2006 की बाढ़ ने बदली जिंदगी, बाड़मेर का बेटा बना ‘रेगिस्तान का विंड मैन’, हवा से बना रहा बिजली

Last Updated:July 05, 2026, 12:24 IST
Barmer Wind Man Dungar Singh: बाड़मेर के सीमावर्ती गिराब क्षेत्र के सांखली गांव के डूंगर सिंह ने झेली बिजली संकट की परेशानी को अपनी प्रेरणा बना लिया. वर्ष 2006 की बाढ़ के दौरान महीनों तक अंधेरे में रहने के बाद उन्होंने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में काम करने का संकल्प लिया. आज वे गुजरात में अपनी कंपनी ‘सनविंड’ के जरिए विंड टरबाइन तैयार कर हवा से बिजली उत्पादन कर रहे हैं. उनका दावा है कि 1 किलोवाट का टरबाइन प्रतिदिन 10 से 12 यूनिट बिजली पैदा कर सकता है. इसके अलावा उनकी टीम प्लास्टिक कचरे और पुराने कपड़ों से बिजली बनाने की तकनीक पर भी काम कर रही है, जिससे ऊर्जा और पर्यावरण दोनों को फायदा मिल सकता है.
ख़बरें फटाफट
बाड़मेर. वर्ष 2006 की बाढ़ में जब महीनों तक घर में बिजली नहीं थी और घी के दीयों की रोशनी में रातें गुजारनी पड़ती थी, तब सीमावर्ती गिराब क्षेत्र के सांखली गांव के डूंगर सिंह ने ठान लिया था कि एक दिन बिजली की समस्या का समाधान खोजेंगे. आज वही डूंगर सिंह ‘रेगिस्तान के विंड मैन’ के नाम से पहचान बना रहे हैं. गुजरात में अपनी कंपनी के माध्यम से वे हवा से बिजली बनाने का काम कर रहे हैं.
सीमावर्ती गिराब क्षेत्र के सांखली गांव के रहने वाले डूंगर सिंह ने बचपन में अंधेरे और अभावों के बीच जो सपना देखा था आज उसे हकीकत में बदल दिया है. वर्ष 2006 में बाड़मेर में आई भीषण बाढ़ के दौरान उनका परिवार कई महीनों तक बिजली के बिना रहा. उस समय घर में मिट्टी तेल की चिमनियों से रोशनी की जाती थी, लेकिन जब मिट्टी का तेल भी खत्म हो गया तो घी के दीयों के सहारे रातें काटनी पड़ी.
सामान्य हवा से बनेगी बिजली
आज डूंगर सिंह गुजरात में अपनी कंपनी सनविंड के माध्यम से पवन ऊर्जा (विंड एनर्जी) के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. वे हवा से बिजली बनाने वाले विंड टरबाइन तैयार कर हवा से बिजली पहुंचा रहे हैं. डूंगर सिंह ने लोकल 18 को बताया कि प्रकृति में उपलब्ध हवा का सही उपयोग कर न केवल बिजली बनाई जा सकती है बल्कि दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है.
1 किलोवाट से बनती है 12 यूनिट बिजली
डूंगर सिंह बताते हैं कि उनकी कंपनी 1 किलोवाट से लेकर 1 मेगावाट क्षमता तक के विंड टरबाइन स्थापित करती है. 1 किलोवाट का टरबाइन प्रतिदिन लगभग 10 से 12 यूनिट बिजली का उत्पादन करता है, जिससे किसी सामान्य परिवार की दैनिक बिजली जरूरत आसानी से पूरी हो सकती है. इसकी लागत करीब 1.5 लाख रुपये आती है.
किसानों के लिए 50 हजार की टरबाइन बनाएगा बिजली
वे बताते हैं कि बड़े उद्योगों के साथ-साथ छोटे किसानों को ध्यान में रखते हुए कम लागत वाले विंड टरबाइन भी तैयार किए गए हैं. करीब 50 हजार रुपये की कीमत वाला छोटा टरबाइन किसानों के लिए उपलब्ध है, जिससे वे खेतों, ट्यूबवेल या घरेलू जरूरतों के लिए बिजली का उत्पादन कर सकते हैं.
कचरे से बिजली बनाने पर भी चल रहा शोध
डूंगर सिंह केवल पवन ऊर्जा तक सीमित नहीं हैं. वे बताते हैं कि उनकी टीम प्लास्टिक कचरे और पुराने कपड़ों से बिजली बनाने की तकनीक पर भी लगातार काम कर रही है. यदि यह तकनीक बड़े स्तर पर सफल होती है तो इससे एक ओर कचरे की समस्या कम होगी, वहीं दूसरी ओर वैकल्पिक ऊर्जा का नया स्रोत भी विकसित होगा.
About the Authordeep ranjan
दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें
न्यूजलेटर
अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज
खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में
सबमिट करें
Location :
Barmer,Rajasthan



