Rajasthan

क्या आप जानते हैं धौलपुर का असली नाम? सदियों में कई बार बदली पहचान, इतिहास की अनसुनी कहानी आई सामने

Last Updated:July 06, 2026, 09:37 IST

Dholpur Hindi News: ऐतिहासिक शहर धौलपुर केवल अपने किलों और लाल पत्थरों के लिए ही नहीं, बल्कि अपने नाम के पीछे छिपी रोचक कहानी के लिए भी जाना जाता है. इतिहासकारों के अनुसार प्राचीन काल में यह क्षेत्र मत्स्य प्रदेश का हिस्सा माना जाता था. समय के साथ इस नगर को धवलपुरी के नाम से पहचान मिली, जिसके बारे में माना जाता है कि इसका संबंध तत्कालीन शासकों या स्थानीय ऐतिहासिक परंपराओं से रहा. बाद में उच्चारण और समय के बदलाव के साथ यही नाम परिवर्तित होकर धौलपुर बन गया. आज यह शहर अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक धरोहरों और स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध है. धौलपुर का इतिहास राजस्थान की गौरवशाली परंपरा का महत्वपूर्ण अध्याय है.

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धौलपुर: राजस्थान के चंबल नदी के किनारे बसा धौलपुर शहर सिर्फ अपनी ऐतिहासिक इमारतों के लिए ही नहीं, बल्कि समय-समय पर बदलते रहे अपने नामों के लिए भी जाना जाता है. सदियों पुराने इतिहास में इस शहर को अलग-अलग काल में अलग-अलग नामों से पुकारा गया, जो इसकी समृद्ध विरासत की कहानी बताते हैं.

इतिहासकार अरविंद शर्मा ने बताया वैदिक काल में धौलपुर का क्षेत्र मत्स्य जनपद का हिस्सा था. उस समय यहां आर्यों की कबिलाई सत्ता का शासन था. मत्स्य जनपद का विस्तार आज के धौलपुर, अलवर और विराटनगर तक माना जाता है. यही कारण है कि उस दौर में इस पूरे क्षेत्र को मत्स्य प्रदेश के नाम से जाना जाता था.

नाम से आगे चलकर धौलपुर की पहचानवैदिक काल के बाद इस क्षेत्र को शूरसेन जनपद के नाम से पहचान मिलने लगी. इसके बाद आठवीं शताब्दी में चौहान वंश के शासकों ईसूक और चंडमासय के शासनकाल के दौरान चंबल किनारे बसे इस नगर को धवलपुरी कहा जाने लगा. इतिहासकारों का मानना है कि इसी नाम से आगे चलकर धौलपुर की पहचान विकसित हुई.

धौलपुर के ऐतिहासिक शेरगढ़ दुर्ग पर आक्रमणइतिहासकार अरविंद शर्मा बताते हैं कि तोमर वंश के शासक धोलनदेव के शासनकाल में धवलपुरी रियासत का नाम बदलकर धौलपुर रखा गया. इसके बाद से यही नाम स्थायी रूप से प्रचलित हो गया और आज तक इसी नाम से यह शहर जाना जाता है. मध्यकाल में जब दिल्ली सल्तनत पर सिकंदर लोदी का शासन था, उस समय धौलपुर के शासक विनायक देव थे. सिकंदर लोदी ने धौलपुर के ऐतिहासिक शेरगढ़ दुर्ग पर आक्रमण किया था. उस समय शेरगढ़ ही धौलपुर रियासत की राजधानी हुआ करता था.

कीरतनगर का नाम बदलकर कोठी रखाइसके बाद वर्ष 1805 में गोहद के राजा महाराजा कीरत सिंह ने अंग्रेजों के साथ समझौता किया. समझौते के बाद उन्हें धौलपुर रियासत का शासक बनाया गया. महाराजा कीरत सिंह ने धौलपुर में कीरतनगर बसाया और उसे अपनी नई राजधानी बनाया. इतिहासकार अरविंद शर्मा के अनुसार, महाराजा कीरत सिंह के बाद राजा भगवंत सिंह ने शासन संभाला. कुछ इतिहासकारों का दावा है कि उनके समय में कीरतनगर का नाम बदलकर कोठी रखा गया था, लेकिन अरविंद शर्मा इस तथ्य की पुष्टि नहीं करते है.

ऐतिहासिक पहचान और गौरव आज भी कायमसमय के साथ धौलपुर के नाम बदलते रहे, लेकिन इसकी ऐतिहासिक पहचान और गौरव आज भी कायम है. मत्स्य प्रदेश, शूरसेन जनपद, धवलपुरी, कीरतनगर और धौलपुर जैसे नाम इस शहर के हजारों वर्षों पुराने समृद्ध इतिहास और सांस्कृतिक विरासत की गवाही देते हैं.

About the AuthorJagriti Dubey

Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें

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Dhaulpur,Rajasthan

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