Health

बारिश के मौसम में सांपों से रहें सावधान! ये गलतियां पड़ सकती हैं भारी, जानें बचने के आसान तरीके और काटने पर तुरंत क्या करें

Monsoon Safety: बारिश का मौसम राहत लेकर आता है, लेकिन इसके साथ कुछ ऐसे खतरे भी बढ़ जाते हैं जिन्हें अक्सर लोग हल्के में ले लेते हैं. इन्हीं में से एक है सांपों का घरों और आबादी वाले इलाकों में पहुंच जाना. हर साल मानसून के दौरान सर्पदंश के मामले तेजी से बढ़ते हैं, खासकर गांवों, खेतों और निर्माणाधीन इलाकों में. कई बार लोग जानकारी की कमी या गलत घरेलू उपायों के कारण अपनी जान जोखिम में डाल देते हैं.

ऐसे समय में घबराने के बजाय सही जानकारी होना सबसे बड़ी सुरक्षा है, अगर समय रहते सांप के काटने के लक्षण पहचान लिए जाएं और मरीज को तुरंत अस्पताल पहुंचाया जाए तो कई गंभीर मामलों में भी जान बचाई जा सकती है. इसलिए मानसून के दौरान सावधानी, जागरूकता और सही फर्स्ट एड हर परिवार के लिए बेहद जरूरी है.

बारिश में क्यों बढ़ जाता है सांपों का खतरा?मानसून के दौरान लगातार बारिश होने से सांपों के बिलों में पानी भर जाता है. ऐसे में वे सूखी और सुरक्षित जगह की तलाश में बाहर निकल आते हैं. कई बार वे घरों के स्टोर रूम, बगीचों, खेतों, लकड़ी के ढेर, कबाड़ या निर्माणाधीन मकानों में छिप जाते हैं. बारिश के मौसम में चूहों और दूसरे छोटे जीवों की गतिविधियां भी बढ़ जाती हैं. चूंकि सांप इनका शिकार करते हैं, इसलिए वे इंसानी बस्तियों के आसपास ज्यादा दिखाई देने लगते हैं, अगर कोई व्यक्ति अनजाने में उन पर पैर रख दे या उन्हें छेड़ दे, तो सांप खुद को बचाने के लिए हमला कर सकता है.

भारत में हर साल हजारों लोगों की जाती है जानसरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत में हर साल लाखों लोग सांप के काटने का शिकार होते हैं. इनमें 50 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो जाती है. विशेषज्ञों का मानना है कि बड़ी वजह समय पर इलाज न मिलना और घरेलू नुस्खों पर भरोसा करना है. ग्रामीण इलाकों में जागरूकता की कमी के कारण स्थिति और गंभीर हो जाती है.

भारत के सबसे जहरीले सांप कौन हैं?1. कोबराकोबरा का जहर सीधे नर्वस सिस्टम पर असर डालता है. इसे न्यूरोटॉक्सिक जहर कहा जाता है. समय पर इलाज न मिलने पर मरीज को सांस लेने में परेशानी होने लगती है.

2. रसेल वाइपरयह भारत के सबसे खतरनाक सांपों में गिना जाता है. इसका जहर खून के जमने की प्रक्रिया को प्रभावित करता है और अंदरूनी ब्लीडिंग का कारण बन सकता है.

3. सॉ-स्केल्ड वाइपरइस सांप के काटने से तेज दर्द, सूजन और ब्लड क्लॉटिंग की समस्या हो सकती है. कई मामलों में तुरंत इलाज जरूरी होता है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

4. करैतकरैत का जहर भी नर्वस सिस्टम पर असर करता है. शुरुआत में लक्षण हल्के लग सकते हैं, लेकिन बाद में शरीर में लकवा और सांस लेने में गंभीर परेशानी हो सकती है.

बारिश में सांपों से बचने के आसान उपायबारिश के मौसम में थोड़ी सावधानी बड़े हादसे से बचा सकती है.घर के आसपास कचरा, लकड़ी, ईंट या कबाड़ जमा न होने दें. झाड़ियों की समय-समय पर सफाई करें. दीवारों और फर्श की दरारों को बंद कर दें ताकि सांप अंदर न आ सकें. खिड़कियों और दरवाजों पर मजबूत जाली लगाएं और नीचे डोर स्वीप का इस्तेमाल करें. रात में बाहर निकलते समय हमेशा टॉर्च का उपयोग करें. खेतों या घास वाले इलाकों में काम करते समय लंबे जूते और मोटे दस्ताने पहनना बेहतर रहता है. गमलों को सीधे जमीन पर रखने के बजाय स्टैंड पर रखें.

सांप के काटने के लक्षण कैसे पहचानें?शुरुआती संकेतकाटी गई जगह पर तेज दर्द, जलन, लालिमा और सूजन दिखाई दे सकती है. कई बार दो छोटे दांतों के निशान भी नजर आते हैं.

गंभीर लक्षणमिचली आना, उल्टी, कमजोरी, शरीर में झनझनाहट, सांस लेने में दिक्कत, धुंधला दिखाई देना, खून बहना, ब्लड प्रेशर कम होना या बेहोशी जैसे लक्षण गंभीर स्थिति की ओर इशारा करते हैं. ऐसे में एक मिनट भी देरी नहीं करनी चाहिए.

सांप काटने पर सबसे पहले क्या करें?सबसे पहले मरीज को शांत रखें और उसे ज्यादा चलने-फिरने न दें. जिस अंग पर सांप ने काटा है उसे स्थिर रखें. घाव को साफ पानी और साबुन से हल्के हाथों से साफ करें. इसके बाद बिना समय गंवाए मरीज को नजदीकी अस्पताल पहुंचाएं, जहां जरूरत पड़ने पर एंटी-स्नेक वेनम दिया जा सके.

ये गलतियां बिल्कुल न करेंसर्पदंश के बाद घाव पर चीरा लगाने की कोशिश न करें. जहर मुंह से चूसने का तरीका बिल्कुल गलत है. बहुत कसकर पट्टी बांधना, देसी दवाओं, झाड़-फूंक या घरेलू नुस्खों पर भरोसा करना भी खतरनाक साबित हो सकता है. इलाज में जितनी देर होगी, खतरा उतना बढ़ सकता है.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj