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Sushant Sinha Desh ki Pathshala: मुस्लिम देश में PM मोदी का रौला… ऐसा स्वागत, ऐसी डील्स… पाक-चीन दोनों की नींद क्यों उड़ गई?

प्रधानमंत्री मोदी इस वक्त दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाले देश इंडोनेशिया गए हुए हैं… और वहां… एक मुस्लिम देश में भी भारत का रौला दिख रहा है… मोदी-मोदी हो रहा है… धाकड़ डील्स हो रही हैं… लेकिन अगर आप अपने यहां विपक्ष को सुन लीजिएगा तो माथा पीट लीजिएगा, क्योंकि इनके हिसाब से नरेंद्र मोदी तो विदेश में मौज करने गए हैं. उन्हें तो बस एक अवॉर्ड दिखा दो, वे भागे-भागे विदेश चले जाएंगे. ये लोग कहते रहते हैं कि मोदी को विदेश नीति नहीं आती, पूरी विदेश नीति फेल है.

खैर, ये लोग जितनी मर्जी छाती पीट लें… उधर भारत इंडोनेशिया में वो सब कर रहा है कि पाकिस्तान से लेकर चीन तक आंखें फाड़-फाड़कर देख रहे होंगे. आप ये भी सोचिए कि इंडोनेशिया वो देश है, जहां 24-25 करोड़ मुसलमान रहते हैं. दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम देश इंडोनेशिया है. करीब 90 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है. लेकिन इंडोनेशिया में जब से नरेंद्र मोदी पहुंचे हैं, वहां मोदी-मोदी हो रहा है. भारत-भारत हो रहा है. मुस्लिम देश में भारत की सांस्कृतिक विरासत, भारत की टेक्नोलॉजी और भारत के हथियारों का डंका बज रहा है.

पीएम मोदी ने बताया कि भारत की मिड-डे मील योजना और पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम का मॉडल भी इंडोनेशिया के साथ साझा किया जाएगा. यानी भारत में जो-जो बेहतरीन काम हो रहे हैं, चाहे वह UPI हो या मिसाइल सिस्टम, इंडोनेशिया उनमें दिलचस्पी दिखा रहा है.

खुद इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने माना कि वे पीएम मोदी को फॉलो करते हैं और उनकी योजनाओं से सीख लेते हैं. इंडोनेशिया के राष्ट्रपति ने मजाक में यह भी कहा कि अच्छी बात है, पीएम मोदी अपनी योजनाओं पर कॉपीराइट नहीं लगाते.

इंडोनेशिया के राष्ट्रपति ने कॉपीराइट की बात की, तो पीएम मोदी ने भी इसका जवाब दिया. इंडोनेशिया में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत का मंत्र सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास है. यहां कॉपीराइट की कोई बात नहीं है. पीएम मोदी के कामों और योजनाओं की दुनिया इसलिए नकल कर रही है क्योंकि भारत की ताकत अब पूरी दुनिया देख रही है.

डील ज‍िसने बढ़ाई चीन पाक की टेंशन

आज इंडोनेशिया ने भारत से ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइल खरीदने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है. ब्रह्मोस मिसाइल का जलवा तो दुनिया ऑपरेशन सिंदूर में पहले ही देख चुकी है. अब पीएम मोदी ने अपने इस दौरे से वैश्विक मंच पर भारत की स्वदेशी अस्त्र मिसाइल की भी एंट्री करा दी है. अब दुनिया में ब्रह्मोस के साथ-साथ भारत की अस्त्र मिसाइल की भी चर्चा हो रही है.

आप सोचिए…

एक समय था जब दुनिया के बड़े-बड़े रक्षा उपकरण निर्माता भारत के चक्कर लगाते थे कि किसी तरह भारत को हथियार बेचकर बड़ी डिफेंस डील कर लें. लेकिन आज तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है. अब दुनिया के देश भारत से हथियार खरीदने के लिए लाइन लगा रहे हैं.

और ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि… एक तरफ पीएम मोदी भारत में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूत कर रहे हैं… दूसरी तरफ भारत अपने हथियारों की ताकत भी दुनिया को दिखा चुका है. ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने एक साथ दो काम कर दिए.

पहला…

दुनिया को भारतीय स्वदेशी हथियारों की ताकत दिखा दी.

दूसरा…

पाकिस्तान को करारा जवाब देकर यह साबित कर दिया कि भारत के हथियार सिर्फ प्रदर्शन के लिए नहीं, बल्कि युद्ध के मैदान में भी बेहद प्रभावी हैं.

अब देखिए…

जिस ब्रह्मोस मिसाइल ने पाकिस्तान की नींद उड़ाई, उसी मिसाइल को खरीदने के लिए आज भारत और इंडोनेशिया के बीच बड़ा समझौता हुआ है.

इस समझौते के तहत

भारत इंडोनेशिया को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल उपलब्ध कराएगा.
इंडोनेशिया अपनी ब्रह्मोस मिसाइल क्षमता को और मजबूत कर सकेगा.
इसके लिए भारत अतिरिक्त मिसाइल बैटरियां भी उपलब्ध कराएगा.
समझौते में मिसाइल सिस्टम, सपोर्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑपरेटर ट्रेनिंग, मेंटेनेंस सर्विस और टेक्निकल असिस्टेंस भी शामिल है.
अलग-अलग रिपोर्टों के मुताबिक भारत और इंडोनेशिया के बीच यह डील करीब 4,200 करोड़ रुपये की हो सकती है.
ब्रह्मोस मिसाइल को अपने बेड़े में शामिल करने से चीन के खिलाफ इंडोनेशिया की समुद्री सुरक्षा और मजबूत होगी.
ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस मिसाइल ने जिस तरह पाकिस्तान को झटका दिया, उसके बाद दुनिया के कई देशों की नजर अब इस मिसाइल पर है.

