Entertainment

कौन थे जसवंत सिंह खालरा? दिलजीत दोसांझ ने जिनका ‘सतलज’ में निभाया रोल, कहानी जानकर कांप जाएगी रूह

Last Updated:July 04, 2026, 22:13 IST

जी5 पर स्ट्रीम हो रही फिल्म ‘सतलज’ एक ऐसे हीरो के बारे में जिसने इंसानियत के खातिर अपनी जिंदगी गंवा दी. फिल्म के जरिये जसवंत सिंह खालरा की कहानी जब सामने आई, तो लोगों की रूह कांप उठी. उन्होंने पंजाब में उग्रवाद के समय गायब हुए लोगों और उनके सीक्रेट अंतिम संस्कारों के सच को उजागर किया था. उन्होंने पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाली थी. आखिरकार, उन्हें साल 1995 में अगवा करके मार दिया गया.

नई दिल्ली: वक्त के साथ जिन हीरोज को भुला दिया गया, उनमें से एक थे- जसवंत सिंह खालरा. वे एक ऐसी शख्सियत थे, जो डर के माहौल में भी डटे रहे और सच्चाई से नजरें नहीं हटाईं. जसवंत सिंह खालरा ऐसे ही एक व्यक्ति थे. वे मानवाधिकार कार्यकर्ता थे. उन्होंने ऐसे समय में सवाल पूछने का साहस दिखाया जब सवाल पूछना ही खतरनाक हो सकता था. (फोटो साभार: YouTube/Videograb)

जसवंत सिंह खालरा का यही नैतिक साहस उन्हें खास बनाता है, जिनकी कहानी ‘सतलज’ फिल्म में दिखाई गई है. दिलजीत दोसांझ ने उनका किरदार निभाया है. फिल्म जी5 पर स्ट्रीम हो रही है. हनी त्रेहान के निर्देशन में बनी फिल्म पंजाब के खौफनाक इतिहास को बयां करती है. फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे जसवंत सिंह उन घटनाओं का लेखा जोखा रख रहे थे, जिन्हें बहुत से लोग भुलाना चाहते थे.<br />(फोटो साभार: YouTube/Videograb)

जसवंत सिंह खालरा पंजाब के एक ह्यूमनराइट एक्टिविस्ट थे जो स्टेट में उग्रवाद के दौर में अपने काम से पहचाने गए. ऐसे समय में जब पंजाब डर, हिंसा, सरकारी एक्शन के डर के साय में जूझ रहा था, तब उन्होंने लोगों के लापता होने और हिरासत में हुई मौतों की रिपोर्टों की जांच शुरू की. उनके काम ने पंजाब में गैर-कानूनी हत्याओं की ओर ध्यान खींचा. एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी उनका जिक्र किया. उन्होंने बताया कि 6 सितंबर 1995 को उनके घर के बाहर से पुलिस ने कथित तौर पर उन्हें गिरफ्तार किया था, जिसके बाद उन्हें फिर कभी नहीं देखा गया.

Add as Preferred Source on Google

जसवंत सिंह खालरा की कहानी रिकॉर्ड की जांच तक सीमित नहीं है. यह कहानी जोर देती है कि लापता लोगों को सिर्फ आंकड़ों में नहीं बदला जाना चाहिए. उनका काम ताकतवर सोच पर टिकी है. हर जीवन की अपनी पहचान होनी चाहिए, हर परिवार को जवाब मिलना चाहिए और किसी भी सिस्टम को बिना जवाबदेही के लोगों को मिटाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए. (फोटो साभार: YouTube/Videograb)

फिल्म ‘सतलज’ इस दर्द को स्क्रीन पर बड़ी संजीदगी से उतारती है. यह किसी कमर्शियल या लाउड एक्शन फिल्म की तरह नहीं है, बल्कि एक ऐसे इंसान की अंदरूनी जंग को दिखाती है जिसके पास चुप रहकर विदेश भाग जाने का आसान रास्ता था, लेकिन उसने अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनी. जसवंत सिंह खालरा जानते थे कि सच का पीछा करने की कीमत बहुत भारी हो सकती है, फिर भी वे पीछे नहीं हटे. (फोटो साभार: YouTube/Videograb)

निर्देशक हनी त्रेहान का कहना है कि जसवंत सिंह खालरा किसी खास धर्म या राजनीति के लिए नहीं, बल्कि इंसानियत के लिए लड़ रहे थे. वहीं, दिलजीत दोसांझ के लिए यह किरदार निभाना सिर्फ एक्टिंग करना नहीं, बल्कि एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी थी. उन्हें उन परिवारों के आंसुओं और दर्द को महसूस करना था जिन्होंने अपनों को खोया था. फिल्म बिना किसी ड्रामे के दुख की असली मानवीय कीमत को दर्शकों के सामने रखती है. (फोटो साभार: YouTube/Videograb)

जसवंत सिंह खालरा ने साबित किया कि जब सिस्टम इंसानों को मिटाने पर उतारू हो, तो सबूत जुटाना और नाम लिखना ही विरोध का सबसे बड़ा जरिया बन जाता है. तीन दशक बीत जाने के बाद भी उनके उठाए सवाल आज भी अहम हैं.<br />(फोटो साभार: YouTube/Videograb)

जसवंत सिंह खालरा की जिंदगी का अंत भी उसी खौफनाक अंधेरे में हुआ जिसे वे बेनकाब कर रहे थे. 6 सितंबर 1995 को उन्हें अमृतसर में उनके घर के बाहर से अगवा कर लिया गया और फिर वे कभी नहीं लौटे. जो इंसान गायब लोगों की तलाश कर रहा था, वह खुद हमेशा के लिए गायब हो गया. बाद में इस मामले में पंजाब पुलिस के कई कर्मचारियों को अदालत ने दोषी भी ठहराया.<br />(फोटो साभार: YouTube/Videograb)

‘सतलज’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि उन गुमनाम लोगों को श्रद्धांजलि है जिन्हें इतिहास के पन्नों से मिटा दिया गया था. फिल्म हमें याद दिलाती है कि हर गायब चेहरे के पीछे एक रोता हुआ परिवार होता है. जी5 पर मौजूद फिल्म दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है कि जब सच बोलना सबसे खतरनाक हो, तब क्या हममें बोलने की हिम्मत होगी?

न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj