सौंफ की खुशबू से महका मारवाड़! महिलाओं ने मेहनत से बना दिया ब्रांड, अब खुद संभाल रहीं उद्योग की कमान

पाली. खाने के बाद सौंफ जो अक्सर मुफवास के तौर पर खाई जाती है, मगर क्या आप जानते हैं मारवाड़ का एक ऐसा गांव है जिसकी सौंफ की खुशबू देशभर में अपनी पहचान रखती है. हम बात कर रहे हैं पाली जिले के जीवंद कलां गांव की. यह गांव आज किसी परिचय का मोहताज नहीं है, क्योंकि यहां का सौंफ उद्योग पूरे देश में प्रसिद्ध है. लेकिन इस उद्योग की सबसे बड़ी और खास बात जानते हैं क्या है? इसकी पूरी कमान यहां की ग्रामीण महिलाएं संभाल रही हैं! राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद यानी ‘राजीविका’ के सहयोग से चल रही इस अनूठी सौंफ उद्योग यूनिट ने स्थानीय महिलाओं को घर बैठे न सिर्फ रोजगार दिया है, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और सशक्त भी बनाया है.
राजस्थान के पाली जिले में सोमेसर कस्बे के पास बसा एक छोटा सा गांव है जीवंद कलां. आज यह गांव किसी आम परिचय का मोहताज नहीं है, बल्कि अपनी खास सौंफ की खुशबू और स्वाद की बदौलत देश भर के नक्शे पर चमक रहा है. यहां की मिट्टी और आबोहवा में तैयार होने वाली सौंफ की गुणवत्ता इतनी लाजवाब है कि इसकी मांग देश के कोने-कोने में होने लगी है. लेकिन इस सफलता के पीछे सबसे बड़ी ताकत इस गांव की वो ग्रामीण महिलाएं हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत से इस छोटे से गांव को एक बड़े उद्योग केंद्र में बदल दिया है.
राजीविका के जरिए बदली महिलाओं की तकदीर
इस कमाल की शुरुआत राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (राजीविका) के सहयोग से हुई, जिसने गांव की साधारण महिलाओं को संगठित कर एक सशक्त ‘सौंफ उद्योग यूनिट’ की शक्ल दी. स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी इन महिलाओं ने पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर सौंफ का प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन खुद संभालना शुरू किया. आज यहां महिलाएं सिर्फ सौंफ साफ नहीं करतीं, बल्कि उससे कई बेहतरीन और नायाब उत्पाद तैयार कर रही हैं, जिनकी शुद्धता और स्वाद बाजार में सबसे अलग है.
बेहद खास है सौंफ बनाने की प्रक्रिया
जीवंद कलां की इस यूनिट में तैयार होने वाले सौंफ के विभिन्न उत्पादों की निर्माण प्रक्रिया बेहद खास है. महिलाएं साफ-सफाई, शुद्धता और पारंपरिक स्वाद का पूरा ध्यान रखती हैं. यही वजह है कि यहां से निकलने वाले प्रोडक्ट्स की क्वालिटी बड़े-बड़े ब्रांड्स को टक्कर देती है. अब इस उद्योग को और आधुनिक रूप देने के लिए उत्पाद की बेहतर ब्रांडिंग, आकर्षक पैकेजिंग और नए दौर के डिजिटल मार्केटिंग माध्यमों का इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि मारवाड़ के इस असली स्वाद को सीधे बड़े बाजारों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स तक आसानी से पहुंचाया जा सके.
आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण की तस्वीर
यह कहानी सिर्फ एक मसाले के व्यापार की नहीं है, बल्कि ग्रामीण अंचल में महिला सशक्तिकरण और बड़े सामाजिक बदलाव का जीता-जागता उदाहरण है. कल तक जो महिलाएं घर के घूंघट और चूल्हे-चौके तक सीमित थीं, आज वे इस सफल उद्योग को खुद चला रही हैं. इस काम ने उन्हें न केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि उनके भीतर गजब का आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता (लीडरशिप) भी पैदा की है. अब वे समाज में पूरे सम्मान के साथ अपनी पहचान बना चुकी हैं.
महिलाओं की आय में हो रही बढोतरी
एकजुट और संगठित होकर काम करने का नतीजा यह हुआ है कि इन महिलाओं की आय में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिससे उनके परिवारों का जीवनस्तर सुधरा है. जीवंद कलां की ये जाबांज महिलाएं सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर, नए-नए हुनर सीखकर और स्वरोजगार के दम पर अपने क्षेत्र के विकास में सबसे बड़ा योगदान दे रही हैं. यह उद्योग साबित करता है कि अगर ग्रामीण महिलाओं को सही अवसर मिले, तो वे गांव की मिट्टी से उपजी चीज को भी देश भर का सबसे बड़ा ब्रांड बना सकती है.



