Rajasthan

साल 2029 तक उदयपुर की झीलों को मिलेगा सालभर पानी, 1700 करोड़ की देवास परियोजना ने पकड़ी रफ्तार

Last Updated:July 06, 2026, 16:19 IST

उदयपुर की लाइफलाइन मानी जाने वाली झीलों में सालभर पर्याप्त पानी सुनिश्चित करने के लिए देवास परियोजना के तीसरे और चौथे चरण का काम तेज़ी से चल रहा है. करीब 1700 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना के 2029 तक पूरा होने की उम्मीद है. परियोजना पूरी होने के बाद शहर की प्रमुख झीलों को जरूरत के समय पर्याप्त पानी मिलेगा, जिससे पेयजल व्यवस्था को मजबूती मिलेगी और भविष्य में जल संकट की समस्या काफी हद तक कम होने की संभावना है.

उदयपुर. शहर  में हर साल पानी की कमी की चिंता अब जल्द दूर हो सकती है. शहर की लाइफ लाइन मानी जाने वाली झीलों को सालभर पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने के लिए देवास परियोजना के तृतीय और चतुर्थ चरण पर तेजी से काम चल रहा है. पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने देवास टनल पहुंचकर परियोजना का निरीक्षण किया और अधिकारियों से इसकी प्रगति की जानकारी ली. राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि देवास परियोजना का तीसरा और चौथा चरण वर्ष 2029 तक पूरा होने की उम्मीद है. इस पर करीब 1700 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे  परियोजना पूरी होने के बाद उदयपुर की प्रमुख झीलों में जरूरत के समय पर्याप्त पानी पहुंचाया जा सकेगा, जिससे शहर की पेयजल व्यवस्था को भी बड़ा सहारा मिलेगा।

निरीक्षण के दौरान राज्यपाल अधिकारियों के साथ टनल के भीतर पहुंचे और निर्माण कार्यों का जायजा लिया. सिंचाई विभाग के अतिरिक्त मुख्य अभियंता वीरेंद्र सागर ने उन्हें परियोजना की वर्तमान स्थिति, तकनीकी पहलुओं और अब तक हुए कार्यों की जानकारी दी. अधिकारियों ने बताया कि काम तय समय के अनुसार आगे बढ़ रहा है. कटारिया ने बताया कि देवास परियोजना की परिकल्पना तत्कालीन मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया के समय की गई थी, लेकिन उस समय यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी. बाद में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के कार्यकाल में पहले और दूसरे चरण का काम पूरा हुआ. अब तीसरे और चौथे चरण पर तेजी से काम किया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि निर्माण के दौरान कई तकनीकी और प्रशासनिक चुनौतियां सामने आई, लेकिन सभी बाधाओं को दूर करते हुए परियोजना को आगे बढ़ाया गया. उनका विश्वास है कि परियोजना पूरी होने के बाद उदयपुर की झीलों में पानी की उपलब्धता बेहतर होगी और भविष्य में जल संकट की स्थिति काफी हद तक कम हो जाएगी. जल संरक्षण के लिहाज से भी यह परियोजना बेहद अहम मानी जा रही है. इससे न केवल झीलों का जलस्तर बनाए रखने में मदद मिलेगी, बल्कि बढ़ती आबादी के लिए पेयजल की उपलब्धता भी लंबे समय तक सुनिश्चित हो सकेगी.

About the AuthorMonali Paul

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें

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