भारत में बने हथियारों पर भरोसा

समंदर में चीन की बढ़ती दादागीरी से परेशान देश अपनी सुरक्षा के लिए भारत की ओर देख रहे हैं. वे भारत में बने हथियारों पर भरोसा जता रहे हैं.
इंडोनेशिया से पहले फिलीपींस और वियतनाम भी ब्रह्मोस मिसाइल में रुचि दिखा चुके हैं. इसके अलावा यूएई समेत करीब छह देश ब्रह्मोस खरीदने में दिलचस्पी दिखा चुके हैं.
फिलीपींस के बाद इंडोनेशिया, भारत से ब्रह्मोस खरीदने वाला दूसरा आसियान (ASEAN) देश बन सकता है. मलेशिया और थाईलैंड जैसे देश भी ब्रह्मोस में रुचि दिखा रहे हैं.
यदि ये देश भी ब्रह्मोस खरीदते हैं, तो दक्षिण चीन सागर में एक तरह की ब्रह्मोस बेल्ट तैयार हो जाएगी.यानी ऐसे देशों का एक सुरक्षा नेटवर्क, जो भारत के हथियारों पर भरोसा करेगा. भारत से हथियार खरीदकर ये देश अमेरिका और चीन के बीच की रणनीतिक खींचतान से भी काफी हद तक स्वतंत्र रह सकेंगे.

क्‍यों यह डील बेहद खास

यह डील ऐसे समय में हो रही है, जब अमेरिका की सुरक्षा के भरोसे बैठी कई खाड़ी देशों पर ईरान ने हमला कर दिया और अमेरिका उन्हें पूरी तरह सुरक्षा नहीं दे सका.

इस घटना के बाद समुद्र में चीन से निपटने के लिए अमेरिका पर निर्भर कई देशों को भी यह एहसास हुआ कि अब केवल एक देश के भरोसे नहीं रहा जा सकता.

अब वे भारत को एक मजबूत, भरोसेमंद और उभरते हुए रणनीतिक साझेदार के रूप में देख रहे हैं. यही वजह है कि चीन के प्रभाव वाले इलाके में अब धीरे-धीरे ‘ब्रह्मोस बेल्ट’ तैयार होती दिखाई दे रही है.

इंडोनेशिया को अक्सर इंडो-पैसिफिक का जियोस्ट्रैटेजिक हब कहा जाता है. दक्षिण-पूर्व एशिया भारत के लिए बेहद अहम इलाका है. अब यह भी समझिए कि आखिर दक्षिण-पूर्व एशिया के देश ब्रह्मोस में इतनी दिलचस्पी क्यों दिखा रहे हैं.

ब्रह्मोस क्‍यों आ रही पसंद

दरअसल, ब्रह्मोस लंबी दूरी की सुपरसोनिक एंटी-शिप क्रूज़ मिसाइल है. दक्षिण-पूर्व एशिया के जो देश ब्रह्मोस खरीद रहे हैं या खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं… उनके पास ब्रह्मोस जैसी ताकतवर मिसाइल होने से समुद्री सुरक्षा में बड़ा सामरिक लाभ मिलेगा.  ये वे देश हैं, जो दक्षिण चीन सागर (South China Sea) के उन अहम समुद्री मार्गों के पास स्थित हैं, जहां से चीन के युद्धपोत और व्यापारिक जहाज गुजरते हैं.

ऐसे देशों के पास ब्रह्मोस होने का मतलब है कि जरूरत पड़ने पर वे समुद्र में चीन के जहाजों को भी निशाना बना सकते हैं. यानी बिना चीन जैसी विशाल नौसेना बनाए भी ये देश अपनी समुद्री सुरक्षा को काफी मजबूत कर सकते हैंः यानी ब्रह्मोस की वजह से चीन के सामने एक नई रणनीतिक चुनौती खड़ी होगी.  जिस रफ्तार और सटीकता से ब्रह्मोस हमला करती है, उससे बचना बेहद मुश्किल माना जाता है.

भारत का अस्‍त्र भी इंडोनेश‍िया को म‍िलेगा

भारत और इंडोनेशिया के बीच अस्त्र मिसाइल को लेकर भी बड़ा समझौता हुआ है. यह मिसाइल DRDO ने विकसित की है.  अब आपको बताते हैं कि आखिर इंडोनेशिया ने अस्त्र मिसाइल पर दांव क्यों लगाया है.

जिन सुखोई लड़ाकू विमानों ने पीएम मोदी के विमान को इंडोनेशिया में एस्कॉर्ट किया था… भविष्य में उन्हीं विमानों में भारत की बनाई अस्त्र मिसाइल भी तैनात हो सकती है. भारत से ब्रह्मोस और अस्त्र जैसे आधुनिक हथियार खरीदकर इंडोनेशिया अपनी रक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर रहा है.  इन हथियारों की मदद से वह समुद्र में चीन की बढ़ती आक्रामकता का मुकाबला करने की तैयारी कर रहा है. दूसरी ओर भारत भी उन देशों के साथ अपने रक्षा संबंध मजबूत कर रहा है, जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में संतुलन बनाए रखना चाहते हैं. इसी संदर्भ में जब पीएम मोदी ने इंडोनेशिया की संसद को संबोधित किया… तो वहां से उन्होंने मुक्त, सुरक्षित और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत का संदेश दिया.

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