशेष हार्नेस शामिल रहता है. यह हार्नेस उसके न्यूरो-व्यवहार संबंधी संकेतों को रिकॉर्ड करता है. यह कुत्ता 12 अलग-अलग स्टेशनों पर रुककर मानव सांस के नमूनों को सूंघती है. कमरे में लगे कई कैमरे कुत्ते की हर गतिविधि, चलने की गति और सूंघने के तरीके को रिकॉर्ड करते हैं. दूसरी तरफ उसके शरीर पर लगा हार्नेस और ईईजी हेलमेट उसकी सांस लेने की प्रक्रिया, जैविक संकेतकों और मस्तिष्क की विद्युत गतिविधि का डेटा दर्ज करते रहते हैं. इस दौरान जिस सैंपल को सूंघकर वह बाहर निकलता है, वहीं उसे ट्रीट मिल जाता है. यह पूरी प्रक्रिया एक मिनट से भी कम समय में पूरी हो जाती है. इस एक मिनट के दौरान क्लोई लगभग 72 नमूनों को सूंघती है और उनमें से कैंसर वाले नमूने की सही पहचान कर लेती है.

सांस के नमूने कैसे लिए जाते हैंजांच की प्रक्रिया भी पूरी तरह व्यवस्थित है. प्रतिभागी 10 मिनट तक एक विशेष मास्क में सांस लेते हैं. इसके बाद उस मास्क को एयरटाइट कंटेनर में सील कर वैक्सीन बॉक्स में ठंडा रखा जाता है और लैब लाया जाता है. लैब में नमूनों को 4–5 डिग्री सेल्सियस तापमान पर सुरक्षित रखा जाता है जिसके बाद उन्हें कुत्तों के सामने लाकर रखा जाता है.

3,000 से अधिक लोगों पर क्लीनिकल ट्रायलपिछले लगभग 18 महीनों में डॉग्नोसिस ने कर्नाटक के छह अस्पतालों के साथ मिलकर कर 3,000 से अधिक लोगों पर क्लीनिकल ट्रायल किए हैं. इस ट्रायल का नतीजा जर्नल ऑफ क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी में प्रकाशित हुआ है. इसमें कुत्तों की सूंघने की क्षमता और इंसानी सांस के नमूनों से कई प्रकार के कैंसर की पहचान करने की सटीकता को दिखाया गया है. कंपनी के सह संस्थापक आकाश कुलगोड बताते हैं कि उनके परिवार में 11 डॉक्टर होने के कारण ट्रायल तेजी से आगे बढ़ सका. इस अध्ययन के प्रमुख ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. संजीव कुलगोड उनके चाचा हैं.

साल में 5 लाख परीक्षण की तैयारीफिलहाल डॉग्नोसिस के पास 15 प्रशिक्षित कुत्ते हैं और कंपनी हर वर्ष लगभग पांच लाख परीक्षण करने की क्षमता रखती है. आकाश कुलगोड कहते हैं किसी भी तरह के कुत्तों को मेरे पास लाइए. चाहे उसे कुछ भी न आता हो, हम 8 सप्ताह के अंदर कैंसर पहचानने में एक्सपर्ट बना देंगे. कंपनी ने ऐसे कुत्तों की पहचान के लिए विशेष प्रशिक्षण मैनुअल तैयार किया है, जो बार-बार एक ही काम करते हुए भी ऊबते नहीं हैं. बिटान कहते हैं सबसे जरूरी बात यह है कि उन्हें खाना बहुत पसंद का होना चाहिए. हालांकि कुत्तों को कोई वेतन नहीं दिया जाता लेकिन उन्हें सूखा मांस, फल, सब्जियां, स्वस्थ पाचन के लिए पौष्टिक भोजन, लंबी सैर, भरपूर खेल और नियमित पशु-चिकित्सकीय जांच की सुविधा दी जाती है. वे प्रतिदिन सिर्फ 30 मिनट काम करते हैं.

पारंपरिक टेस्ट से 10 गुना ज्यादा सटीकताइटामार बिटान कहते हैं, चूंकि यह पारंपरिक तरीका नहीं है, इसलिए इसे अपनाए जाने के लिए अन्य परीक्षणों की तुलना में कम से कम 10 गुना बेहतर साबित होना होगा. इज़राइल के रहने वाले बिटान ने 2020 तक चार वर्षों तक इज़राइली सेना की कैनाइन डॉग यूनिट में बमों का पता लगाने वाले कुत्तों के साथ काम किया है. इसके बाद उन्होंने कुत्तों की सूंघने की क्षमता का उपयोग कर कोविड-19 की पहचान करने वाला एक स्टार्टअप शुरू किया. उसी अनुभव के आधार पर उन्होंने भारत में डॉग्नोसिस की स्थापना की, जहां कुत्तों को मानव सांस के जरिए कैंसर का पता लगाने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है. कुत्तों की नाक में लगभग 30 करोड़ घ्राण रिसेप्टर्स होते हैं. वहीं इंसानों में इनकी संख्या केवल 50 से 60 लाख होती है. दुनियाभर में हुए कई अध्ययनों से साबित हुआ है कि कुत्ते वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों को सूंघकर कैंसर, कोविड-19, मलेरिया और पार्किंसन जैसी बीमारियों की पहचान कर सकते हैं. हालांकि सबसे बड़ी चुनौती यह समझना है कि कुत्ता आखिर सूंघकर क्या संकेत दे रहा है. वर्तमान में इस तकनीक में कुत्ते को अपने व्यवहार के माध्यम से यह बताना पड़ता है कि उसने क्या महसूस किया है और फिर एक प्रशिक्षित व्यक्ति उसके संकेतों की व्याख्या करता है.

About the AuthorLakshmi Narayan

18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें

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