Rajasthan

क्या निजाम ने सच में जूती फेंकी थी? जानिए हैदराबाद गेट का असली इतिहास

Last Updated:July 01, 2026, 22:41 IST

Banaras Hindu University Hyderabad Gate: बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी का हैदराबाद गेट वर्षों से एक चर्चित कहानी की वजह से सुर्खियों में रहा है. इंटरनेट और लोककथाओं में दावा किया जाता है कि बीएचयू के लिए चंदा मांगने पहुंचे पंडित मदन मोहन मालवीय पर हैदराबाद के सातवें निजाम मीर उस्मान अली खान ने जूती फेंकी थी, जिसे बाद में नीलाम कर विश्वविद्यालय के लिए धन जुटाया गया. लेकिन ऐतिहासिक दस्तावेज इस कहानी की पुष्टि नहीं करते. शोधकर्ताओं और तेलंगाना राज्य अभिलेखागार में सुरक्षित रिकॉर्ड बताते हैं कि वर्ष 1920 में निजाम ने आधिकारिक शाही फरमान जारी कर बीएचयू को बिना किसी शर्त के एक लाख रुपये का आर्थिक सहयोग दिया था. उनके इसी योगदान के सम्मान में विश्वविद्यालय के प्रमुख प्रवेश द्वार का नाम हैदराबाद गेट रखा गया. यह कहानी बताती है कि लोककथाएं और इतिहास हमेशा एक जैसे नहीं होते, और तथ्य अक्सर कहीं अधिक रोचक होते हैं.

हैदराबाद. बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के मुख्य प्रवेश द्वारों में से एक हैदराबाद गेट न केवल अपनी भव्य वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यह भारत के साझा इतिहास और धर्मनिरपेक्ष परंपरा की एक अनोखी कहानी भी अपने भीतर समेटे हुए है. इस गेट के इतिहास को लेकर दशकों से इंटरनेट और आम लोगों के बीच एक कहानी काफी प्रचलित रही है.

कहा जाता है कि जब बीएचयू की स्थापना के लिए पंडित मदन मोहन मालवीय हैदराबाद के सातवें निज़ाम मीर उस्मान अली खान से आर्थिक सहायता मांगने पहुंचे, तो निज़ाम ने गुस्से में अपनी जूती उनकी ओर फेंक दी थी. लोककथाओं के अनुसार मालवीय जी ने उस जूती की नीलामी कर दी. जब निज़ाम को अपनी प्रतिष्ठा पर असर पड़ने का एहसास हुआ, तो उन्होंने भारी कीमत देकर वह जूती वापस खरीदी और वही राशि बीएचयू के निर्माण के लिए दान कर दी.

लोककथा और इतिहास में बड़ा अंतररिसर्च स्कॉलर औरंगजेब खान बताते हैं कि आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार जूती फेंकने और उसकी नीलामी की यह कहानी पूरी तरह एक लोककथा है. ऐतिहासिक प्रमाणों में ऐसा कोई उल्लेख नहीं मिलता कि पंडित मदन मोहन मालवीय और हैदराबाद के निज़ाम के बीच इस तरह की कोई अप्रिय घटना हुई हो. वास्तविक इतिहास यह बताता है कि वर्ष 1920 में बीएचयू के तत्कालीन चांसलर और बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह ने हैदराबाद के निज़ाम की कार्यकारी परिषद के समक्ष विश्वविद्यालय के लिए आर्थिक सहायता का औपचारिक प्रस्ताव रखा था. इस प्रस्ताव पर विचार करने के बाद निज़ाम मीर उस्मान अली खान ने विश्वविद्यालय को आर्थिक सहयोग देने का फैसला किया.

निज़ाम के योगदान पर रखा गया गेट का नामतेलंगाना राज्य अभिलेखागार में सुरक्षित ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, निज़ाम ने 7 जनवरी 1920 को एक आधिकारिक शाही फरमान जारी किया था. इस फरमान के तहत उन्होंने बिना किसी धार्मिक भेदभाव या शर्त के बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी को एक लाख रुपये की एकमुश्त सहायता प्रदान की. निज़ाम के इसी ऐतिहासिक योगदान के सम्मान में विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस भव्य प्रवेश द्वार का नाम हैदराबाद गेट रखा. यह गेट आज भी इस बात का प्रतीक माना जाता है कि शिक्षा, ज्ञान और राष्ट्र निर्माण के कार्य में धर्म और मजहब कभी बाधा नहीं बनते.

About the AuthorAnand Pandey

आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें

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