भजनलाल सरकार की बड़ी तैयारी, 300 महात्मा गांधी अंग्रेजी स्कूल फिर बनेंगे हिंदी मीडियम, शुरू हुआ बड़ा एक्शन

Last Updated:July 03, 2026, 16:51 IST
Bikaner News : राजस्थान में एक बार फिर से शिक्षा विभाग के बड़े कदम से राजनीतिक बवाल मचने की संभावना हो गई है. सूबे की भजनलाल सरकार ने पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार के समय हिन्दी से अंग्रेजी मीडियम में कन्वर्ट किए गए सरकारी स्कूलों को फिर से पुराने स्वरूप में लाने की तैयारी शुरू कर दी है. करीब 300 स्कूलों को फिर से हिन्दी मीडियम में कन्वर्ट किया जाएगा. इसके लिए प्रदेश के सभी जिलों के डीईओ से पांच बिन्दुओं की रिपोर्ट मांगी गई है. शिक्षा विभाग का कहना है कि इन स्कूलों का नामांकन काफी कम है.
बीकानेर. राजस्थान के शिक्षा महकमे को लेकर सूबे की भजनलाल सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है. पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार में हिन्दी मीडियम से अंग्रेजी मीडियम में बदले गए सरकारी स्कूलों को अब फिर वापस हिन्दी मीडियम में तब्दील किया जाएगा. शिक्षा विभाग ने प्रदेश के 300 महात्मा गांधी अंग्रेजी स्कूलों को फिर से हिंदी मीडियम में कन्वर्ट प्रक्रिया शुरू कर दी है. बताया जा रहा है कि इनमें नामांकन बेहद कम है. इसके लिए माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने प्रदेश के सभी डीईओ को इन स्कूलों को लेकर सात दिन में पांच बिन्दुओं पर रिपोर्ट मांगी है.
शिक्षा विभाग की कवायद से एक बार फिर से राजनीति गरमा सकती है. पूर्ववर्ती गहलोत सरकार के समय अंग्रेजी माध्यम की प्राइवेट स्कूलों को टक्कर देने के लिए बड़ी संख्या में हिन्दी माध्यम के सरकारी स्कूलों को अंग्रेजी मीडियम में कन्वर्ट किया गया था. गहलोत सरकार का तर्क था इससे आम आदमी जो अपने बच्चों को कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ाने का सपना देखता है लेकिन महंगी फीस की वजह से उसमें पढ़ा नहीं सकता. ऐसे अभिभावकों की चिंता को खत्म करने के लिए सरकार खुद ही अंग्रेजी माध्यम के स्कूल खोलेगी. चूंकि नए स्कूल खोलने में इन्फ्रास्ट्रक्चर में खासा खर्च आता इसलिए प्रदेश में संचालित सरकारी स्कूलों में से चुनिंदा स्कूलों को अंग्रेजी माध्यम में कन्वर्ट किया गया था. इनको नाम महात्मा गांधी अंग्रेजी स्कूल दिया गया था.
तब बीजेपी ने सवाल उठाए थे अब कांग्रेस उठा रही हैइस पर तत्कालीन विपक्षी पार्टी बीजेपी ने सवाल भी उठाए थे. विपक्ष का आरोप था कि सरकार ने बिना संसाधन के ही लोक लुभावन वादा कर यह कदम उठा लिया. वहीं हिन्दी मीडियम को अंग्रेजी मीडियम में कन्वर्ट किए जाने के बाद गहलोत सरकार का दावा था कि इन स्कूलों को भारी रेस्पॉस मिला है. अंग्रेजी मीडियम की इन स्कूलों में दाखिले को लेकर मारामारी है. इससे साफ है कि यह जनता की डिमांड है. लेकिन गहलोत सरकार के सत्ता से आउट होते ही जब बीजेपी सरकार आई तो उसने इस स्कूलों की समीक्षा का ऐलान कर दिया था. इस पर कांग्रेस बिफर पड़ी थी. उसका आरोप था कि बीजेपी सरकार के राजनीतिक द्वेषता के कारण कांग्रेस सरकार के समय शुरू की गई अच्छी योजनाओं को बंद करने पर तुली है.
पांच बिन्दुओं पर सात दिन में रिपोर्ट मांगी गई हैसूबे की भजनलाल सरकार ने ढाई साल बाद अब इस संबंध में एक्शन लेना शुरू कर दिया है. सरकार का तर्क है कि अंग्रेजी माध्यम की करीब 300 स्कूलों में नामांकन बेहद कम है. फिर भी पूरी स्थिति का आकलन किया जाएगा. इस आकलन के लिए सभी डीईओ (जिला शिक्षा अधिकारी) से एक सप्ताह के भीतर पांच बिन्दुओं पर रिपोर्ट मांगी गई है. इसमें स्कूल की ओवरऑल रिपोर्ट के अलावा आसपास कितनी दूरी पर अंग्रेजी स्कूल है इसकी भी रिपोर्ट मांगी गई है. रिपोर्ट आने के बाद तय किया जाएगा कि इनमें से कितने वापस हिन्दी मीडियम में बदला जाएगा. संभावना जताई जा रही है कि लगभग सभी अंग्रेजी स्कूलों पर संकट के बादल छा गए हैं. इन माना जा रहा है कि स्कूलों को वापस हिन्दी मीडियम में कन्वर्ट करते ही राजनीतिक बवाल मचना तय है.
About the AuthorSandeep Rathore
संदीप राठौड़ वर्तमान में न्यूज18 इंडिया में क्लस्टर हेड राजस्थान (डिजिटल) पद पर कार्यरत हैं। राजनीति, क्राइम और सामाजिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग में रूचि रखने वाले संदीप को पत्रकारिता का ढाई दशक से ज्यादा का अनुभव…और पढ़ें
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